नोएडा वर्ल्ड वन प्रोजेक्ट में करोड़ों का घपला: बिना मंजूरी के लोअर व अपर ग्राउंड फ्लोर बेचकर खरीदारों से की धोखाधड़ी, हाई कोर्ट में प्राधिकरण का बड़ा खुलासा

नोएडा: सेक्टर-90 स्थित सीबीएस (CBS) के ‘नोएडा वर्ल्ड वन’ प्रोजेक्ट में निवेश करने वाले खरीदारों के साथ धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। बिल्डर ने प्राधिकरण से मंजूरी न होने के बावजूद खरीदारों को प्रोजेक्ट का गलत नक्शा दिखाया और लोअर व अपर ग्राउंड फ्लोर के नाम पर करोड़ों रुपये की दर्जनों दुकानें बेच डालीं। यह मामला अब इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंच चुका है, जहां नोएडा प्राधिकरण के हलफनामे ने बिल्डर के इस फर्जीवाड़े की पोल खोलकर रख दी है।

हाई कोर्ट में नोएडा प्राधिकरण का काउंटर एफिडेविट, खुली पोल

इस मामले में खरीदारों की याचिका पर सुनवाई के दौरान नोएडा प्राधिकरण की सहायक महाप्रबंधक (AGM) प्रिया सिंह की ओर से हाई कोर्ट में एक काउंटर एफिडेविट (जवाबी हलफनामा) दाखिल किया गया। इस एफिडेविट में प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि:

  • इस परियोजना का नक्शा केवल भूतल (Ground Floor) और प्रथम तल (First Floor) से ही स्वीकृत है।

  • प्रोजेक्ट में ‘लोअर ग्राउंड फ्लोर’ और ‘अपर ग्राउंड फ्लोर’ जैसी किसी संरचना को प्राधिकरण की तरफ से कोई मंजूरी नहीं दी गई थी।

इस खुलासे से साफ हो गया है कि बिल्डर ने जानबूझकर खरीदारों को झांसा देने के लिए एक फर्जी नक्शा तैयार किया और अवैध रूप से करोड़ों रुपये ऐंठ लिए।

क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?

नोएडा प्राधिकरण ने साल 2014 में सीबीएस इंटरनेशनल प्रोजेक्ट लिमिटेड (CBS International Project Limited) को सेक्टर-90 में आईटी-आईटीईएस (IT-ITES) श्रेणी के तहत भूखंड संख्या-1 आवंटित किया था। इस भूखंड पर प्राधिकरण ने 23 मंजिला इमारत के निर्माण की मंजूरी दी थी।

निर्माण कार्य शुरू होने के बाद बिल्डर ने असली नक्शे को छिपाकर खरीदारों के सामने एक दूसरा कस्टमाइज्ड नक्शा पेश किया। इस फर्जी नक्शे में बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर के बीच ‘लोअर ग्राउंड’ और ‘अपर ग्राउंड’ फ्लोर दिखाए गए थे। प्राइम लोकेशन और अच्छे रिटर्न के झांसे में आकर दर्जनों खरीदारों ने इन फ्लोर्स पर महंगी दुकानें बुक कर लीं।

जब सुनवाई नहीं हुई, तो खरीदारों को खटखटाना पड़ा कोर्ट का दरवाजा

धोखाधड़ी का अहसास खरीदारों को तब हुआ जब उन्हें दुकानों का कब्जा (Possession) तयशुदा फ्लोर के बजाय किसी अन्य फ्लोर पर देने की कोशिश की गई।

  • खरीदारों ने जब इस हेरफेर पर कड़ी आपत्ति जताई, तो बिल्डर ने उनकी बात सुनने से साफ इनकार कर दिया।

  • पीड़ितों का आरोप है कि इस संबंध में नोएडा प्राधिकरण के चक्कर काटने के बाद भी उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई।

  • हर तरफ से निराश होने के बाद, आखिरकार खरीदारों ने अपने अधिकारों और गाढ़ी कमाई को बचाने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की।

अब प्राधिकरण के आधिकारिक जवाब के बाद कोर्ट के रुख और बिल्डर पर होने वाली कानूनी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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