Pralhad Joshi Education Minister: नई दिल्ली, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया और केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा। प्रल्हाद जोशी फिलहाल उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालयों का भी प्रभार संभाल रहे हैं।
यह फैसला NEET-UG 2026 परीक्षा में पेपर लीक के बड़े घोटाले और उसके बाद देशभर में फैले छात्र आंदोलन के दबाव में आया। मई में हुई इस परीक्षा में करीब 20 लाख से ज्यादा छात्र शामिल हुए थे। पेपर लीक का खुलासा होने के बाद सरकार ने परिणाम रद्द कर जून में दोबारा परीक्षा करवाई। इस पूरे प्रकरण ने हजारों युवाओं के भविष्य को असमंजस में डाल दिया।
आत्महत्याएं और डर की कहानी
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा रद्द होने और री-टेस्ट की अनिश्चितता ने कई छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ा दिया। 19 वर्षीय शेख सना, जो डॉक्टर बनने का सपना देख रही थीं, री-NEET से एक दिन पहले “मुझे माफ करना” लिखकर आत्महत्या कर लीं। उनके पिता शेख जाफर हुसैन ने जंतर मंतर पर कहा, “डर ने उसे मार डाला। री-NEET का डर।” राजस्थान के झुंझुनू में प्रदीप कुमार और गुजरात में 17 वर्षीय कहान पटेल सहित कई छात्रों की मौतें परीक्षा रद्द होने से जुड़ी बताई जा रही हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का दावा है कि इस प्रकरण से जुड़ी आत्महत्याओं की संख्या 21 तक पहुंच गई, हालांकि आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं हुई है। CBI ने ट्यूशन सेंटर्स के शिक्षकों और एजेंटों सहित 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पेपर लीक को “दर्दनाक” बताया और तेज अदालतों में सख्त कार्रवाई का वादा किया।
जंतर मंतर से संसद तक का आंदोलन
जून के मध्य से दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में छात्र और युवा लगातार धरना दे रहे थे। यह आंदोलन सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था, अवसरों की कमी और जवाबदेही की व्यापक मांग बन गया। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस की लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ, जिसमें 180 से ज्यादा लोग घायल हुए। विपक्ष ने संसद में हंगामा किया और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे के पोस्ट में लिखा कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं से वे दुखी हैं। उन्होंने कहा कि यह व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का सवाल नहीं है। “देश की युवा शक्ति असली ताकत है। जंतर मंतर और देशभर की स्थिति को देखते हुए, ताकि राष्ट्रविरोधी ताकतें फायदा न उठा सकें, राष्ट्रीय एकता बनी रहे, किसी छात्र का भविष्य कानूनी उलझनों में न फंसे और बच्चे पढ़ाई पर ध्यान दें, मैंने प्रधानमंत्री को इस्तीफा सौंप दिया है।”
आंदोलन का अंत और आगे की राह
प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने 36 दिन का आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की। सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने, कोई जवाबी कार्रवाई न करने और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को नियमों के अनुसार मुआवजा देने पर सहमति जताई। परीक्षा सुधारों पर आगे चर्चा होगी। प्रल्हाद जोशी के शिक्षा मंत्रालय संभालने के साथ अब सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों के विश्वास को वापस पाने की चुनौती का सामना कर रही है। यह घटनाक्रम भारतीय युवाओं के दबाव और जवाबदेही की मांग की ताकत को रेखांकित करता है।

