आईआईएम-बी प्रोफेसर दंपति पर मणिपुर मूल की नौकरानी से मारपीट का आरोप, 5 साल से यातनाओं का खुलासा

आईआईएम बेंगलुरु के एक प्रोफेसर और उनकी पत्नी पर उनकी मणिपुर मूल की नौकरानी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने दावा किया है कि जून 2021 से मई 2026 तक उनके कैंपस आवास में रहते हुए उसे शारीरिक यातनाएं, कैद और अपर्याप्त भोजन दिया गया। पुलिस ने दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है, जिसमें मारपीट, अवैध हिरासत और मानव तस्करी जैसे धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।

लंबे समय से चली आ रही यातनाओं का दर्दनाक ब्यौरा  

पुलिस FIR के अनुसार, 30 वर्षीय पीड़िता को मणिपुर से लाकर बेंगलुरु लाया गया था, जहां उसे प्रोफेसर के कैंपस स्थित फ्लैट में नौकरानी के रूप में रखा गया। उसने शिकायत में बताया कि दंपति ने उसे नियमित रूप से पीटा, खाने में भेदभाव किया और बाहर निकलने की मनाही थी। कभी-कभी उसे सिर्फ रोटी या चावल के बिना सब्जी दी जाती, जबकि परिवार को भरपूर भोजन मिलता। यातनाओं में चप्पलों, बेल्ट और लकड़ी से मारना शामिल था। पीड़िता ने कहा कि वह डर के मारे चुप रही, लेकिन हाल ही में मौका पाकर पुलिस के पास पहुंची। आईआईएम बेंगलुरु प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रोफेसर को निलंबित कर दिया है। संस्थान के निदेशक प्रोफेसर डेवी शेट्टी ने बयान जारी कर कहा, “हम इस मामले की गंभीरता को समझते हैं और पूर्ण जांच का समर्थन करते हैं। संस्थान के मूल्यों के विरुद्ध कोई भी व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” प्रोफेसर की पहचान गोपनीय रखी गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार वे मार्केटिंग विभाग से जुड़े हैं।

पुलिस जांच में नया मोड़  

बेंगलुरु पुलिस के डीसीपी (साउथ) ने सोमवार को बताया कि पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए भेजा गया है, जहां उसके शरीर पर पुरानी चोटों के निशान मिले हैं। जांच में यह भी सामने आया कि दंपति ने उसे वीजा और दस्तावेजों से वंचित रखा था, जिससे वह भाग न सके। पुलिस अब मणिपुर पुलिस से संपर्क कर रही है ताकि अन्य संभावित पीड़ितों का पता लगाया जा सके। दोनों आरोपी फरार बताए जा रहे हैं, और उनकी तलाश में टीमें लगी हुई हैं। केस में आईपीसी की धारा 323 (मारपीट), 342 (गलत हिरासत) और पास्को एक्ट की संभावना जताई जा रही है।

मणिपुर समुदाय में आक्रोश  

मणिपुर के छात्र संगठनों और प्रवासी समुदाय ने सोशल मीडिया पर इस घटना की कड़ी निंदा की है। मणिपुर स्टूडेंट्स यूनियन बेंगलुरु के अध्यक्ष ने कहा, “यह नस्लीय भेदभाव का रूप है। उत्तर-पूर्वी महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार रोकना होगा।” मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंडिया ने भी स्वतंत्र जांच की मांग की है। यह मामला मणिपुर-मिजोरम हिंसा के बाद उत्तर-पूर्वी लोगों पर बढ़ते हमलों के सिलसिले में नया उदाहरण बन गया है। पुलिस ने पीड़िता को सुरक्षित स्थान पर रखा है और जांच जारी है। अगली सुनवाई में अदालत से रिमांड की मांग की जाएगी।

यह भी पढ़ें: पीएम मोदी की “आर्थिक देशभक्ति” की अपील या वित्तीय आपातकाल? जानिए क्या होता है अनुच्छेद 360

यहां से शेयर करें