भारत स्काउट एवं गाइड की भारी लापरवाही: 12 साल बाद मिला स्काउट अवार्ड का सर्टिफिकेट, ग्रेटर नोएडा की राखी की पीड़ा, सिस्टम की लापरवाही उजागर

भारत स्काउट एवं गाइड की भारी लापरवाही: मेहनत करो, पुरस्कार जीतो लेकिन सर्टिफिकेट पाने के लिए एक दशक से अधिक समय तक दफ्तरों के चक्कर काटते रहो। यही दर्दनाक सच्चाई है ग्रेटर नोएडा की राखी की, जिसने वर्षों पहले भारत स्काउट एवं गाइड में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अवार्ड तो जीता, लेकिन उसका प्रमाण पत्र आज 12 साल बाद उसके हाथ में पहुंचा।

क्या है पूरा मामला?

ग्रेटर नोएडा की राखी ने स्कूली दिनों में भारत स्काउट एवं गाइड (BSG) में अपनी प्रतिभा और परिश्रम से एक प्रतिष्ठित पुरस्कार अर्जित किया था। इस पुरस्कार का सर्टिफिकेट न केवल उसकी उपलब्धि का प्रमाण था, बल्कि नौकरी और प्रतियोगी परीक्षाओं में भी इसका महत्व है। रेलवे भर्ती से लेकर NDA और सरकारी नौकरियों तक स्काउट-गाइड का सर्टिफिकेट अभ्यर्थियों को विशेष लाभ दिलाता है। लेकिन राखी के लिए यह सर्टिफिकेट सिर्फ एक कागज का टुकड़ा बनकर रह गया जो अब उसको मिला है ।

सिस्टम की लापरवाही या भ्रष्टाचार?

स्काउट-गाइड की व्यवस्था के अनुसार, राज्य पुरस्कार के 12 माह बाद राष्ट्रपति अवार्ड के लिए राष्ट्रीय मुख्यालय की वेबसाइट पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना होता है और परीक्षण शिविर से गुजरना पड़ता है। राज्य पुरस्कार (राज्य पुरस्कार बैज) राज्यपाल या राज्य संघ के संरक्षक/अध्यक्ष द्वारा राज्य मुख्य आयुक्त की अनुशंसा पर प्रदान किया जाता है। इस लंबी और जटिल प्रक्रिया में कहीं न कहीं राखी का प्रमाण पत्र फाइलों के बीच दब गया और वर्षों से उसे कोई जवाब नहीं मिला।

नौकरी-परीक्षा में हुआ नुकसान

स्काउट-गाइड सर्टिफिकेट का महत्व महज औपचारिकता नहीं है। राज्य पुरस्कार का बैज धारकों को कई शैक्षणिक संस्थानों में बोनस अंक और प्रवेश प्रक्रिया में लाभ मिलता है, और केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) सहित कई संस्थाएं इसे मान्यता देती हैं। रेलवे भर्ती परीक्षाओं में भी इसे विशेष कोटे के तहत मान्यता दी जाती है। राखी ने जो पुरस्कार जीता, उसका लाभ उसे तब मिलना चाहिए था जब वह परीक्षाओं और नौकरी की तैयारी कर रही थी। 12 साल की इस देरी ने न केवल उसके मनोबल को ठेस पहुंचाई, बल्कि संभवतः उसके करियर के कई अवसर भी छिन गए।

व्यापक समस्या — अकेली नहीं है राखी

यह मामला केवल राखी की व्यक्तिगत पीड़ा तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश में भारत स्काउट एवं गाइड की व्यवस्था में प्रमाण पत्र वितरण को लेकर वर्षों से शिकायतें आती रही हैं। भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के राष्ट्रीय मुख्यालय ने हाल ही में नियम समिति, राष्ट्रीय कार्यकारी समिति और राष्ट्रीय परिषद की विशेष बैठकें आयोजित की हैं, जो दर्शाता है कि संगठनात्मक स्तर पर सुधार की कोशिशें हो रही हैं लेकिन जमीन पर स्थिति अभी भी बदहाल है।

क्या कहती है व्यवस्था?

इस मामले में जिला शिक्षा विभाग और स्काउट-गाइड के स्थानीय अधिकारियों से जवाब मांगा जाना चाहिए। बच्चों की मेहनत और उपलब्धियों को उचित सम्मान देना न केवल नैतिक दायित्व है, बल्कि यह भविष्य की पीढ़ी को ऐसे आंदोलनों से जुड़ने के लिए प्रेरित भी करता है। अगर पुरस्कार जीतने के बाद भी बच्चों को सालों तक दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ें, तो स्काउटिंग जैसे गौरवशाली आंदोलन में युवाओं की रुचि घटना स्वाभाविक है।

मांग — त्वरित जांच और मुआवजा

समाजसेवियों और शिक्षाविदों की मांग है कि राखी जैसे सभी पीड़ित छात्र-छात्राओं के मामलों की उच्च स्तरीय जांच हो, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो और पीड़ितों को न केवल तत्काल प्रमाण पत्र दिए जाएं, बल्कि इस देरी के कारण हुए नुकसान की भरपाई के लिए उचित राहत भी प्रदान की जाए।

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