“कॉकरोच जनता पार्टी”: क्या दीपके वामपंथी विचारधारा के बुझते दीपक को जलाने का प्रयत्न जंतर मंतर?, सोशल मीडिया की आँधी अब सड़कों पर उतरी

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग, NEET-CBSE गड़बड़ियाँ बनीं मुद्दा; लेकिन वामपंथी कनेक्शन पर उठ रहे सवाल

भारत की राजनीतिक धारा में एक अजीबोगरीब लेकिन तूफानी नाम इन दिनों हर तरफ गूँज रहा है — कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)। बोस्टन विश्वविद्यालय के छात्र और राजनीतिक संचार रणनीतिकार अभिजीत दीपके आज 6 जून को — इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे, और कैमरों की भीड़ उनका इंतजार कर रही थी। इसके बाद वे सीधे जंतर-मंतर पहुँचे, जहाँ उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया NEET, CBSE और CUET परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को आधार बनाते हुए।

कहाँ से आई यह “कॉकरोच” क्रांति?

इस आंदोलन की जड़ें 15 मई 2026 को उस वक्त फूटीं, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक सुनवाई के दौरान बेरोज़गार युवाओं की तुलना “कॉकरोच” और “समाज के परजीवियों” से की। सीजेआई ने कहा था कि जो युवा न रोज़गार पाते हैं, न पेशे में जगह बना पाते हैं, वे “परजीवी” बनकर सिस्टम पर हमला करते हैं। इसी टिप्पणी को तंज का हथियार बनाते हुए अभिजीत दीपके ने अगले ही दिन 16 मई 2026 को सोशल मीडिया पर “कॉकरोच जनता पार्टी” की घोषणा कर दी। यह कोई पंजीकृत राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन है जिसने इंस्टाग्राम पर 2 करोड़ से अधिक फॉलोअर बटोरे, जो कि BJP और कांग्रेस दोनों की इंस्टाग्राम फॉलोइंग से अधिक है।

पार्टी की विचारधारा — व्यंग्य या एजेंडा?

पार्टी ने खुद को “Secular – Socialist – Democratic – Lazy” कहा है और इंस्टाग्राम पर इसे “आलसी, बेरोज़गार कॉकरोचों का संघ” बताया है। पार्टी के घोषणापत्र में न्यायपालिका की पूर्ण स्वतंत्रता, सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को राज्यसभा में न भेजने की माँग, प्रेस की स्वतंत्रता और युवाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे गंभीर मुद्दे भी उठाए गए हैं।  समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, TMC की माहुआ मोइत्रा और कीर्ति आज़ाद जैसे विपक्षी नेताओं ने इस आंदोलन का समर्थन किया है। यही वह बिंदु है जहाँ से वामपंथी कनेक्शन का सवाल उठता है।

क्या CJP वामपंथ को “जान” देने आई है?

अभिजीत दीपके 2020 से 2023 के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ स्वयंसेवक के रूप में काम कर चुके हैं। पार्टी के प्रवक्ता अशुतोष रंका का भी AAP से जुड़ाव रहा है। हालाँकि दीपके ने किसी भी मौजूदा राजनीतिक कनेक्शन से इनकार किया है। आलोचकों का कहना है कि यह मंच धीरे-धीरे एक संगठित “एंटी-एस्टेब्लिशमेंट डिजिटल इकोसिस्टम” में तब्दील हो रहा है, जो राष्ट्रीय संस्थाओं और शासन व्यवस्था को निशाना बना रहा है।  लेकिन CJP की आधिकारिक विचारधारा “Political Satire” दर्ज है — न वामपंथ, न दक्षिणपंथ। पार्टी के प्रवक्ताओं ने AAP लिंक पर सवालों को “सत्तारूढ़ पार्टी के इकोसिस्टम द्वारा आलोचकों को ‘देशद्रोही’ या ‘पाकिस्तानी’ कहने का पैटर्न” बताया।

ऑनलाइन तूफान, ऑफलाइन परीक्षा

22 मिलियन से अधिक इंस्टाग्राम फॉलोअर के साथ यह आंदोलन आज पहली बार अपनी ऑफलाइन ताकत की असली परीक्षा देने उतरा।  पार्टी ने तीन नए प्रवक्ता नियुक्त किए हैं — खोजी पत्रकार सौरव दास, राजनीतिक शोधकर्ता व फिल्मकार विजेता दहिया और पूर्व प्रबंधन सलाहकार अशुतोष रंका।

विश्लेषण: क्या यह “लेफ्ट की वापसी” है?

सीधा जवाब — नहीं, कम से कम अभी तक नहीं। CJP न तो माकपा है, न भाकपा, और न किसी परंपरागत वामपंथी दल का मोर्चा। यह Gen Z की राजनीतिक निराशा का डिजिटल विस्फोट है। हाँ, इसके समर्थकों में विपक्षी झुकाव जरूर दिखता है और इसके नेतृत्व का AAP से पुराना नाता है — लेकिन यह मान लेना जल्दबाजी होगी कि CJP भारत में ठंडे पड़ चुके वामपंथ में नई जान फूँकने आई है। असली सवाल यह है, क्या इंस्टाग्राम की भीड़ मतदान केंद्र तक पहुँचेगी? जंतर-मंतर का आज का जमावड़ा इसका पहला इम्तिहान था।

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