नोएडा में फिर कूड़े का संकट: नोएडा प्राधिकरण की सफाई व्यवस्था एक बार फिर ठप होने की कगार पर पहुंच गई है। डोर-टू-डोर गार्बेज कलेक्शन एजेंसी की हड़ताल के कारण आज कई सेक्टरों में कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां नहीं पहुंचीं। सड़कों पर कूड़े के ढेर लगने और बदबू फैलने की आशंका से जनता में आक्रोश है। यह समस्या हर एक-दो महीने में दोहराई जा रही है, जिससे शहर की स्वच्छता व्यवस्था लगातार प्रभावित हो रही है। पिछले कुछ वर्षों में नोएडा ने स्वच्छता सर्वेक्षणों में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। वर्ष 2024-25 के सुपर स्वच्छ लीग में नोएडा को 3-10 लाख जनसंख्या श्रेणी में देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया था। लेकिन बार-बार होने वाली हड़तालें इस उपलब्धि को धूमिल कर रही हैं। फरवरी-मार्च 2026 में भी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान कूड़ा सड़कों पर जमा हो गया था, जिसके बाद प्राधिकरण ने कुछ एजेंसियों पर जुर्माना लगाया और कर्मचारियों को हटाया था। नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) कृष्ण करुणेश ने पहले भी खराब सफाई पर सख्त कार्रवाई की है, जिसमें स्टाफ हटाना और पेनल्टी लगाना शामिल है। हालांकि, एजेंसियों के साथ अनुबंध संबंधी मुद्दे, वेतन, बीमा और कार्यभार जैसे मसले बार-बार हड़ताल का कारण बन रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि “हर महीने यही समस्या हो रही है। हम टैक्स देते हैं, लेकिन बुनियादी सेवा नहीं मिल रही।”

वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
नोएडा प्राधिकरण और जिला प्रशासन को इस बार-बार की समस्या से निपटने के लिए अग्रिम योजना बनाने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों और नागरिक संगठनों का सुझाव है कि एक वैकल्पिक B-Team व्यवस्था तैयार रखी जाए। यदि मुख्य एजेंसी हड़ताल पर चली जाए तो बैकअप टीम तुरंत काम संभाल ले। इससे शहर की स्वच्छता बाधित नहीं होगी और स्वास्थ्य जोखिम कम होगा। प्राधिकरण के सूत्रों के अनुसार, हड़ताल के समाधान के लिए वार्ता चल रही है। CEO से अपील की जा रही है कि वे तत्काल हस्तक्षेप करें और एजेंसी के साथ स्थायी समाधान निकालें।
राजनीतिक सवाल भी उठे
यह मुद्दा अब राजनीतिक रंग भी ले रहा है। आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के मद्देनजर सवाल उठ रहे हैं कि नोएडा, जो यूपी का ‘शो विंडो’ माना जाता है और स्वच्छता में नंबर वन रहा है, में सफाई और सुरक्षा जैसी बुनियादी समस्याएं क्यों बनी हुई हैं। नोएडा विधायक पंकज सिंह (भाजपा), जो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र हैं, पर भी स्थानीय मुद्दों पर ध्यान न देने के आरोप लग रहे हैं। कुछ स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता और नागरिक पूछ रहे हैं कि पिछले वर्षों में क्या काम हुए, जिनके आधार पर फिर टिकट मांगा जाए। सड़कों की स्थिति, सुरक्षा और सफाई व्यवस्था पर सवाल विधायकों की जवाबदेही पर भी उंगली उठा रहे हैं। नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि हड़ताल जल्द समाप्त होगी और वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कूड़ा संग्रहण शुरू कर दिया जाएगा। लेकिन निवासियों की मांग है कि समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए, न कि अस्थायी राहत दी जाए।
नागरिकों की अपील: शहरवासी प्राधिकरण से अपील कर रहे हैं कि स्वच्छ नोएडा के दावे को हकीकत बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि स्मार्ट सिटी का सपना गंदगी के ढेर में न दब जाए।

