अभिजीत दीपके अमेरिका से लौटे, बोले ‘किताब और तिरंगा लेकर आएं, पर हवाई अड्डे पर मत आएं’
देश की राजनीति में एक नए और अनोखे आंदोलन ने आज राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का ध्यान खींच लिया। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अमेरिका से वापसी की और उनकी यह वापसी आज के विरोध प्रदर्शन का केंद्र-बिंदु बन गई। पार्टी ने आज जंतर-मंतर पर एक बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया है, जिसमें देशभर के युवाओं को बिना किसी पार्टी का झंडा लिए शामिल होने की अपील की गई है।
कहाँ से उठी यह आवाज़?
इस आंदोलन की जड़ें 15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में हुई एक सुनवाई में हैं, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बेरोज़गार युवाओं की तुलना “कॉकरोच” और “समाज के परजीवी” से की थी। उनकी इस टिप्पणी पर व्यापक प्रतिक्रिया हुई। अगले ही दिन, 16 मई 2026 को, अभिजीत दीपके जो एक राजनीतिक संचार रणनीतिकार हैं और पूर्व में आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं, ने सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की स्थापना की घोषणा की और कहा कि यह मंच “सभी कॉकरोचों के लिए” है। महज 78 घंटों में पार्टी का इंस्टाग्राम अकाउंट 30 लाख फ़ॉलोअर्स पार कर गया और पाँच दिन से भी कम समय में यह 1 करोड़ से अधिक हो गया। जेन-Z और कॉलेज छात्रों के बीच यह आंदोलन जंगल की आग की तरह फैल गया।
प्रदर्शन की माँगें
CJP ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफ़े की माँग की है — NEET-UG और CBSE परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने CBSE के अध्यक्ष राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता के तबादले को “आँखों में धूल झोंकने” की कोशिश बताया और कहा कि ये कदम व्यवस्था की गहरी जड़ों को नहीं छूते। दास ने यह भी कहा कि पिछले एक दशक से देश में सत्ता पक्ष की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं हो रही और “व्यवस्था में सड़ांध” है। उन्होंने यह भी कहा कि पेपर लीक से हर पार्टी के कार्यकर्ताओं के परिजन प्रभावित हुए हैं और इसीलिए सत्ता व विपक्ष, दोनों दलों को इस आंदोलन में शामिल होने का निमंत्रण है।
दीपके की अपील — ‘हवाई अड्डे पर मत आओ’
दीपके ने पहले अपने समर्थकों को हवाई अड्डे पर आकर उनका स्वागत करने का आमंत्रण दिया था, लेकिन बाद में उन्होंने इस योजना में बदलाव किया। उन्होंने X पर जारी वीडियो में कहा कि समर्थकों की भारी संख्या को देखते हुए पार्टी ने यह फैसला लिया। समर्थकों से अपील की गई कि वे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर न पहुँचें, और दीपके स्वयं पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन जाकर जंतर-मंतर प्रदर्शन की अनुमति लेंगे। उन्होंने कहा “किताब और तिरंगा लेकर आएं, अनुशासन बनाए रखें।”
दिल्ली हाईकोर्ट ने PIL खारिज की
‘सेव इंडिया फ़ाउंडेशन’ नामक NGO ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक PIL दायर कर जंतर-मंतर प्रदर्शन पर भीड़-नियंत्रण और निवारक उपाय लागू करने की माँग की थी। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। इस फ़ैसले के बाद CJP ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करना संविधान प्रदत्त अधिकार है।
सोनम वांगचुक का समर्थन
जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी ऐलान किया था कि अगर शिक्षा मंत्री 6 जून से पहले इस्तीफा नहीं देते, तो वे भी CJP के प्रदर्शन में शामिल होंगे। उन्होंने शिक्षा की स्थिति और शैक्षणिक सुधारों के अधूरे क्रियान्वयन को इसकी वजह बताया।
पार्टी का संगठनात्मक विस्तार
आंदोलन को ठोस स्वरूप देने के लिए CJP ने तीन प्रवक्ता नियुक्त किए हैं खोजी पत्रकार सौरव दास, फिल्मकार विजेता दहिया और पूर्व मैनेजमेंट कंसल्टेंट आशुतोष रंका। इसके साथ ही ‘कॉकरोच स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ़ इंडिया’ (CSUI) भी गठित की गई है जो पारदर्शी परीक्षा प्रणाली, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और युवाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की माँग करती है।
पृष्ठभूमि: व्यंग्य से राजनीति तक
यह आंदोलन भले ही एक व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया के रूप में जन्मा हो, लेकिन आज यह लाखों बेरोज़गार युवाओं, परीक्षार्थियों और आम नागरिकों की सच्ची भावनाओं का प्रतीक बन चुका है। CJP के नेतृत्व ने बार-बार स्पष्ट किया है कि यह एक “शांतिपूर्ण और संवैधानिक” प्रदर्शन है। आज का जंतर-मंतर प्रदर्शन यह तय करेगा कि सोशल मीडिया पर उठी यह आवाज़ सड़क पर भी उतनी ही मज़बूत है या नहीं।

