नोएडा। साइबर अपराध पर बड़ी कार्रवाई करते हुए नोएडा पुलिस ने ‘म्यूल अकाउंट’ (Mule Account) गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस गिरोह से जुड़े सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों को बुधवार शाम करीब साढ़े चार बजे गिरफ्तार किया गया। जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर अपराधियों को बेचता था। इन खातों का इस्तेमाल देशभर में साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करने और निकालने के लिए किया जाता था।
एडीसीपी स्वतंत्र सिंह ने गुरुवार को आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों से देशभर में हुई 74 साइबर ठगी की शिकायतें जुड़ी मिली हैं। पुलिस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।
क्या होता है म्यूल अकाउंट?
म्यूल अकाउंट (Mule Account) ऐसा बैंक खाता होता है, जिसका उपयोग साइबर अपराधी ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर करने या नकदी निकालने के लिए करते हैं। कई बार ऐसे खाते लालच, कमीशन या फर्जी दस्तावेजों के जरिए खुलवाए जाते हैं। इससे साइबर अपराधी अपनी असली पहचान छिपाने में सफल हो जाते हैं और जांच एजेंसियों के लिए मुख्य आरोपी तक पहुंचना कठिन हो जाता है।
साइबर अपराधों में म्यूल अकाउंट बेहद अहम कड़ी माने जाते हैं, क्योंकि ठगी की रकम सबसे पहले इन्हीं खातों में पहुंचाई जाती है और फिर कई अन्य खातों में भेजकर उसका स्रोत छिपा दिया जाता है।
फर्जी कंपनियों के नाम पर खुलवाए जाते थे खाते
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद इन खातों से जुड़े मोबाइल फोन में एक विशेष APK ऐप इंस्टॉल की जाती थी।
यह ऐप सक्रिय होते ही बैंक से आने वाले सभी एसएमएस और ओटीपी सीधे गिरोह के सरगना ‘राधे’ तक पहुंचा देती थी। इसी ओटीपी का इस्तेमाल कर साइबर अपराधी खातों में आई ठगी की रकम को आसानी से ट्रांसफर या निकाल लेते थे।
74 साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़े मिले खाते
पुलिस के अनुसार, जांच में इन बैंक खातों का संबंध देशभर में दर्ज 74 साइबर फ्रॉड मामलों से मिला है। आशंका है कि इन खातों के जरिए करोड़ों रुपये की साइबर ठगी की रकम का लेन-देन किया गया है। पुलिस अब बैंक ट्रांजैक्शन, मोबाइल डेटा और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
लोगों से की गई अपील
नोएडा पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति के कहने पर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, इंटरनेट बैंकिंग या मोबाइल नंबर किसी अन्य को इस्तेमाल के लिए न दें। थोड़े से लालच में दिया गया बैंक खाता साइबर अपराध का माध्यम बन सकता है और खाते के धारक के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

