नोएडा/ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश के औद्योगिक केंद्र गौतमबुद्ध नगर में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वालों के खिलाफ पुलिस प्रशासन ने अब तक की सबसे सख्त घेराबंदी शुरू कर दी है। हाल ही में एक मजदूर आंदोलन के दौरान हुई हिंसा को गंभीरता से लेते हुए पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देश पर मुख्य उपद्रवियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका/NSA) के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस की इस “सर्जिकल स्ट्राइक” ने उन संगठनों की कमर तोड़ दी है जो अक्सर निजी स्वार्थों या छोटी-छोटी बातों पर धरना-प्रदर्शन के नाम पर अराजकता फैलाते थे।
कानून हाथ में लिया तो खैर नहीं: लक्ष्मी सिंह का सख्त संदेश
पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के नेतृत्व में नोएडा पुलिस ने यह साफ कर दिया है कि विरोध प्रदर्शन के नाम पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, पुलिस बल पर हमला करना या औद्योगिक शांति को भंग करना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मजदूर आंदोलन की आड़ में हुई हिंसा में शामिल लोगों पर रासुका लगाने का उद्देश्य एक नजीर पेश करना है, ताकि भविष्य में कोई भी भीड़ की आड़ में कानून को ठेंगे पर न रख सके।
ब्लैकमेलिंग और स्वार्थ की राजनीति पर ‘ब्रेक’
गौतमबुद्ध नगर में कई ऐसे छोटे-बड़े संगठन सक्रिय रहे हैं जो मजदूरों या किसानों के हितों का नाम लेकर असल में अपने निजी स्वार्थों की सिद्धि के लिए धरना-प्रदर्शन करते आए हैं। जांच में सामने आया है कि कई बार ये प्रदर्शन केवल दबाव बनाने और ब्लैकमेलिंग के उद्देश्य से किए जाते हैं। पुलिस की वर्तमान सख्ती के बाद ऐसे संगठनों में हड़कंप मच गया है। जो लोग छोटी-छोटी बातों पर सड़क जाम करने या काम रुकवाने की धमकी देते थे, वे अब भूमिगत हो गए हैं।
हड़कंप: धरना देने से पहले अब सौ बार सोचेंगे संगठन
इस बड़ी कार्रवाई का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। रासुका जैसी गंभीर धाराओं के प्रयोग ने उपद्रवी तत्वों के मन में भय पैदा कर दिया है।
- सख्ती का खौफ: अब किसी भी प्रदर्शन की योजना बनाने से पहले संगठन के पदाधिकारी कानूनी परिणामों को लेकर चिंतित हैं।
- प्रशासनिक अनुमति अनिवार्य: अब बिना उचित अनुमति और वैध कारणों के धरना देना इन संगठनों के लिए जोखिम भरा हो गया है।
- पहचान की प्रक्रिया: पुलिस अब प्रदर्शनकारियों की वीडियोग्राफी और ड्रोन सर्विलांस के जरिए पहचान कर रही है, जिससे ‘भीड़’ के पीछे छिपना मुमकिन नहीं रहा।
औद्योगिक निवेश और सुरक्षा का माहौल
नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे वैश्विक औद्योगिक हब में इस तरह की कार्रवाई का स्वागत उद्योग जगत ने भी किया है। पुलिस का मानना है कि उद्योगों के सुचारू रूप से चलने के लिए शांति व्यवस्था अनिवार्य है। रासुका की कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि:
“लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन यदि आंदोलन की आड़ में हिंसा का सहारा लिया गया, तो पुलिस प्रशासन बिना किसी रियायत के कठोरतम कदम उठाएगा।”
पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह की इस कार्रवाई ने उन लोगों के हौसले पस्त कर दिए हैं जो कानून को खिलौना समझते थे। जिले में शांति बनाए रखने और गुंडागर्दी पर लगाम कसने के लिए गौतमबुद्ध नगर पुलिस का यह ‘जीरो टॉलरेंस’ मॉडल अब पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बन रहा है।

