ग्रेटर नोएडा: वाहन चोरी के मामलों में केवल डुप्लीकेट चाबी होने का हवाला देकर बीमा कंपनी बीमा दावा (इंश्योरेंस क्लेम) खारिज नहीं कर सकती। यदि कंपनी किसी दावे को अस्वीकार करती है तो उसे अपने आरोपों के समर्थन में ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे। यह महत्वपूर्ण फैसला जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, गौतमबुद्ध नगर ने सुनाया है।
आयोग ने एक मामले में ICICI Lombard General Insurance को नोएडा निवासी वाहन मालिक को 5,60,123 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग ने माना कि बीमा कंपनी अपने आरोपों को प्रमाणित करने में विफल रही।
क्या है पूरा मामला?
नोएडा के सेक्टर-22 निवासी अविनाश शर्मा की कार का बीमा 8 नवंबर 2023 तक वैध था। शिकायत के अनुसार, 8 नवंबर 2022 की रात उनके घर के सामने से कार चोरी हो गई। घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई और बीमा कंपनी के समक्ष भी क्लेम दाखिल किया गया।
अविनाश शर्मा ने बीमा कंपनी की मांग के अनुसार सभी आवश्यक दस्तावेज और कार की दोनों चाबियां जमा कर दीं। इसके बावजूद 25 फरवरी 2023 को बीमा कंपनी ने उनका दावा खारिज कर दिया। कंपनी का कहना था कि तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है और जो अप्रयुक्त (स्पेयर) चाबी उपलब्ध कराई गई है, उसके आधार पर संदेह उत्पन्न होता है। इसी आधार पर क्लेम अस्वीकार कर दिया गया।
उपभोक्ता आयोग पहुंचा मामला
बीमा कंपनी के फैसले से असंतुष्ट होकर अविनाश शर्मा ने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी यह साबित करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी कि वाहन चोरी के मामले में बीमाधारक ने गलत जानकारी दी थी या डुप्लीकेट चाबी के आधार पर कोई धोखाधड़ी की गई थी।
आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल संदेह या डुप्लीकेट चाबी का हवाला देकर बीमा दावा खारिज नहीं किया जा सकता। आरोपों को प्रमाणित करने की जिम्मेदारी बीमा कंपनी की होती है।
बीमा कंपनी को भुगतान का आदेश
जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले में फैसला सुनाते हुए ICICI Lombard General Insurance को निर्देश दिया कि वह वाहन मालिक अविनाश शर्मा को 5,60,123 रुपये का भुगतान करे। आयोग का यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उपभोक्ताओं के लिए क्यों अहम है फैसला?
यह निर्णय उन लाखों वाहन मालिकों के लिए महत्वपूर्ण है, जो वाहन चोरी या अन्य बीमा दावों के दौरान क्लेम अस्वीकार होने की समस्या का सामना करते हैं। आयोग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि बीमा कंपनियां केवल आशंका या तकनीकी आधार पर दावे खारिज नहीं कर सकतीं, बल्कि उन्हें अपने आरोपों के समर्थन में पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे।

