ममता बनर्जी की पार्टी में बड़ा भूचाल: 20 बागी TMC सांसदों ने ‘नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी’ में विलय किया, NDA को मिला समर्थन लोकसभा अध्यक्ष से मांगी अलग बैठक व्यवस्था

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए रविवार का दिन एक बड़े राजनीतिक भूकंप की तरह रहा। ममता बनर्जी की पार्टी के करीब 20 बागी लोकसभा सांसदों ने औपचारिक रूप से एक पंजीकृत क्षेत्रीय दल ‘नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) में विलय का ऐलान कर दिया। यह विलय पार्टी के वरिष्ठ नेता सुदीप बंदोपाध्याय, काकोली घोष दस्तिदार और सताब्दी रॉय ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात के बाद घोषित किया।

बंगाल की हार से शुरू हुई यह टूट

TMC पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली भारी हार के बाद से अपने सांसदों और विधायकों के बड़े विद्रोह से जूझ रही है। BJP ने 207 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जनादेश हासिल किया और पश्चिम बंगाल में TMC के 15 साल के शासन को समाप्त कर दिया। इस करारी हार के बाद से ही पार्टी में अंदरूनी बगावत और असंतोष लगातार बढ़ता रहा था।

लोकसभा अध्यक्ष से मिले बागी सांसद, मांगी अलग सीट

19 से 20 सांसदों जिनमें क्रिकेटर से नेता बने युसूफ पठान, सुदीप बंदोपाध्याय और काकोली घोष दस्तिदार शामिल हैं ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर सदन में अलग बैठक व्यवस्था की मांग करते हुए एक पत्र सौंपा। यह मुलाकात केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई बैठक के बाद हुई। सुदीप बंदोपाध्याय की बागी खेमे में एंट्री इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे पहले ममता बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगियों में गिने जाते थे।

काकोली घोष दस्तिदार का ऐलान: “हम NCPI में मिल रहे हैं, NDA को देंगे समर्थन”

काकोली घोष दस्तिदार ने विलय की पुष्टि करते हुए कहा, “AITC से चुने गए हम बीस सांसदों ने अध्यक्ष से मुलाकात की और अलग बैठने का अनुरोध करते हुए एक पत्र दिया। ये बीस सांसद हमारी कुल संख्या के दो-तिहाई से अधिक हैं। हम नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी में विलय कर रहे हैं। आगे बढ़कर हम राष्ट्र के लिए काम करेंगे और NDA के साथ मिलकर चलेंगे।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विलय सीधे BJP में नहीं, बल्कि एक अलग पंजीकृत दल NCPI में हो रहा है — जो AAP के राज्यसभा विभाजन से अलग है।

NCPI कौन है? जानिए इस छोटे दल के बारे में

नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) भारत निर्वाचन आयोग में पंजीकृत एक ‘अपंजीकृत क्षेत्रीय दल’ (RUPP) है। इस पार्टी की मौजूदगी असम, त्रिपुरा, बंगाल और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में है। पार्टी ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में उनाकोटी जिले की कैलाशहर सीट से जहाँगीर अली को अपना उम्मीदवार उतारा था। इस छोटे दल के साथ विलय की रणनीति इसलिए अपनाई गई ताकि दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई से बचा जा सके।

दलबदल विरोधी कानून से कैसे बचेंगे ये सांसद?

बागी खेमे ने यह चतुर रणनीति इसलिए अपनाई क्योंकि जब TMC की कुल संख्या के दो-तिहाई से अधिक सांसद एक पंजीकृत दल में विलय करते हैं, तो यह व्यक्तिगत दलबदल नहीं बल्कि एक वैध पार्टी विलय माना जाता है। इससे उन्हें दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) से संरक्षण मिलता है।

NDA की ताकत में होगा इजाफा

इन सांसदों के समर्थन से लोकसभा में NDA की ताकत बढ़कर 313 हो जाएगी। बागियों ने दावा किया है कि दो और सांसद उनके साथ आने वाले हैं, जिससे लोकसभा में उनकी संख्या 22 तक पहुँच सकती है।

TMC का पलटवार: अभिषेक बनर्जी ने लिखा अध्यक्ष को पत्र

TMC नेतृत्व ने भी इस कदम को रोकने की कोशिश की। TMC के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा में संसदीय दल के नेता अभिषेक बनर्जी ने अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर आग्रह किया कि AITC को सदन में एकमात्र मान्यता प्राप्त इकाई माना जाए और किसी भी अलग गुट या धड़े को कोई मान्यता, दर्जा या सुविधा न दी जाए। अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों और दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि कानूनी ढांचा आंतरिक विभाजन को स्वतंत्र राजनीतिक इकाई के रूप में मान्यता नहीं देता।

राजनीतिक विश्लेषण: ममता के लिए यह बड़ा झटका क्यों है?

सुदीप बंदोपाध्याय का बागी धड़े में जाना TMC के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। बंदोपाध्याय पाँच बार के सांसद हैं और TMC के संसदीय दल के नेता रह चुके हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद अब लोकसभा में भी इतने बड़े पैमाने पर विभाजन होना ममता बनर्जी की पार्टी के लिए दोहरी मार है।

आगे क्या?

अब सारी नजरें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के फैसले पर टिकी हैं। अगर वे बागी धड़े को अलग सीट और मान्यता देते हैं, तो यह TMC के लिए आधिकारिक रूप से दो टुकड़े होने जैसा होगा। दूसरी ओर, TMC ने दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। यह मामला आने वाले दिनों में संसद के अंदर और बाहर राजनीति को गरमाए रखेगा।

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