इजरायल-ईरान युद्धविराम भंग: दोनों देशों में फिर हमले, ट्रंप की चेतावनी बेअसर

अप्रैल 2026 में हुए युद्धविराम को भंग करते हुए इजरायल और ईरान ने एक-दूसरे पर सीधे हमले शुरू कर दिए हैं। ईरान ने इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जबकि इजरायल ने ईरान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में महशहर पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स समेत सैन्य ठिकानों पर हमले किए। यह अप्रैल के युद्धविराम के बाद दोनों देशों के बीच पहला प्रत्यक्ष टकराव है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है तथा वैश्विक तेल कीमतें प्रभावित हुई हैं। इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने बताया कि उन्होंने ईरान के महशहर पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स में हमला किया, जो युद्ध शुरू होने के बाद ऊर्जा क्षेत्र का पहला लक्ष्य बना। ईरानी मीडिया के अनुसार, प्लांट की कुछ उत्पादन लाइनों को नुकसान पहुंचा है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि इजरायल ने एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया। इजरायल ने इन हमलों को ईरान की मिसाइल हमलों का जवाब बताया। इससे पहले ईरान ने इजरायल पर 11 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जो मुख्य रूप से उत्तरी इजरायल को निशाना बनाकर की गईं। इजरायली सेना ने दावा किया कि ज़्यादा मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर लिया गया और कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। यमन से भी एक मिसाइल हमले की सूचना मिली, जो युद्धविराम के बाद पहला ऐसा प्रयास था। ईरानी राजदूत ने इसे “मैनियाकल रेजिम” के खिलाफ जवाबी कार्रवाई बताया।

ट्रंप की नाराजगी के बावजूद हमले जारी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को फोन कर आगे के हमलों से रोकने की अपील की थी, लेकिन इजरायल ने इसे नजरअंदाज कर दिया। ट्रंप ने कहा कि ये नए हमले उनके ईरान के साथ शांति समझौते पर कोई असर नहीं डालेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया, “मैं शॉट्स कॉल करता हूं, नेतन्याहू नहीं।” ट्रंप ने नेतन्याहू को “क्रेजी” कहते हुए पहले भी फोन पर फटकार लगाई थी। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता करीब है, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना और क्षेत्रीय स्थिरता शामिल है। हालांकि, ईरान लेबनान में युद्धविराम, प्रतिबंध हटाने, फ्रोजेन एसेट्स रिलीज और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण मान्य कराने की मांग कर रहा है।

ईरान ने एसेट्स से मुआवजे की धारणा खारिज की
इस बीच, ईरान ने अमेरिका के उस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें उसके फ्रोजेन एसेट्स को यूएस के सहयोगी देशों (खासकर खाड़ी देशों) को युद्ध क्षति के मुआवजे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। ईरान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर काजेम घरीबाबादी ने कहा कि ईरानी संपत्तियां “न तो वॉशिंगटन की वॉर स्पॉइल्स हैं और न ही उसके सहयोगियों के लिए पेमेंट फंड”। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना सहमति के ऐसे किसी कदम को “अंतरराष्ट्रीय गलत कार्य” माना जाएगा और ईरान उचित जवाब देगा। घरीबाबादी ने कहा कि कुछ क्षेत्रीय सरकारें ईरान के खिलाफ आक्रामकता में शामिल हुई हैं, इसलिए वे मुआवजे की मांग नहीं कर सकतीं। उलटे, उन्हें ईरान को हुए नुकसान की भरपाई करनी चाहिए।

पृष्ठभूमि और प्रभाव
यह तनाव लेबनान में इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष से जुड़ा है। इजरायल ने हाल ही में बेरूत के दक्षिणी उपनगरों (दहिया) पर हमले किए, जिसके जवाब में ईरान सक्रिय हुआ। युद्ध शुरू होने (फरवरी 2026) के बाद से दोनों पक्षों के बीच कई बार टकराव हो चुका है, लेकिन अप्रैल का युद्धविराम अब टूटता दिख रहा है। इन हमलों से तेल कीमतें 3% से अधिक बढ़ गईं, ब्रेंट क्रूड $96 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंका से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है। क्षेत्र में हजारों मौतें हो चुकी हैं और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन शांति वार्ता को आगे बढ़ाना चाहता है, लेकिन इजरायल की सुरक्षा चिंताएं और ईरान की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाएं समझौते में बाधा बन रही हैं। फिलहाल दोनों पक्ष सतर्क हैं, लेकिन स्थिति बिगड़ने की आशंका बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस escalation पर नजर रखे हुए है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य देशों से युद्धविराम बहाल करने की अपीलें हो रही हैं। आगे की घटनाएं पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता तय करेंगी।

यह भी पढ़ें: I.N.D.I.A ब्लॉक की बैठक शुरू, खरगे-राहुल समेत कई बड़े नेता शामिल, रणनीति पर मंथन

यहां से शेयर करें