महादेव अपार्टमेंट में चुनाव विवाद गहराया: नोएडा के सेक्टर-73 स्थित महादेव अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (एओए) में चुनाव को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। 18 अप्रैल को प्रस्तावित चुनाव स्थगित होने के बाद अब सोसाइटी के भवन स्वामियों का गुस्सा सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक दफ्तरों तक फूट पड़ा है। मुख्य विवाद मतदाता सूची को लेकर है निवासियों का आरोप है कि सदस्यता शुल्क जमा करने वाले तमाम वैध भवन स्वामियों को मतदाता सूची से बाहर रखा गया है, जो न केवल अलोकतांत्रिक है बल्कि यूपी अपार्टमेंट एक्ट की भावना के भी विरुद्ध है।
चुनाव स्थगन के बाद और भड़का आक्रोश
सोसाइटी निवासियों का कहना है कि 18 अप्रैल का चुनाव बिना कोई पारदर्शी कारण बताए स्थगित कर दिया गया। इसके बाद से निवासी लगातार सोसाइटी के व्हाट्सएप और सोशल मीडिया ग्रुप्स पर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। कई निवासियों ने जिलाधिकारी और डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय को ईमेल व लिखित शिकायतें भी भेजी हैं। निवासियों का साफ कहना है, “यदि हमें मतदान का अधिकार नहीं दिया गया तो हम मेंटेनेंस शुल्क भी नहीं देंगे।” लोगों का मानना है कि अभी भी स्थिति सुधर सकती है, लेकिन यदि शीघ्र निष्पक्ष कदम नहीं उठाए गए तो विवाद और गहरा होगा।
चुनाव अधिकारी पर एकपक्षीय रवैये का आरोप
सोसाइटी के निवासी हिमांशु चौधरी और अरविंद सिंह ने आरोप लगाया कि चुनाव अधिकारी एक विशेष गुट के इशारे पर काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव अधिकारी न तो निवासियों को मतदाता सूची से संबंधित जानकारी दे रहे हैं और न ही उनकी बात सुनने को तैयार हैं। दोनों ने मांग की है कि आगामी चुनाव से पहले तैयार होने वाली मतदाता सूची में सभी वैध भवन स्वामियों के नाम अनिवार्य रूप से शामिल किए जाएं, ताकि चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी और समावेशी बन सके।
यूपी अपार्टमेंट एक्ट का हवाला
उल्लेखनीय है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में आधे से अधिक एओए और आरडब्ल्यूए में चुनाव को लेकर विवाद चल रहे हैं, और जिला प्रशासन ने ऐसी सोसाइटियों की पहचान शुरू कर दी है जहाँ लंबे समय से एकपक्षीय राज कायम है। महादेव अपार्टमेंट का मामला भी इसी श्रेणी में देखा जा रहा है। निवासियों का कहना है कि यूपी अपार्टमेंट एक्ट के तहत जिन भवन स्वामियों ने सदस्यता शुल्क जमा किया है, उन्हें मतदाता सूची में शामिल किया जाना उनका कानूनी अधिकार है। इसे नजरअंदाज कर चुनाव कराना अधिनियम का उल्लंघन होगा।
प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
सोसाइटी के जागरूक निवासी डिप्टी रजिस्ट्रार और जिलाधिकारी से मांग कर रहे हैं कि चुनाव से पहले मतदाता सूची का पुनर्गठन हो और सभी पात्र भवन स्वामियों को उसमें स्थान मिले। निवासियों का यह भी कहना है कि यदि सभी को मताधिकार मिला तो सोसाइटी में आपसी सामंजस्य और भाईचारा बढ़ेगा, अन्यथा यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है। फिलहाल अगले चुनाव की तारीख की घोषणा नहीं हुई है और सोसाइटी में तनाव का माहौल बना हुआ है।
यह भी पढ़ें: कानपुर डबल मर्डर: जुड़वां बहनों की हत्या में पारिवारिक विवाद और ‘चंडीगढ़ कनेक्शन’ सामने

