प्रधानमंत्री की ईंधन बचत की अपील पर अमल करते हुए दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला ले लिया है। राज्य सरकार ने हर हफ्ते एक ‘मेट्रो डे’ मनाने, ‘नो-कार डे’ का पालन करने और दो दिन वर्क फ्रॉम होम (डब्ल्यूएफएच) लागू करने का ऐलान किया है। साथ ही, सरकारी और निजी कार्यालयों में ऑनलाइन मीटिंग्स को बढ़ावा देने के निर्देश जारी किए गए हैं। यह कदम दिल्ली-एनसीआर में बढ़ती ईंधन खपत और प्रदूषण को कम करने की दिशा में उठाया गया है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज एक प्रेस कॉन्च्लेस में कहा, “पीएम मोदी की अपील के अनुरूप हम दिल्ली को ईंधन बचत का मॉडल बनाएंगे। हर शुक्रवार को ‘मेट्रो डे’ होगा, जिसमें लोग कारों की बजाय मेट्रो का इस्तेमाल करेंगे। साथ ही, हर सप्ताह एक ‘नो-कार डे’ भी मनाया जाएगा। सरकारी कर्मचारियों के लिए सोमवार और बुधवार को वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य होगा।” सरकार ने निजी कंपनियों से भी अपील की है कि वे इस पहल में शरीक हों। दिल्ली मेट्रो को मुफ्त या रियायती यात्रा के लिए अतिरिक्त कोच चलाने की योजना पर विचार चल रहा है।
शराफा बाजार के कारोबारियों का समर्थन
दिल्ली के व्यस्त चांदनी चौक शराफा बाजार के प्रमुख कारोबारियों ने इस पहल का खुलकर स्वागत किया है। अखिल भारतीय ज्वैलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुभाष अग्रवाल ने कहा, “ईंधन संकट वैश्विक समस्या है। हम हर बुधवार को ‘नो-कार डे’ मनाएंगे और कर्मचारियों को मेट्रो या साइकिल से आने को प्रोत्साहित करेंगे। इससे न केवल ईंधन बचेगा, बल्कि ट्रैफिक जाम भी कम होगा।” एक अन्य व्यापारी, रोहताश गुप्ता ने बताया, “हमारे बाजार में रोज 500 से ज्यादा गाड़ियां आती हैं। इस पहल से मासिक 20-25 हजार रुपये का ईंधन खर्च बचेगा। सरकार को मेट्रो पार्किंग बढ़ानी चाहिए।” शराफा बाजार व्यापारियों संघ के महासचिव ने कहा कि वे ऑनलाइन मीटिंग्स को अपनाकर ग्राहकों से वीडियो कॉल पर डील करेंगे, जिससे यात्रा की जरूरत कम हो।
आम जनता की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
सामान्य जनता की प्रतिक्रियाएं दोहरी हैं। सोशल मीडिया पर #NoCarDay ट्रेंड कर रहा है, जहां कई यूजर्स ने समर्थन जताया। आईटी प्रोफेशनल रिया शर्मा ने कहा, “डब्ल्यूएफएच से ट्रैफिक 30% कम हो सकता है। मैं पहले से ही हफ्ते में दो दिन घर से काम करती हूं।” वहीं, ऑटो रिक्शा चालक रामू ने चिंता जताई, “नो-कार डे से हमारा रोजगार प्रभावित होगा। सरकार को वैकल्पिक आय का इंतजाम करना चाहिए।” एक सर्वे में 65% दिल्लीवासियों ने पहल का समर्थन किया, लेकिन 40% ने सार्वजनिक परिवहन की कमी का रोना रोया। एनसीआर निवासी विजय कुमार ने कहा, “मेट्रो तो ठीक, लेकिन गुरुग्राम-नोएडा वालों के लिए क्या? ई-रिक्शा को बढ़ावा दो।”
ताजा अपडेट और प्रभाव
आज दोपहर तक दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (डीटीसी) ने 200 अतिरिक्त बसें उतारने की घोषणा की। पर्यावरण मंत्री ने बताया कि अगले हफ्ते से ऐप के जरिए ‘मेट्रो डे’ कारपूलिंग को ट्रैक किया जाएगा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे प्रति सप्ताह 5 लाख लीटर ईंधन की बचत हो सकती है। हालांकि, विपक्ष ने इसे ‘चुनावी स्टंट’ बताते हुए आलोचना की। यह पहल वैश्विक ईंधन संकट के बीच दिल्ली को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

