नोएडा की सोसायटियों में मंहगाई की मार : टाटा यूरेका पार्क में रातोंरात 48% की भारी बढ़ोतरी

नोएडा। दिल्ली से सटे नोएडा की हाईराइज सोसायटियों में रहने वाले हजारों परिवारों के बजट पर एक और बड़ा झटका लगा है। पेट्रोल, डीजल, बिजली और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के बीच अब सोसायटियों के भारी-भरकम मेंटेनेंस शुल्क ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। ताजा मामला सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसायटी का है, जहां प्रबंधन ने रातोंरात रखरखाव शुल्क (मेंटेनेंस चार्ज) में करीब 48 प्रतिशत की अप्रत्याशित बढ़ोतरी कर दी है।

प्रबंधन द्वारा बृहस्पतिवार की देर रात जारी किए गए नोटिस के अनुसार, मेंटेनेंस शुल्क को 4.96 रुपये से सीधे बढ़ाकर 7.30 रुपये प्रति वर्ग फीट कर दिया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि ये नई दरें पिछली तारीख यानी 1 अप्रैल से ही प्रभावी भी कर दी गई हैं।

अधूरी सुविधाएं और बढ़ा हुआ दाम: निवासियों में भारी आक्रोश

टाटा यूरेका पार्क के निवासी इस मनमाने फैसले से बेहद गुस्से में हैं। दिलचस्प बात यह है कि अभी महज 15 दिन पहले ही सोसायटी के निवासियों ने कॉमन एरिया के खराब रखरखाव और अधूरी मूलभूत सुविधाओं के खिलाफ प्रबंधन के सामने जमकर प्रदर्शन किया था। निवासियों का आरोप है कि एक तरफ तो उन्हें वादे के मुताबिक बेहतर सुविधाएं और रखरखाव नहीं मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ उन पर भारी शुल्क थोपा जा रहा है।

अन्य सोसायटियों का भी यही हाल, कहीं 6 महीने में दो बार बढ़े दाम

यह समस्या सिर्फ टाटा यूरेका पार्क तक सीमित नहीं है। नोएडा की कई अन्य सोसायटियों में भी मेंटेनेंस शुल्क में 20 से 48 फीसदी तक का इजाफा देखा जा रहा है। कई सोसायटियों में तो महज छह महीने के भीतर ही दो-दो बार चार्ज बढ़ा दिए गए हैं।

  • जेपी विशटाउन (विभिन्न क्लस्टर्स): यहाँ के अलग-अलग क्लस्टर्स में मेंटेनेंस शुल्क में 25 प्रतिशत तक की वृद्धि लागू कर दी गई है।
  • सिविटेक स्टेडिया सोसायटी: यहाँ भी मेंटेनेंस शुल्क को 2.55 रुपये से बढ़ाकर लगभग 3.10 रुपये प्रति वर्ग फीट करने का नोटिस जारी हो चुका है, जिस पर अंतिम निर्णय होना बाकी है।
  • गुलशन बोटनिया (सेक्टर-144): इस सोसायटी में भी शुल्क बढ़ोतरी की सूचना दी गई है। यहाँ के निवासी जितेंद्र सिंह ने बताया, “महज दो महीने पहले ही मेंटेनेंस शुल्क बढ़ाया गया था। अब फिर से बढ़ाने का नोटिस आ गया है। आज होने वाली बैठक में इस पर निर्णय लिया जाएगा, हम इस बढ़ोतरी के पूरी तरह खिलाफ हैं।”
  • गोल्फ सिटी (प्लॉट-7): यहाँ शुल्क बढ़ाकर 1 रुपये से सीधे 1.80 रुपये प्रति वर्ग फीट कर दिया गया है। निवासी विश्वदीप ने नाराजगी जताते हुए कहा, “सोसायटी में न तो ढंग से लिफ्ट का संचालन होता है और न ही कोई अन्य सुविधाएं हैं, फिर भी दाम बढ़ा दिए गए।”
  • गौर ग्रैंड्योर सोसायटी: यहाँ भी रखरखाव और बुनियादी सुविधाओं में सुधार का हवाला देकर शुल्क में बढ़ोतरी की सूचनाएं जारी की गई हैं।

प्रबंधन का तर्क: कामगारों के न्यूनतम वेतन और GST का असर

इस चौतरफा विरोध के बीच सोसायटियों के प्रबंधन और बिल्डर्स ने अपना पक्ष रखते हुए इस बढ़ोतरी को मजबूरी बताया है। प्रबंधन का तर्क है कि:

  1. न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी: हाल ही में कामगारों के न्यूनतम वेतन में 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिसके कारण सुरक्षा गार्ड, हाउसकीपिंग, गार्डनिंग और अन्य स्टाफ की सैलरी का खर्च काफी बढ़ गया है।
  2. लागत में वृद्धि: वेतन में इस बढ़ोतरी के कारण प्रबंधन को 20 से 40 पैसे प्रति वर्ग फीट की दर से रखरखाव शुल्क बढ़ाना पड़ रहा है।
  3. जीएसटी (GST) और अन्य टैक्स: इसके अलावा जीएसटी और अन्य परिचालन लागतों (Operational Costs) के बढ़ने से सोसायटियों का पुराना बजट पूरी तरह बिगड़ चुका है।

निवासियों का सवाल- जब सुविधाएं नहीं, तो पैसा क्यों दें?

प्रबंधन के तर्कों को निवासी सिरे से खारिज कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि महंगाई की चौतरफा मार के बीच यह उनके मासिक बजट पर सीधा डाका है। निवासियों का साफ तौर पर आरोप है कि सोसायटियों के भीतर बुनियादी ढांचा और सुरक्षा व्यवस्था जस की तस बनी हुई है, ऐसे में सुविधाओं में बिना किसी सुधार के मनमाने ढंग से दाम बढ़ाना पूरी तरह से अनुचित है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर नोएडा की कई सोसायटियों में निवासियों और प्रबंधन के बीच टकराव और बढ़ने के आसार हैं।

 

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