कैडेवर का अपमान: केईएम छात्रा सेजल पवार पर जांच, जर्मन छात्रों ने भारतीय कंकाल को सम्मान से दी अंतिम विदाई

मुंबई के प्रतिष्ठित केईएम अस्पताल (सेठ जीएस मेडिकल कॉलेज) की एमबीबीएस छात्रा सेजल पवार के कॉमेडियन प्रणीत मोरे के शो में पुरुष कैडेवर (शव) के निजी अंगों के आकार की तुलना करने वाली विवादास्पद टिप्पणी ने चिकित्सा जगत और सोशल मीडिया को हिला दिया है। अस्पताल ने लिखित माफी के बावजूद जांच समिति गठित कर दी है, जबकि महाराष्ट्र पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर सेजल, प्रणीत मोरे और अन्य को समन भेजा है। इस घटना के ठीक उलट, जर्मनी में स्कूली छात्रों ने एक भारतीय मूल के कंकाल को दशकों बाद सम्मानजनक अंतिम संस्कार दिया, जो औपनिवेशिक काल के हड्डी व्यापार की याद दिलाता है।

सेजल पवार ने प्रणीत मोरे के गुरुग्राम शो में दर्शकों से इंटरैक्ट करते हुए बताया कि मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी लैब में वे और उनकी सहेलियां पुरुष शवों के जननांगों के आकार की तुलना करती थीं। उन्होंने कैडेवर को “साइलेंट टीचर” कहते हुए मजाकिया अंदाज में कहा कि डिसेक्शन के दौरान “मेन पार्ट” को अंत में बचाकर रखते थे। क्लिप वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश फैला। कई लोगों ने इसे बॉडी डोनर्स का अपमान और चिकित्सा नैतिकता का उल्लंघन बताया।

केईएम अस्पताल की प्रतिक्रिया:

केईएम अस्पताल के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि सेजल पवार अभी पूर्ण चिकित्सक नहीं हैं, बल्कि एमबीबीएस की अंतिम वर्ष की छात्रा हैं। उन्होंने लिखित माफी दी है, लेकिन अस्पताल ने दो सदस्यीय जांच समिति गठित की है, जिसमें बायोकैमिस्ट्री विभागाध्यक्ष डॉ. अनिता चालक और मेडिसिन विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्रद्धा मोरे शामिल हैं। समिति पूरे एक घंटे के शो का वीडियो देख रही है और रिपोर्ट जल्द डीन को सौंपेगी। अस्पताल ने कहा कि कैडेवर चिकित्सा शिक्षा के लिए दान किए जाते हैं और उन्हें utmost respect मिलना चाहिए।

महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेसिडेंट डॉक्टर्स (MARD) ने बयान जारी कर कहा कि टिप्पणी अनुचित थी, लेकिन ऑनलाइन उत्पीड़न और व्यक्तिगत हमले गलत हैं। उन्होंने नैतिकता बनाए रखने की अपील की।

पुलिस कार्रवाई:

महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने प्रणीत मोरे, सेजल पवार, हिमांशु जंगरा (₹370 बिरयानी वाली टिप्पणी वाले) और अन्य के खिलाफ बीएनएस की धाराओं 75, 294, 353 तथा आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत एफआईआर दर्ज की है। समन जारी किए गए हैं।

जर्मनी में भारतीय कंकाल को सम्मान:

इसी दौरान जर्मनी में एक स्कूल के छात्रों ने अपने बायोलॉजी लैब के कंकाल “निरन” (Niran) को दफनाया। जांच से पता चला कि यह संभवतः एक भारतीय पुरुष का कंकाल था, जो ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में हड्डी व्यापार के तहत यूरोप भेजा गया था। 1985 में भारत ने इस व्यापार पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन हजारों कंकाल आज भी विश्वविद्यालयों में पड़े हैं। छात्रों ने इसे केवल जैविक नमूना नहीं, बल्कि एक इंसान माना और एथिक्स क्लास में चर्चा कर अंतिम संस्कार किया।

यह घटना भारत में शवों के सम्मान और बॉडी डोनेशन की अहमियत पर रोशनी डालती है। चिकित्सा शिक्षा में कैडेवर “प्रथम गुरु” कहलाते हैं, लेकिन अपमानजनक मजाक से डोनेशन प्रभावित हो सकता है।

विश्लेषण और व्यापक संदर्भ:

चिकित्सा पेशे में डार्क ह्यूमर आम है, लेकिन सार्वजनिक मंच पर इसे साझा करना अनुचित है। सेजल ने इंस्टाग्राम पर माफी मांगते हुए कहा कि “इंटेंट से ज्यादा इंपैक्ट मायने रखता है” और खेद जताया। उनकी पुरानी वीडियो भी वायरल हो रही हैं, जिनमें उन्होंने कॉलेज की आलोचना की थी।

दूसरी ओर, जर्मन छात्रों का संवेदनशील रवैया उदाहरण है। यह औपनिवेशिक शोषण की याद दिलाता है, जब गरीबों और अनक्लेम्ड शवों का शोषण हुआ। आज भारत में भी अस्पतालों में शव महीनों पड़े रहते हैं, परिवार उन्हें ले जाने में असमर्थ होते हैं।

निष्कर्ष:

यह विवाद चिकित्सा नैतिकता, सम्मान और जिम्मेदारी की याद दिलाता है। केईएम की जांच का परिणाम और पुलिस कार्रवाई महत्वपूर्ण होंगे। साथ ही, बॉडी डोनेशन को प्रोत्साहित करने के लिए शवों के प्रति सम्मान जरूरी है। मृत्यु के बाद भी मानव गरिमा अक्षुण्ण रहनी चाहिए—चाहे वह भारत हो या जर्मनी।

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