दिल्ली दंगा: दिल्ली हाईकोर्ट ने उमर खालिद को 3 दिन की अंतरिम जमानत दी

दिल्ली दंगा: दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कथित साजिश मामले में बंदी सामाजिक कार्यकर्ता उमर खालिद को तीन दिन की अंतरिम जमानत दे दी है। यह जमानत 1 जून से 3 जून तक वैध रहेगी, मुख्य रूप से उनकी मां की आगामी सर्जरी के दौरान देखभाल के लिए। न्यायमूर्ति प्रतीभा एम सिंह और माधु जैन की खंडपीठ ने आज सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान खालिद की ओर से वकील ने मां की सर्जरी और चाचा के चहलुम (40वें दिन) की रस्म की पुष्टि की। सरकारी वकील ने सर्जरी को मामूली बताया और कहा कि खालिद की पांच बहनें मां की देखभाल कर सकती हैं, लेकिन अदालत ने मां की स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए सीमित राहत प्रदान की।

पृष्ठभूमि

यह राहत ट्रायल कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर आई है जिसमें 19 मई को खालिद की 15 दिन की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने तब कहा था कि हर बार जमानत नहीं दी जा सकती और हर आवेदन को अपनी मेरिट पर देखा जाना चाहिए। अदालत ने चहलुम को “जरूरी नहीं” माना था और मां की देखभाल के लिए अन्य परिवारजनों को पर्याप्त बताया था। खालिद सितंबर 2020 से तिहाड़ जेल में बंद हैं। उन पर UAPA के तहत 2020 दिल्ली दंगों की “बड़ी साजिश” का आरोप है, जिसमें 53 लोगों की मौत हुई थी। उनकी नियमित जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। आज की सुनवाई के मुख्य बिंदु, खालिद के वकील ने जोर दिया कि आरोपी पांच साल आठ महीने से हिरासत में है और परिवार की जरूरतें वास्तविक हैं। सर्जरी की पुष्टि की गई, जिसकी तारीख 2 जून बताई गई।

अदालत ने अंततः मां की सर्जरी के मद्देनजर तीन दिन की राहत दी।उमर खालिद पर लगे आरोपों को लेकर यह मामला काफी संवेदनशील रहा है। उनके समर्थक लंबी हिरासत और ट्रायल में देरी का मुद्दा उठाते रहे हैं, जबकि विरोधी आरोपों की गंभीरता पर जोर देते हैं। यह अंतरिम जमानत सख्त शर्तों के साथ दी गई है, हालांकि विस्तृत शर्तों की जानकारी अभी आधिकारिक रूप से जारी नहीं हुई है। खालिद को जमानत अवधि पूरी होने पर जेल लौटना होगा। आगे की सुनवाई और नियमित जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस मामले की दिशा तय करेगा।

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