नोएडा। अगर आपने नोएडा प्राधिकरण (Noida Authority) के किसी भूखंड पर मकान बनाया है और कम्पलीशन सर्टिफिकेट लेने की सोच रहे हैं, तो पहले अपने जूते मजबूत कर लीजिए — क्योंकि नियोजन विभाग के दफ्तर के बाहर आपके कई चक्कर लगने तय हैं। नोएडा प्राधिकरण का नियोजन विभाग इन दिनों भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से घिरा हुआ है। आम जनता से लेकर किसानों तक, हर वर्ग इस विभाग की मनमानी से त्रस्त नजर आ रहा है।
खास लोगों के काम पहले, आम जनता की फाइलें धूल खाती रहती हैं
विभाग के अंदरूनी सूत्रों और पीड़ित नागरिकों की मानें तो नियोजन विभाग में आजकल “खास” लोगों के काम प्राथमिकता पर होते हैं। जिनकी पहुंच ऊपर तक है, उनकी फाइलें तेजी से आगे बढ़ती हैं, जबकि आम भूखंड मालिक महीनों तक दफ्तर के चक्कर काटते रहते हैं। कम्पलीशन सर्टिफिकेट के लिए आवेदन देने के बाद भी लोगों को बार-बार बुलाया जाता है और हर बार कोई न कोई नई आपत्ति लगा दी जाती है।
किसानों के भूखंडों की लोकेशन में मनमानी — रेट तय, वसूली तय
सबसे बड़ा और गंभीर आरोप यह है कि किसानों के भूखंडों की लोकेशन विभाग अपनी मनमर्जी से तय कर रहा है। नोएडा में किसानों को उनकी अधिग्रहित जमीन के बदले आबादी भूखंड दिए जाते हैं। इन भूखंडों की लोकेशन — यानी पार्क फेसिंग, कॉर्नर प्लॉट या बड़ी सड़क पर — उनके बाजार मूल्य को कई गुना बढ़ा या घटा देती है।
सूत्रों के अनुसार, इस लोकेशन तय करने की प्रक्रिया में एक अघोषित “रेट कार्ड” चलता है:
- पार्क फेसिंग भूखंड के लिए अलग दर
- कॉर्नर प्लॉट के लिए अलग दर
- बड़ी सड़क पर भूखंड लगवाने के लिए अलग दर
इस पूरी प्रक्रिया में बिना “सुविधा शुल्क” के किसान को मनचाही लोकेशन नहीं मिलती। यही कारण है कि किसान आए दिन नोएडा प्राधिकरण के बाहर धरना-प्रदर्शन करते नजर आते हैं।
महाप्रबंधक को नोटिस, CEO की नाराजगी का खतरा
मामला अब इतना बढ़ गया है कि नियोजन विभाग के महाप्रबंधक को नोटिस जारी किया गया है। सूत्र बताते हैं कि किसानों की नाराजगी के बाद अब नोएडा प्राधिकरण (Noida Authority) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) भी इस विभाग की कार्यशैली से नाखुश हैं। अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो विभाग के कई अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक सकती है।
किसान सड़कों पर, आम आदमी दफ्तरों में भटक रहा
नियोजन विभाग की मनमानी का खामियाजा दो तरफ से भुगता जा रहा है। एक तरफ वे किसान हैं जिनकी जमीनें प्राधिकरण ने अधिग्रहित कीं और अब उन्हें उनके हक का भूखंड सही लोकेशन पर नहीं मिल रहा। दूसरी तरफ वे सामान्य नागरिक हैं जो अपने बनाए मकान का कम्पलीशन सर्टिफिकेट लेने के लिए महीनों से दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं।
क्या होनी चाहिए कार्रवाई?
जानकारों का मानना है कि नियोजन विभाग में पारदर्शिता लाने के लिए:
- भूखंड लोकेशन आवंटन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑडिटेबल होनी चाहिए
- कम्पलीशन सर्टिफिकेट के लिए निश्चित समयसीमा तय की जाए
- शिकायतों के लिए एक स्वतंत्र जांच तंत्र स्थापित किया जाए
- दोषी अधिकारियों पर सख्त विभागीय कार्रवाई हो
नोएडा प्राधिकरण एक बड़े और नियोजित शहर के निर्माण की संस्था है, लेकिन अगर उसका नियोजन विभाग ही बेलगाम हो जाए, तो आम जनता का विश्वास टूटना स्वाभाविक है। अब देखना यह होगा कि CEO की नाराजगी के बाद विभाग में कोई ठोस बदलाव आता है या यह सब भी फाइलों में दब जाता है।

