अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने इरान के साथ वार्ता जल्द शुरू होने की उम्मीद जताई है, जबकि इरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बंद करने का दावा किया है। लेबनान में इजरायली हमलों और युद्धविराम के उल्लंघन के बीच स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित अमेरिका-इरान वार्ता की संभावनाएं अनिश्चित बनी हुई हैं, लेकिन दोनों पक्षों के दूत वार्ता के लिए तैयार दिख रहे हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, लेबनान में शुक्रवार को युद्धविराम लागू होने के कुछ घंटों बाद इजरायली हमलों में कम से कम 10 लोग मारे गए। इजरायल ने हेज़बुल्लाह के हमलों का जवाब देने का दावा किया, जबकि हेज़बुल्लाह ने इजरायली सैनिकों को लेबनान में स्वतंत्र घूमने की अनुमति न देने की चेतावनी दी। यह घटना अमेरिका-इरान के बीच 60 दिनों की वार्ता की शर्तों को प्रभावित कर रही है, जिसमें हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और वैश्विक तेल आपूर्ति को स्थिर करना शामिल है।
हॉर्मुज पर तनाव
आईआरजीसी ने दावा किया है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य तब तक बंद रहेगा जब तक अमेरिका-इरान समझौते की मुख्य शर्तें पूरी न हो जाएं, जिसमें इजरायल का लेबनान से पूर्ण निकासी, अमेरिकी नौसेना का फारस की खाड़ी से हटना और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत शामिल है। आईआरजीसी ने जहाजों को चेतावनी दी कि वे क्षेत्र के पास न आएं। हालांकि, इरान के विदेश मंत्रालय ने आईआरजीसी के दावे को खारिज करते हुए कहा कि जलडमरूमध्य खुला है और बंद होने का कोई आधार नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने तस्नीम न्यूज एजेंसी को बताया कि सुरक्षा स्थिति सामान्य है। इससे पहले भी आईआरजीसी ने कई जहाजों को अपनी अनुमति से गुजरने की बात कही थी, जो क्षेत्र में नियंत्रण बनाए रखने का संकेत देता है।
विश्लेषकों का मानना है कि हॉर्मुज का मुद्दा वैश्विक तेल बाजार के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति यहां से गुजरती है। हालिया तनाव के बावजूद कुछ रिपोर्टों में जहाजों के गुजरने की पुष्टि हुई है, जो दर्शाता है कि पूर्ण बंदी नहीं लगी है।
स्विट्जरलैंड में वार्ता की तैयारी
ट्रंप प्रशासन के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं, जहां इरानी विदेश मंत्री अब्बास अराकची के साथ बैठक की उम्मीद है। जेरेड कुशनर भी वहां मौजूद हैं। वाइस प्रेसिडेंट वैंस ने अपनी यात्रा को अंतिम समय में स्थगित कर दिया था, लेकिन उन्होंने कहा कि वार्ता “अच्छी” चल रही है और वे जल्द ही स्विट्जरलैंड जा सकते हैं। यह वार्ता 17 जून को पाकिस्तान की मध्यस्थता में हस्ताक्षरित अंतरिम 14-पॉइंट समझौते (इस्लामाबाद एमओयू) पर आधारित है। समझौते में 60 दिनों की अवधि में परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध राहत, $300 बिलियन पुनर्निर्माण फंड और हॉर्मुज को खोलने जैसे मुद्दों पर स्थायी समझौता करने का प्रावधान है। ट्रंप ने इसे “इरान को समाप्त” करने वाला कदम बताया, जबकि आलोचक इसे बहुत अधिक रियायतें देने वाला मानते हैं।
पृष्ठभूमि और प्रभाव
फरवरी 2026 में शुरू हुए अमेरिका-इजरायल संघर्ष में इरान पर हमले हुए, जिसमें हजारों मौतें हुईं और इरानी परमाणु व सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा। अंतरिम समझौते के बावजूद लेबनान में तनाव जारी है, जहाँ हिज़बुल्लाह और इजरायल के बीच झड़पें हो रही हैं। लेबनान स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, मार्च से अब तक 3,912 लोग मारे गए। वैश्विक स्तर पर तेल कीमतें बढ़ी हैं, जो मुद्रास्फीति को बढ़ावा दे रही हैं। अमेरिका ने इरान को तेल निर्यात पर छूट और संपत्ति अनफ्रीज करने का वादा किया है, लेकिन इजरायल को वार्ता से बाहर रखा गया है, जिसने समझौते को अस्वीकार कर दिया है।
आगे की चुनौतियां
वार्ता में इरान का परमाणु कार्यक्रम (संवर्धन सीमा), मिसाइल कार्यक्रम और प्रॉक्सी समूहों (जैसे हिज़बुल्लाह) का समर्थन प्रमुख मुद्दे रहेंगे। कई विश्लेषक इसे “JCPOA 2.0” की ओर बढ़ते कदम के रूप में देखते हैं, लेकिन क्षेत्रीय अस्थिरता और घरेलू राजनीति (अमेरिका में मिडटर्म चुनाव) इसे जटिल बना रही है। दोनों पक्ष शांतिपूर्ण समाधान की बात कर रहे हैं, लेकिन लेबनान में जारी संघर्ष और हॉर्मुज पर विवाद वार्ता की सफलता पर सवाल खड़े करते हैं। वैश्विक समुदाय निकट नजर रखे हुए है, क्योंकि इस मुद्दे का असर मध्य पूर्व की स्थिरता और विश्व अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

