नोएडा में फिर ‘मौत के नाले’ की चपेट में आए बुजुर्ग, सेक्टर 122 पर खुले नाले में गिरे रिटायर्ड वैज्ञानिक, युवराज मेहता की मौत से भी नहीं चेती नोएडा-ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी

नोएडा के सेक्टर 122 स्थित पर्थला गोलचक्कर के पास एक बार फिर खुले नाले ने किसी को अपनी चपेट में ले लिया। इस बार शिकार बने एक रिटायर्ड वैज्ञानिक, जो उस क्षेत्र से गुजर रहे थे। अंधेरे में न कोई चेतावनी बोर्ड, न बैरिकेटिंग और न ही कोई सुरक्षा प्रकाश व्यवस्था, बस एक खुला और उघड़ा नाला, और उसमें जा गिरे एक बुजुर्ग। आसपास के लोगों ने काफी मशक्कत के बाद उन्हें नाले से बाहर निकाला। यह घटना इसलिए और भी चिंताजनक है, क्योंकि इससे पहले 16-17 जनवरी 2026 की रात सेक्टर-150 के पास 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार नाले की दीवार तोड़कर करीब 20 फुट गहरे पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी थी, जिसमें उनकी दर्दनाक मौत हो गई थी। उस हादसे के बाद भी नोएडा प्राधिकरण ने कोई सबक नहीं लिया।

घटना का ब्यौरा

जानकारी के मुताबिक रिटायर्ड वैज्ञानिक सेक्टर 122 के पर्थला गोलचक्कर के नजदीक से गुजर रहे थे। उस समय क्षेत्र में पर्याप्त रोशनी नहीं थी। सड़क किनारे खुला नाला पूरी तरह बिना किसी बाधा के — बिना जाली, बिना बैरिकेट, बिना किसी चेतावनी बोर्ड के — मुंह बाए खड़ा था। अंधेरे में नाले का अंदाजा न लगा पाने के कारण वे उसमें जा गिरे। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग दौड़ पड़े और काफी मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकाला गया।

युवराज की मौत से भी नहीं चेता प्राधिकरण

युवराज मेहता की मौत के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने ब्लैक स्पॉट चिन्हित करने और जगह-जगह रिफ्लेक्टर लगाने की बात कही थी, लेकिन हालात जस के तस बने रहे। उस हादसे के बाद सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए नोएडा अथॉरिटी के तत्कालीन CEO को भी हटाया था और बिल्डर पर FIR दर्ज की गई थी।  लेकिन इन सबके बावजूद ज़मीनी हकीकत यह है कि खुले नाले आज भी नोएडा-ग्रेटर नोएडा के विभिन्न सेक्टरों में मौत के जाल की तरह बिछे हुए हैं। सेक्टर-150 की घटना के बाद भी नोएडा प्राधिकरण ने खुले नालों और गड्ढों पर कवरिंग या सुरक्षा उपाय नहीं किए। सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों पर लोग प्रशासन की उदासीनता पर तीखी आलोचना करते रहे हैं।

बार-बार दोहराई जा रही लापरवाही

युवराज मेहता की मौत की यादें अभी ताजा ही थीं कि फिर एक और हादसा हुआ, जब एक कार खुले नाले में जा गिरी। सड़क पर न तो चेतावनी बोर्ड थे, न रिफ्लेक्टर और न ही कोई मजबूत बैरिकेडिंग, यही लापरवाही इन हादसों की बड़ी वजह मानी जाती रही है। युवराज की मौत के कुछ ही हफ्तों बाद सेक्टर-70 फेज-3 में एक कार खुले नाले में जा गिरी थी, जहां न रिफ्लेक्टर थे, न चेतावनी बोर्ड, न बैरिकेडिंग। निवासियों ने खुद मिलकर कार को बाहर निकाला था। अब यही तस्वीर सेक्टर 122 में भी देखने को मिली।

निवासियों में भारी आक्रोश

इस ताजा घटना के बाद स्थानीय निवासियों में भारी रोष है। लोगों का कहना है कि नोएडा प्राधिकरण हर बार हादसे के बाद बयान देता है, कार्रवाई का आश्वासन देता है, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं बदलता। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कितनी मौतें और कितने हादसे होने पर प्राधिकरण जागेगा?, युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने भी अपनी तहरीर में घटनास्थल के पास बैरिकेडिंग और रिफ्लेक्टर नहीं होने पर नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ लापरवाही का आरोप लगाया था। लेकिन उस FIR और जांच का हश्र सबके सामने है।

विशेषज्ञों की राय

नगरीय नियोजन विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी खुले नाले या गड्ढे के पास पर्याप्त बैरिकेटिंग, रिफ्लेक्टर और चेतावनी बोर्ड लगाना प्राधिकरण की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है। रात के समय पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था भी अनिवार्य है। इसकी अनदेखी सीधे तौर पर आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में आती है।

प्राधिकरण की चुप्पी पर सवाल

अभी तक नोएडा प्राधिकरण की ओर से इस ताजा घटना पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह चुप्पी खुद बोलती है। नागरिक संगठनों ने मांग की है कि तत्काल पूरे नोएडा में खुले नालों का सर्वे किया जाए, उन्हें ढका जाए या कम से कम पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए जाएं, वरना अगला हादसा होने में देर नहीं लगेगी।

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