आग की झूठी अफ़वाह ने ली 13 ज़िंदगियाँ, पुष्पक एक्सप्रेस से कूदे यात्री कर्नाटक एक्सप्रेस की चपेट में आए

पैनिक में चेन खींची, पटरी पर उतरे और दूसरी ट्रेन ने रौंद डाला; महाराष्ट्र के जलगाँव में रेल इतिहास की एक और दर्दनाक त्रासदी

एक झूठी अफ़वाह ने महाराष्ट्र के जलगाँव ज़िले में 13 निर्दोष यात्रियों की जान ले ली और 15 से अधिक को घायल कर दिया। लखनऊ-मुंबई पुष्पक एक्सप्रेस में आग लगने की अफ़वाह फैलते ही दहशत में आए यात्री पटरियों पर कूद गए और बगल की पटरी से गुज़र रही कर्नाटक एक्सप्रेस की चपेट में आ गए।

घटना कहाँ और कब हुई?

जलगाँव के ज़िला मजिस्ट्रेट कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार यह हादसा बुधवार शाम लगभग 5 बजकर 5 मिनट पर मुंबई से करीब 400 किलोमीटर दूर, पचोरा के निकट महेजी और परढाडे स्टेशनों के बीच हुआ।  यह स्थान एक तीखे मोड़ पर स्थित है जिसे स्थानीय भाषा में ‘उसखेड़ा टर्निंग’ कहते हैं।

अफ़वाह कैसे फैली?

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने पुणे में पत्रकारों को बताया कि ट्रेन के पेंट्री कार के एक चाय-विक्रेता ने डिब्बे में आग लगने की आवाज़ लगाई। उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती से आए दो यात्रियों ने यह झूठी सूचना आगे फैला दी, जिससे जनरल कोच और उससे सटे डिब्बे में भगदड़ मच गई।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, जब ब्रेक लगाए गए तो पहियों से चिंगारियाँ निकलीं। यात्रियों ने इसे आग समझ लिया और अलार्म चेन खींच दी। एक वरिष्ठ रेल अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि पुष्पक एक्सप्रेस के एक डिब्बे में ‘हॉट एक्सल’ या ‘ब्रेक-बाइंडिंग’ (जकड़न) के कारण चिंगारियाँ उत्पन्न हुईं, जिससे यात्री घबरा गए।

कैसे हुई मौतें?

चेन खींचने के बाद पुष्पक एक्सप्रेस रुकी और घबराए हुए यात्री पटरियों पर उतर गए ठीक उसी वक्त बेंगलुरू से दिल्ली जा रही ट्रेन नंबर 12627 कर्नाटक एक्सप्रेस बगल की पटरी से तेज़ रफ़्तार में गुज़र रही थी और वह इन यात्रियों को रौंदते हुए निकल गई। घटनास्थल से 25 घायलों को अस्पतालों में भर्ती किया गया, जिनमें से 15 को छुट्टी दे दी गई, जबकि 10 अभी भी उपचाराधीन हैं और उनमें से तीन की हालत नाजुक बताई जा रही है।

मृतकों की पहचान — नेपाली नागरिक भी शामिल

हादसे में मारे गए 13 लोगों में से कम से कम 4 नेपाली नागरिक थे जिनमें एक नाबालिग लड़का और दो महिलाएँ भी शामिल हैं। पहचाने गए नेपाली पीड़ितों में मुंबई के कोलाबा निवासी 43 वर्षीया कमला नवीन भंडारी, भिवंडी (ठाणे) निवासी 60 वर्षीया जवाकला भाटे, 40 वर्षीय लच्छीराम खटारू पासी और 11 वर्षीय इम्तियाज़ अली शामिल हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया और मुआवज़ा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दुखद हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि जलगाँव में रेल पटरियों पर हुई इस दुर्घटना से वे अत्यंत व्यथित हैं और शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएँ व्यक्त की हैं। रेल मंत्रालय ने मृतकों के परिजनों को 1.5 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को 50,000 रुपये और मामूली चोटें आए यात्रियों को 5,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिवारों को 5 लाख रुपये का मुआवज़ा देने की घोषणा की और घायलों का सारा खर्च राज्य सरकार द्वारा उठाने का आश्वासन दिया।

जाँच और आगे की कार्यवाही

सेंट्रल सर्किल के रेलवे सुरक्षा आयुक्त इस घटना के कारणों की जाँच करेंगे। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और सेंट्रल रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुँचे और जाँच शुरू की।

अफ़वाहों का खतरनाक खेल

यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि भीड़भाड़ वाले जनरल डिब्बों में अफ़वाहें किस कदर विनाशकारी साबित हो सकती हैं। भारतीय रेलवे दुनिया का सबसे बड़ा एकीकृत रेल नेटवर्क है, लेकिन इस पर हर साल सैकड़ों हादसे होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जनरल डिब्बों में यात्रियों को आपात स्थितियों में सही व्यवहार के बारे में जागरूक करना बेहद ज़रूरी है।

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