भारतीय राजनीति के गंभीर और तनावपूर्ण माहौल के बीच सोशल मीडिया पर एक अनोखा और अभूतपूर्व डिजिटल आंदोलन शुरू हुआ है, जिसने इंटरनेट की दुनिया में तहलका मचा दिया है। इस आंदोलन का नाम है कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janta Party – CJP) महज तीन-चार दिनों के भीतर इस डिजिटल ग्रुप से लाखों की संख्या में युवा जुड़ चुके हैं और इसके इंस्टाग्राम पेज पर फॉलोअर्स की संख्या तेजी से मिलियंस (लाखों-करोड़ों) में पहुंच रही है। आज की तारीख में करीब 80 लाख फॉलोअर्स हो चुके है।
हालांकि, यह कोई आधिकारिक तौर पर चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि एक सैटायरिकल (व्यंग्यात्मक) और डिजिटल मूवमेंट है। आइए अलग-अलग मीडिया स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर जानते हैं कि इस पार्टी की स्थापना क्यों हुई, इसके पीछे कौन है और इसका विजन क्या है।
1. स्थापना की वजह: कोर्ट रूम की एक ‘टिप्पणी’ से उपजा गुस्सा
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स (जैसे आजतक, टाइम्स ऑफ इंडिया) के मुताबिक, इस पार्टी की स्थापना हाल ही में कोर्ट में हुई एक बहस के बाद हुई। दरअसल, रिपोर्टों के अनुसार चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने कथित तौर पर एक मामले की सुनवाई के दौरान बेरोजगार युवाओं को लेकर कुछ तल्ख टिप्पणी की थी, जिसके बाद इंटरनेट पर युवाओं का गुस्सा भड़क उठा।
यद्यपि बाद में स्पष्टीकरण में कहा गया कि उनकी टिप्पणी को गलत संदर्भ में लिया गया और उनका मकसद युवाओं को आहत करना नहीं था, बल्कि वे फर्जी डिग्री धारकों के संदर्भ में बात कर रहे थे, लेकिन तब तक इंटरनेट की ‘Gen Z’ (नयी पीढ़ी) ने इसे एक आंदोलन का रूप दे दिया। इसी के विरोध और व्यंग्य के रूप में 16 मई 2026 को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का गठन कर दिया गया।
2. कौन है इस पार्टी के पीछे?
इस डिजिटल आंदोलन को शुरू करने का श्रेय आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व सोशल मीडिया रणनीतिकार अभिजीत दीपके को जाता है। उन्होंने इसे एक मजाकिया और व्यंग्यात्मक लहजे में शुरू किया था, लेकिन देखते ही देखते यह देश के बेरोजगार और सिस्टम से नाराज युवाओं की आवाज बन गया।
यहाँ तक कि राजनीति के बड़े चेहरे जैसे टीएमसी (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा और पूर्व क्रिकेटर व नेता कीर्ति आजाद ने भी सोशल मीडिया (X) पर इसके साथ जुड़ने की इच्छा जताई और मजेदार बातचीत की।
3. CJP की सदस्यता के लिए ‘अजीबोगरीब’ योग्यता
पार्टी की आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया हैंडल्स पर सदस्यता लेने के लिए बेहद ही मजाकिया और सैटायरिकल शर्तें रखी गई हैं:
- बेरोजगार होना: युवा स्वेच्छा से, मजबूरी से या सिद्धांतों के कारण बेरोजगार होना चाहिए।
- अत्यधिक आलसी होना: यह केवल शारीरिक गतिविधियों पर लागू होता है।
- क्रॉनिकली ऑनलाइन (24 घंटे एक्टिव): कम से कम 11 घंटे इंटरनेट पर बिताना (बाथरूम ब्रेक मिलाकर)।
- प्रोफेशनल तरीके से भड़ास निकालना: सिस्टम के खिलाफ तार्किक और तीखे तरीके से अपनी बात (Rant) रखने की क्षमता।
कॉकरोच जनता पार्टी का ‘विजन’ और 5-सूत्रीय मेनिफेस्टो (घोषणापत्र)
भले ही यह आंदोलन व्यंग्य से शुरू हुआ हो, लेकिन इसका मेनिफेस्टो बेहद गंभीर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों की ओर इशारा करता है। पार्टी ने खुद को “युवाओं का, युवाओं के लिए और युवाओं द्वारा बनाया गया एक सेक्युलर, सोशलिस्ट, डेमोक्रेटिक और लेजी (आलसी) मंच” बताया है। इसका मुख्य विजन निम्नलिखित बिंदुओं पर आधारित है:
- CJI के पोस्ट-रिटायरमेंट पदों पर रोक: विजन के मुताबिक, किसी भी मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) को रिटायरमेंट के ठीक बाद इनाम के तौर पर राज्यसभा की सीट या कोई अन्य सरकारी पद नहीं दिया जाएगा।
- वोट डिलीट होने पर CEC की गिरफ्तारी: यदि किसी नागरिक का वैध वोट वोटर लिस्ट से जानबूझकर डिलीट किया जाता है, तो मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को आतंकवाद विरोधी कानून (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया जाएगा, क्योंकि वोटिंग का अधिकार छीनना देशद्रोह से कम नहीं है।
- महिलाओं को 50% आरक्षण: संसद और कैबिनेट में महिलाओं को 33% नहीं बल्कि पूरे 50% का आरक्षण दिया जाएगा, और इसके लिए संसद की कुल सीटों की संख्या भी नहीं बढ़ाई जाएगी।
- दलबदलू नेताओं पर 20 साल का बैन: यदि कोई विधायक या सांसद चुनाव जीतने के बाद अपनी पार्टी बदलता है (दलबदल करता है), तो उस पर 20 साल तक किसी भी सार्वजनिक पद को संभालने पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा।
- कॉरपोरेट मीडिया पर लगाम: बड़े कॉरपोरेट घरानों के न्यूज चैनलों को प्राइम टाइम के दौरान केवल 10% समय ही राजनीतिक बहसों को देने की अनुमति होगी, बाकी समय उन्हें कृषि, बेरोजगारी और जनहित के मुद्दों पर शो दिखाने होंगे।
छात्रों और युवाओं के मुद्दों पर विशेष ध्यान
पार्टी ने सोशल मीडिया पर “हाँ मैं हूँ कॉकरोच” नाम से एक प्रोटेस्ट सॉन्ग भी जारी किया है, जो देश में NEET और CBSE जैसी परीक्षाओं में होने वाली कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक और छात्रों के मानसिक दबाव को दर्शाता है। CJP ने मांग की है कि CBSE द्वारा री-चेकिंग के नाम पर ली जाने वाली भारी-भरकम फीस को तुरंत खत्म किया जाए, क्योंकि बोर्ड की गलती का खामियाजा छात्र क्यों भुगतें? इसके अलावा पार्टी आरटीआई (RTI) के दायरे में रहने और कोई भी गुप्त डोनेशन (जैसे इलेक्टोरल बॉन्ड या गुप्त फंड) न लेने की बात करती है।
निष्कर्ष (Political Analysis): राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ भले ही कागजों पर कोई रजिस्टर्ड पार्टी न हो और शायद भविष्य में चुनाव न लड़े (हालांकि बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में उम्मीदवार उतारने जैसी चर्चाएं भी सोशल मीडिया पर हैं), लेकिन इसने देश के युवाओं, विशेषकर ‘Gen Z’ के भीतर बेरोजगारी, पेपर लीक और सिस्टम के प्रति छिपे गुस्से और फ्रस्ट्रेशन को एक नया जरिया दे दिया है। मीम्स और शॉर्ट रील्स के जरिए शुरू हुआ यह डिजिटल विद्रोह भारतीय राजनीति में चर्चा का एक नया विषय बन चुका है।

