Baruipur rape-murder case: सुवेंदु सरकार की पहली बड़ी परीक्षा, ममता ‘नजरबंद’ का आरोप, लिंचिंग ने बढ़ाई तनाव

Baruipur rape-murder case: पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में 12 वर्षीय नाबालिग लड़की के कथित बलात्कार और हत्या का मामला राज्य की नई सुवेंदु अधिकारी-नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के लिए पहली बड़ी कानून-व्यवस्था की चुनौती बन गया है। घटना की बर्बरता, भीड़ द्वारा एक संदिग्ध की लिंचिंग, पुलिस पर लापरवाही के आरोप और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी का ‘नजरबंद’ होने का दावा, इन सबने राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है।

घटना का क्रम

4 जुलाई को दोपहर करीब 4:30 बजे बारुईपुर के सूर्यापुर गांव की 12 वर्षीय लड़की (कुछ रिपोर्ट्स में 11 वर्ष) अपने दोस्त के जन्मदिन के उपहार खरीदने घर से निकली। शाम तक लापता होने पर परिवार ने पुलिस में सूचना दी, लेकिन परिवार का आरोप है कि पुलिस ने तुरंत कार्रवाई नहीं की। परिवार और स्थानीय लोगों ने खुद सीसीटीवी फुटेज देखी, जिसमें एक नीले कैप वाले युवक के साथ लड़की दिखाई दी। 5 जुलाई की सुबह स्थानीय लोगों ने संदिग्ध युवक के घर पहुंचकर पूछताछ की। उसके खुलासे पर लड़की का शव पास के तालाब से बोरिया में बंद हालत में बरामद हुआ। प्रारंभिक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पूरे मामले को और भयावह बना दिया लड़की के साथ बलात्कार हुआ, सिर पर भारी वस्तु से हमला किया गया, शरीर पर खरोंच और काटने के निशान थे, और उसे पानी में जीवित फेंका गया (फेफड़ों और पेट में पानी मिला)। घटना की खबर फैलते ही बारुईपुर में भारी आक्रोश फैल गया। लोगों ने सड़कें जाम कर दीं, रेलवे ट्रैक पर धरना दिया, पुलिस वाहनों को क्षतिग्रस्त किया। इसी दौरान भीड़ ने इंद्रजीत टांती (26) नामक व्यक्ति को संदिग्ध मानकर पीट-पीटकर मार डाला। पुलिस ने मामले में गैंग रेप का आरोप जोड़ दिया है। मुख्य आरोपी आनंद सरदार समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक फरार है। एसआईटी जांच कर रही है।

सुवेंदु सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पीड़ित परिवार के पिता से फोन पर बात की और पूर्ण न्याय तथा दोषियों को फांसी की सजा का आश्वासन दिया। उन्होंने परिवार को बीएचएवीनी भवन (सीआईडी मुख्यालय) बुलाया। भाजपा ने घटना को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश का आरोप विपक्ष पर लगाया है और शांति बनाए रखने की अपील की। स्थानीय भाजपा नेता शांतनु मंडल पर आरोप लगा कि उन्होंने एक आरोपी को बचाने की कोशिश की, जिसके बाद उनके घर पर हमला हुआ।

ममता बनर्जी का हमला और ‘नजरबंद’ विवाद

तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने इस घटना को भाजपा सरकार के खिलाफ राजनीतिक हमले का मौका बनाया। उन्होंने कलकत्ता के कालीघाट स्थित अपने आवास से कैंडल मार्च निकाला और न्याय की मांग की। ममता का आरोप है कि बारुईपुर पीड़ित परिवार से मिलने जाने से रोकने के लिए उनके घर के बाहर भारी पुलिस और केंद्रीय बलों की तैनाती की गई, सड़कें अवरुद्ध कर दी गईं, जिसे उन्होंने ‘नजरबंदी’ बताया। भाजपा ने इसे सुरक्षा व्यवस्था बताया और तृणमूल पर विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया। ममता गुट ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और सुवेंदु पर बारुईपुर न जाने का तंज कसा। वहीं, विद्रोही तृणमूल गुट ने सरकार पर भरोसा जताया।

राजनीतिक मायने

यह कांड भाजपा सरकार के लिए दोहरी चुनौती है — एक तरफ निष्पक्ष और तेज जांच सुनिश्चित करना, दूसरी तरफ ममता बनर्जी जैसे ‘स्ट्रीट फाइटर’ का मुकाबला। ममता की तृणमूल पहले से कमजोर है, लेकिन सड़कों पर उतरकर वे राजनीतिक narrative अपने पक्ष में मोड़ सकती हैं। भाजपा को कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर अपनी छवि बनाए रखनी होगी, वरना विपक्ष इसे पुरानी तृणमूल शासन की याद दिलाकर हमला बोल सकता है। पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहा है। पूरे मामले पर नजर टिकी हुई है कि सुवेंदु सरकार इस पहली बड़ी परीक्षा में कैसे पास होती है। पुलिस ने क्षेत्र में भारी तैनाती की है और शांति भंग करने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।

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