Dowry deaths in Delhi-NCR:: देश की राजधानी दिल्ली और उससे सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एक बार फिर दहेज की आग ने कई बेटियों की जिंदगी निगल ली है। ताजा मामले में एक विवाहिता ने अपने भाई को फोन कर रोते हुए कहा “मुझे बहुत प्रताड़ित किया जा रहा है” और कुछ ही मिनटों बाद उसकी मौत हो गई। यह दर्दनाक घटना उस वक्त और भी चर्चा में आई जब ग्रेटर नोएडा में दीपिका नागर और भोपाल में ट्विशा शर्मा की कथित दहेज हत्याओं ने पूरे देश को झकझोर दिया।
दिल्ली केस: भाई को फोन, फिर खामोशी
महिला के छोटे भाई ने बताया कि उनकी बहन की शादी दिसंबर 2022 में हुई थी। शादी के कुछ महीने बाद से ही उसे दहेज के लिए लगातार परेशान किया जाने लगा। भाई ने कहा कि वे खुद करीब 15 दिनों तक बहन के पास रहे और उस दौरान उसके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार होते देखा। 18 मई को उनकी बहन ने रोते हुए फोन किया और कहा कि उसे बुरी तरह पीटा जा रहा है और जान से मार दिया जाएगा। अचानक कॉल कट गई। कुछ देर बाद देवर ने सूचना दी कि उसने छत से छलांग लगा दी है। अस्पताल पहुंचने पर पता चला कि उसे पहले ही मृत घोषित कर दिया गया था। पुलिस ने बताया कि चूंकि विवाह को सात साल नहीं हुए थे, इसलिए दहेज हत्या से संबंधित प्रावधानों के तहत कानूनी कार्यवाही शुरू की गई। एसडीएम द्वारा परिवार के बयान दर्ज किए गए और एफएसएल टीम ने घटनास्थल का वैज्ञानिक परीक्षण किया।
ग्रेटर नोएडा: दीपिका की रात 11 बजे की आखिरी पुकार
इसी सप्ताह ग्रेटर नोएडा के जलपुरा गांव से एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। पिता संजय का कहना है कि उन्होंने दिसंबर 2024 में अपनी बेटी दीपिका की शादी हृतिक नाम के युवक से की थी और इस विवाह पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए थे। दीपिका की बहन सारिका नागर ने बताया कि रात 11 बजे बहन का फोन आया था जिसमें उसने कहा कि वह बहुत परेशान है। उसने कहा — “अगर हमें बताया होता तो हम उसे वापस ले आते।” पिता संजय ने बताया कि वे उसी दिन शाम को ससुराल गए थे और बातचीत कर के लौटे थे। लेकिन आधे घंटे बाद ही ससुर माणोज का फोन आया कि दीपिका छत से गिर गई है। अस्पताल पहुंचने पर बेटी की लाश मिली। परिवार का आरोप है कि ससुराल वाले एक टोयोटा फॉर्च्यूनर एसयूवी और 50 लाख रुपये नकद की मांग कर रहे थे। पुलिस ने पति हृतिक और ससुर माणोज को गिरफ्तार कर लिया है। जांच जारी है।
ग्वालियर: पलक राजक — एक साल में जिंदगी खत्म
ग्वालियर में 21 वर्षीया पलक राजक की मौत ने भी देशव्यापी सनसनी फैला दी। शादी के एक साल के भीतर ही उसकी मृत्यु हो गई। परिवार का आरोप है कि ससुराल वाले एक कार और सोने की चेन की मांग कर रहे थे, जबकि शादी में पहले ही महंगे उपहार दिए जा चुके थे। पलक के भाई प्रिंस ने बताया कि उसका फोन बेहद परेशान करने वाला था — वह बुरी तरह रो रही थी और उन्हें तुरंत आकर ले जाने की विनती कर रही थी। परिवार के पहुंचने से पहले ही पलक की मौत हो चुकी थी।
आंकड़े: हर दिन 16 मौतें, दिल्ली लगातार शीर्ष पर
यह घटनाएं कोई अपवाद नहीं हैं, बल्कि एक भयावह राष्ट्रीय हकीकत का हिस्सा हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट के अनुसार, महानगरों में लगातार पांचवें साल दिल्ली में सबसे अधिक दहेज मौत के मामले दर्ज हुए। वर्ष 2024 में अकेले दिल्ली में दहेज मौत के 109 मामले दर्ज हुए, जिनमें 111 महिलाओं की जान गई। देशभर में वर्ष 2024 में 5,737 महिलाओं की दहेज हत्या दर्ज हुई। इसका अर्थ है कि औसतन हर दिन करीब 16 महिलाएं दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा या शादी के बाद संदिग्ध परिस्थितियों में जान गंवा रही हैं। NCRB के आंकड़ों के मुताबिक दहेज निषेध अधिनियम के तहत सबसे ज्यादा मामले बेंगलुरु में सामने आए, जो महानगरों में दर्ज कुल दहेज शिकायतों का लगभग 87 प्रतिशत है।
कानून है, पर अमल कहां?
विशेषज्ञ और महिला अधिकार संगठन लंबे समय से यह सवाल उठाते आए हैं कि आईपीसी की धारा 304-बी (दहेज हत्या) और भारतीय न्याय संहिता के कड़े प्रावधानों के बावजूद ये अपराध थमने का नाम नहीं ले रहे। विशेषज्ञ मानते हैं कि मामलों में समझौते, कमजोर जांच, सामाजिक दबाव और पुलिस की शुरुआती लापरवाही इन अपराधों को बढ़ावा देती है। जहां महिलाओं की सामाजिक भागीदारी अधिक है और विवाह को आर्थिक सौदे की तरह नहीं देखा जाता, वहां दहेज अपराध अपेक्षाकृत कम हैं — जैसे गोवा में सिर्फ 2 और कई पूर्वोत्तर राज्यों में शून्य मामले दर्ज हुए। यह खबरें एक बार फिर समाज के उस घाव को उजागर करती हैं जो कानून, शिक्षा और जागरूकता के बावजूद भरने का नाम नहीं ले रहा। जब तक दहेज को सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता रहेगा, तब तक भाई के फोन पर बहनों की आखिरी पुकारें आती रहेंगी।

