ग्रेटर नोएडा न्यूज़: पैरामाउंट सोसायटी में एक ही रात दो विला में लूट-चोरी, पुलिस को कहानी में मिले विरोधाभास

ग्रेटर नोएडा न्यूज़: शहर की वीआईपी और सुरक्षित मानी जाने वाली सोसायटियों में शुमार 130 मीटर रोड स्थित पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट सोसायटी इन दिनों एक बड़े विवाद के केंद्र में है। सोसायटी के दो अलग-अलग विला में एक ही रात हुई लूट और चोरी की घटनाओं ने जहां शुरुआत में पूरे इलाके में दहशत फैला दी थी, वहीं अब पुलिस जांच में मामला संदिग्ध होता नजर आ रहा है। दोनों पीड़ित परिवारों के बयानों में सामने आए विरोधाभास और घटनास्थल की भौगोलिक बनावट ने जांच अधिकारियों को चौंका दिया है।

क्या था मामला

पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक रविवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे विला नंबर सी-126 में रहने वाली अपर्णा राय के घर एक नकाबपोश व्यक्ति चाकू लेकर घुस आया। घटना के वक्त उनके पति नितिन राय, जो पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, ऑफिस के काम से बेंगलुरु गए हुए थे। घर में अपर्णा राय अपने दो बच्चों के साथ ऊपरी मंजिल पर थीं, जबकि उनके बुजुर्ग सास-ससुर नीचे की मंजिल पर मौजूद थे। पीड़िता के अनुसार, बदमाश ने पहले उनके साथ मारपीट की, फिर बच्चों को चाकू दिखाकर धमकाया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद उसने अलमारी में रखे सोने-चांदी के आभूषण, नगदी और अन्य कीमती सामान समेट लिया। महिला का आरोप है कि आरोपी ने उनके गले से चेन और हाथों की अंगूठियां भी जबरन उतरवा लीं। शुरुआती अनुमान के अनुसार लूटे गए सामान की कुल कीमत करीब 15 लाख रुपये आंकी गई। इसी रात करीब पौने तीन बजे सोसायटी के ही एक अन्य विला, ए-222 में भी चोरी की वारदात सामने आई, जहां से करीब डेढ़ लाख रुपये मूल्य की विदेशी मुद्रा (वियतनाम की करेंसी) और नकदी चोरी होने का दावा किया गया। पुलिस का शुरुआती अनुमान है कि दोनों घटनाओं के पीछे एक ही व्यक्ति का हाथ हो सकता है, हालांकि इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस को क्यों हो रहा शक

घटना सामने आते ही स्थानीय पुलिस, फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड मौके पर पहुंचे और सीसीटीवी फुटेज खंगालने के साथ फिंगरप्रिंट व अन्य साक्ष्य जुटाए गए। लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ ही पुलिस को दोनों पीड़ित परिवारों के बयानों में कई विसंगतियां नजर आईं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिस रास्ते से बदमाश के घर में दाखिल होने की बात बताई गई है, तकनीकी तौर पर वहां से अंदर पहुंचना आसान नहीं है, जिससे घटनाक्रम पर सवाल खड़े हो गए हैं। डीसीपी सेंट्रल के मुताबिक दोनों मामलों में पीड़ितों के बयान, घटनाक्रम और मौके से मिले तथ्यों में अंतर पाया गया है, इसलिए पुलिस किसी एक नतीजे पर पहुंचने की जल्दबाजी नहीं कर रही और हर संभावित पहलू की जांच कर रही है। सूरजपुर थाना पुलिस ने भी माना है कि प्राथमिक जांच में इसे लूट के बजाय चोरी की घटना मानकर भी देखा जा रहा है, क्योंकि कुछ बिंदु संदिग्ध प्रतीत हो रहे हैं। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि क्या यह वारदात वाकई बाहरी बदमाशों ने अंजाम दी, या मामले के तार किसी और वजह से जुड़े हैं। फिलहाल तकनीकी जांच, सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की जा रही है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

घटना के बाद सोसायटी के निवासियों में सुरक्षा को लेकर गहरा आक्रोश है। रहवासियों का कहना है कि हर महीने मोटी मेंटेनेंस राशि वसूलने के बावजूद कोई बदमाश आसानी से गेट, सीसीटीवी निगरानी और एंट्री सिस्टम को चकमा देकर विला के अंदर तक पहुंच गया। सोसायटी की एक निवासी और एडवोकेट ने बिल्डर, मेंटेनेंस एजेंसी और प्रॉपर्टी मैनेजमेंट कंपनी जेएलएल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। बताया जा रहा है कि घटना से महज कुछ दिन पहले ही सोसायटी में एक नई कमांडो सिक्योरिटी एजेंसी नियुक्त की गई थी, जिसके बावजूद यह वारदात हुई। सोसायटी प्रबंधन से जुड़े एक सदस्य ने इसे सुरक्षा एजेंसी के साथ-साथ मेंटेनेंस और प्रबंधन की भी गंभीर विफलता बताया है।

आगे की कार्रवाई

पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर ली है और जांच जारी है। अधिकारियों का दावा है कि सीसीटीवी फुटेज, फिंगरप्रिंट और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। हालांकि पुलिस का स्पष्ट कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह तय हो पाएगा कि सोसायटी में हुई यह घटना वास्तव में लूट थी, चोरी थी, या फिर कोई और कहानी इसके पीछे छिपी है। तब तक के लिए ग्रेटर नोएडा की इस पॉश सोसायटी में सुरक्षा को लेकर बहस और निवासियों की चिंता बरकरार है।

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