आखिर कब उड़ेगा जेवर?: एक विदेशी CEO के चक्कर में अटकी करोड़ों सपनों की उड़ान, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की दास्तान

आखिर कब उड़ेगा जेवर?: पीएम नरेंद्र मोदी ने 28 मार्च 2026 को बड़े धूमधाम से एशिया के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) का उद्घाटन किया। लाखों लोगों की आँखें चमक उठीं, सपने परवाज़ भरने को तैयार थे। लेकिन उद्घाटन के करीब एक महीने बाद भी, फ्लाइट ऑपरेशन शुरू नहीं हो सका है। और इसकी जड़ में है एक स्विस नागरिक कंपनी के CEO क्रिस्टोफ श्नेलमैन।

क्या है पूरा विवाद?

यापल (Yamuna International Airport Private Limited) के सीईओ क्रिस्टोफ श्नेलमैन एक स्विस नागरिक हैं। यापल, ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की भारतीय एसपीवी है और यह शत-प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) वाली परियोजना है। बीसीएएस के नियमों के अनुसार किसी भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का सीईओ ही वहां का सिक्योरिटी कोऑर्डिनेटर भी होता है। जबकि गृह मंत्रालय के नियमों के मुताबिक सिक्योरिटी कोऑर्डिनेटर का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है। यही टकराव पूरे मामले की जड़ है। इस मुद्दे के कारण BCAS ने एयरपोर्ट सुरक्षा योजना (Airport Security Plan) को मंजूरी देने से हाथ खींच लिया, जिससे उड़ानों का संचालन अटका पड़ा है।

राज्य बनाम केंद्र — बीच में पिसती जनता

उत्तर प्रदेश सरकार इस एयरपोर्ट को अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना मानती है। वहीं केंद्रीय एजेंसियां गृह मंत्रालय और BCAS  राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करना चाहतीं। अधिकारियों ने बीसीएएस के सामने कंपनी के ढांचे को साझा किया और बताया कि कंपनी में नायल के सीईओ के अलावा प्रदेश सरकार के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी नियुक्त हैं। अगर इस तथ्य पर बीसीएएस और गृह मंत्रालय सहमत नहीं हुए तो यापल कंपनी के सीईओ पद पर जरूरी बदलाव करने का दबाव होगा। यह मसला और उलझा हुआ इसलिए है क्योंकि श्नेलमैन पिछले छह साल से इस परियोजना का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्हें हटाना न तो आसान है, न ही व्यावहारिक।

बार-बार टली तारीखें, टूटते रहे सपने

एयरपोर्ट पहले अप्रैल 2025, फिर नवंबर और दिसंबर 2025 तक शुरू होने वाला था। हर बार नई तारीख आई, हर बार निराशा हाथ लगी।BCAS ने यह मुद्दा नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में भी उठाया था, और बताया गया कि CEO व COO दोनों को ही गृह मंत्रालय की अनिवार्य सुरक्षा मंजूरी अभी तक नहीं मिली है। 6 मार्च को DGCA ने 18 शर्तों के आधार पर एयरोड्रम लाइसेंस दिया और उड़ानें शुरू करने के लिए 45 दिन का समय दिया था। इसके अनुसार 20 अप्रैल के बाद उड़ानें शुरू करने की तैयारी जारी बताई जा रही है।

अभी कहां खड़ा है मामला?

यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड का बोर्ड 20 अप्रैल को एयरपोर्ट का महत्वपूर्ण निरीक्षण करने वाला था, जिसे ऑपरेशन शुरू करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। शुरुआती चरण में घरेलू उड़ानें शुरू होंगी — मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता, पुणे, लखनऊ, अहमदाबाद, चेन्नई, गोवा और जयपुर के लिए। एयरलाइंस में इंडिगो, अकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस शामिल हैं।

₹11,200 करोड़ की परियोजना, आम जनता का इंतजार

पहले चरण में इस परियोजना पर 11,200 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं और चारों चरणों की कुल लागत 29,560 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। दिल्ली के IGI एयरपोर्ट की भीड़भाड़ से परेशान NCR के यात्री, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान जिन्होंने अपनी जमीन दी, और वो लाखों लोग जिनके रोजगार इस परियोजना से जुड़े हैं सब बस एक सवाल पूछ रहे हैं: “आखिर कब उड़ेगा जेवर?” एक विदेशी CEO की नागरिकता से जुड़ा नियामकीय विवाद, अरबों रुपए की परियोजना और करोड़ों सपनों को रोककर खड़ा है। सरकारें बीच का रास्ता खोजने में जुटी हैं, लेकिन जब तक नहीं निकलता आम जनता की उड़ान जमीन पर ही रहेगी।​​​​​​​​​​​​​​​​

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