नोएडा के सेक्टर 53 में टॉवर (संचार/बिजली/अन्य) लगाने के विरोध में स्थानीय लोग लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और यह दावा कर रहे हैं कि प्राधिकरण और उसके संबंधित उद्यान (हॉर्टिकल्चर) विभाग ने उनकी बात नहीं सुनी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले साल यहाँ सैकड़ों पेड़ लगाए गए थे, जिन्हें काटकर टावर लगाने की योजना के लिए जगह बनाई जा रही है, जिससे क्षेत्र में प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ेंगे।
प्रदर्शन और स्थानीय नाराज़गी
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि 7 मई से वे टावर स्थापना का विरोध कर रहे हैं और बार-बार प्राधिकरण कार्यालय तथा होर्टिकल्चर विभाग का ध्यान इस ओर आकर्षित कराने की कोशिश की। प्रतिदिन की पेटिशन, प्रदर्शन और सोशल मीडिया पोस्ट के बाद भी अधिकारियों की तरफ से कोई ठोस जवाब या रोकने की पहल सामने नहीं आई। निवासी राजेश (नाम बदल कर) ने बताया, “हमने पड़ोस में हरियाली बढ़ाने के लिए पिछले साल सैकड़ों पौधे लगाए थे; अब वही पेड़ कटवा दिए गए और टावर के लिए जगह बना दी जा रही है। हमारी सांसों और बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा।”
हॉर्टिकल्चर विभाग का मौन
स्थानीयों ने होर्टिकल्चर के वरिष्ठ अधिकारी आनंद मोहन से भी संपर्क कर जानकारी दी और उनसे हस्तक्षेप की मांग की, परन्तु उनका कोई सकारात्मक जवाब या कार्रवाई न होने से हताशा बढ़ी है। विभागीय अधिकारी आनंद मोहन से संपर्क करने के भी कई प्रयासों के बाबजूद अभी तक लिखित या मौखिक कोई आधिकारिक टिप्पणी उपलब्ध नहीं हुई। विभाग की तरफ से प्रतिक्रिया न मिलने का उल्लेख लोगों में गुस्सा बढ़ा रहा है।
प्राधिकरण पर भ्रष्टाचार और ज़मीनी हितों की बलि देने के आरोप
प्रदर्शनों में शामिल लोग और कुछ सामाजिक कार्यकर्ता आरोप लगा रहे हैं कि प्राधिकरण अधिकारी नोएडा की हर इंच भूमि से आर्थिक लक्ष्य साधने के मार्ग पर हैं और पर्यावरणीय बचाव को नजरअंदाज कर रहे हैं। उनका कहना है कि पेड़ों को काटकर जितनी जमीन खाली की जा रही है, वही किसी न किसी निजी या सार्वजनिक लाभ के लिए इस्तेमाल की जा रही है—इसमें पारदर्शिता नहीं है। एक स्थानीय नागरिक ने कहा, “ऐसा लगता है कि प्राधिकरण और कुछ अधिकारी भूमि से पैसे कमाने के लिए पर्यावरण को कुर्बान कर रहे हैं।”
पर्यावरणीय और स्वास्थ्य प्रभाव
स्थानीय पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि पेड़ों की कटाई से वायु प्रदूषण में वृद्धि, स्थानीय तापमान में वृद्धि और प्राकृतिक ध्वनि व धूल से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं। बच्चों और बुज़ुर्गों में सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। हरा-भरा आवासीय इलाका अचानक खुले व कंक्रीट क्षेत्र में बदलने से आवासीय जीवन-गुणवत्ता प्रभावित होगी।
प्राधिकरण से संपर्क और जवाबदेही
इस खबर के प्रकाशन तक नोएडा प्राधिकरण के आधिकारिक प्रवक्ता से कोई लिखित टिप्पणी प्राप्त नहीं हुई। प्राधिकरण के किसी प्रतिनिधि द्वारा दिए गए आधिकारिक बयान न मिलने का संकेत समाचार में शामिल किया गया है और आगे की प्रतिक्रिया मिलने पर इससे अपडेट किया जाएगा। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और फिल्टर-उच्च न्यायालय के समक्ष भी शिकायत दर्ज कराने की बात कही है और अगले कदम के रूप में कलेक्टर ऑफिस तथा पर्यावरण संरक्षण निकायों से अपील करने की योजना बना रहे हैं।
आगे क्या हो सकता है
स्थानीय नागरिक और सामाजिक समूह स्थानीय अदालत में याचिका डाल सकते हैं और टावर स्थापना पर रोक के लिए अंतरिम आदेश का अनुरोध कर सकते हैं। नोएडा प्राधिकरण से पारदर्शिता की माँग, पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA) और वैकल्पिक स्थानों की खुले तौर पर छानबीन की मांग उठ सकती है। होर्टिकल्चर विभाग से पुनर्विरोपण, मुआवज़ा और पर्यावरणीय क्षति की भरपाई के उपाय माँगे जाने की सम्भावना है।
स्थानीय संपर्क और साक्ष्य
स्थानीय निवासियों ने पेड़ों की कटाई और विरोध प्रदर्शन के ताज़ा फोटो, विडियो और गवाहों के नाम उपलब्ध कराए हैं, जिन्हें प्रमाण के रूप में रखना चाहेंगे। यदि प्राधिकरण या होर्टिकल्चर विभाग की ओर से भविष्य में कोई औपचारिक प्रतिक्रिया मिलती है, तो उसे समाचार में शामिल कर पाठकों को अपडेट किया जाएगा। यह रिपोर्ट स्थानीय निवासियों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी और उनकी शिकायतों पर आधारित है। प्राधिकरण/हॉर्टिकल्चर विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त होते ही लेख में संशोधन कर दिया जाएगा।

