हरियाणा सरकार के एक वरिष्ठ IAS अधिकारी की सेवानिवृत्ति के दिन ही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के तत्कालीन सदस्य सचिव प्रदीप कुमार (2011 बैच, HCS से IAS में पदोन्नत) पर आरोप है कि उन्होंने बोर्ड के फिक्स्ड डिपॉजिट के नाम पर 169 करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी राशि का गबन किया। यह हरियाणा के किसी भी विभाग में बैंकिंग फ्रॉड से हुआ अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय नुकसान बताया जा रहा है। CBI के अनुसार, प्रदीप कुमार ने अपने कार्यकाल (31 अगस्त 2022 से 10 दिसंबर 2025) के दौरान HSPCB के फंड्स को IDFC First Bank की चंडीगढ़ स्थित सेक्टर-32 ब्रांच में ट्रांसफर करने की अनुमति दी। यह राशि फिक्स्ड डिपॉजिट बनाने के बहाने भेजी गई, लेकिन कोई FD नहीं बनाई गई। इसके बजाय, बोर्ड के नाम पर बिना किसी मंजूरी के खोला गया खाता फ्रॉडुलेंट डेबिट ट्रांजेक्शन्स के जरिए खाली कर दिया गया। पैसे शेल कंपनियों के माध्यम से कथित तौर पर साइफन कर लिए गए।
रिटायरमेंट डे पर ड्रामा
अधिकारी के आखिरी कार्य दिवस पर CBI ने उन्हें गिरफ्तार किया। इससे पहले कुमार जांच से बचते रहे, बार-बार नोटिस का जवाब नहीं दिया और पंचकूला कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, जिसकी सुनवाई 2 जुलाई को होनी थी। CBI टीम ने उनके ठिकाने का पता लगाकर उन्हें गिरफ्तार किया। कुछ दिन पहले तक वे फरार बताए जा रहे थे और उनका फोन स्विच ऑफ था। यह मामला कुल 504 करोड़ रुपये (कुछ रिपोर्टों में 590-657 करोड़) के बड़े बैंकिंग घोटाले का हिस्सा है, जिसमें हरियाणा के आठ सरकारी विभाग शामिल हैं। फंड्स को फर्जी या नॉन-एग्जिस्टेंट फिक्स्ड डिपॉजिट के नाम पर IDFC First Bank और AU Small Finance Bank में जमा किया गया, फिर शेल एंटिटीज के जरिए साइफन कर लिया गया। CBI ने पहले ही IDFC First Bank और AU Small Finance Bank के छह अधिकारियों, तीन हरियाणा सरकार के अधिकारियों, दो कंपनियों और छह निजी व्यक्तियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।
पहले भी IAS अधिकारियों की गिरफ्तारी
इस घोटाले में पहले दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों पंकज अग्रवाल और राम कुमार सिंह को गिरफ्तार किया जा चुका है। प्रदीप कुमार की गिरफ्तारी तीसरी बड़ी कार्रवाई है। कुमार को अप्रैल 2026 में सस्पेंड किया गया था। CBI ने हरियाणा स्टेट विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो से केस अपने हाथ में लिया था। CBI की जांच चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (CSCL) और चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (CREST) से जुड़े मामलों तक भी पहुंच गई है, जहां एक वरिष्ठ IFoS अधिकारी पहले ही गिरफ्तार हो चुका है।
CBI का बयान
CBI ने कहा कि वह गबन की गई सार्वजनिक धनराशि का पूरा ट्रेल ट्रेस करने, क्राइम प्रॉसीड्स को रिकवर करने और सभी दोषियों को सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह घोटाला सरकारी विभागों में फंड मैनेजमेंट और बैंकिंग प्रक्रियाओं में गंभीर कमियों को उजागर करता है। प्रदीप कुमार के वकील या परिवार की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। मामले की जांच जारी है और आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। यह घटना हरियाणा प्रशासन में भ्रष्टाचार और जवाबदेही को लेकर नए सवाल खड़े करती है, खासकर जब एक अधिकारी रिटायरमेंट के दिन ही सलाखों के पीछे पहुंच गया। जनता की नजर अब CBI की आगे की कार्रवाई और फंड रिकवरी पर टिकी हुई है।

