मेदांता अस्पताल की मनमानी बिलिंग पर सीएमओ सख्त, डॉक्टरों-स्टाफ के पंजीकरण पर भी उठे सवाल

नोएडा के सेक्टर-50 स्थित मशहूर निजी अस्पताल मेदांता के खिलाफ एक मरीज की शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। गौतमबुद्ध नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी कर बिलिंग से लेकर डॉक्टरों-स्टाफ के पंजीकरण तक कई बिंदुओं पर जवाब मांगा है।

क्या है पूरा मामला

ग्रेटर नोएडा के कुलेसरा निवासी प्रशांत कुमार ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि मरीज को भर्ती करते समय अस्पताल की ओर से प्रतिदिन का अनुमानित खर्च 50 से 60 हजार रुपये बताया गया था, लेकिन इलाज पूरा होने के बाद थमाया गया अंतिम बिल इस अनुमानित राशि से लगभग दोगुना था। शिकायतकर्ता का कहना है कि बिल बढ़ाने से पहले न तो कोई स्पष्ट सूचना दी गई और न ही कोई ठोस वजह बताई गई, जिससे मरीज और उसके परिवार पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ा। ताजा जानकारी के अनुसार, प्रशांत कुमार ने यह शिकायत 12 जून 2026 को मुख्यमंत्री के आईजीआरएस पोर्टल के जरिए दर्ज कराई थी।

सीएमओ ने जारी किया सख्त नोटिस

शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय के जरिए स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचने के बाद जांच शुरू हुई। सीएमओ ने 30 जून 2026 को नोटिस जारी करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि अस्पताल इलाज के खर्च को लेकर मरीजों को भ्रमित कर रहा है, और इस पूरे मामले पर अस्पताल प्रबंधन से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

डॉक्टरों और स्टाफ के पंजीकरण पर भी सवाल

जांच सिर्फ बिलिंग तक सीमित नहीं रही। पड़ताल में सामने आया कि अस्पताल ने हाल ही में कई नए डॉक्टर और पैरामेडिकल कर्मचारी नियुक्त किए, लेकिन उनसे जुड़े जरूरी दस्तावेज और जानकारियां सीएमओ कार्यालय को नहीं सौंपी गईं। सीएमओ ने बताया कि पंजीकरण के समय अस्पताल ने जिन डॉक्टरों और स्टाफ का ब्योरा दिया था, उसके बाद नियुक्त हुए कर्मचारियों की जानकारी अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसके अलावा यह भी उजागर हुआ कि कुछ ऐसे चिकित्सक जो दिल्ली मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत हैं, वे उत्तर प्रदेश में सेवाएं दे रहे थे, जबकि यूपी में प्रैक्टिस के लिए यहां का अलग पंजीकरण जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2010 के तहत हर अस्पताल के लिए नियमों का पालन अनिवार्य है।

अस्पताल को दी गई चेतावनी

सीएमओ ने प्रबंधन को निर्देश दिया है कि जिन डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मियों का पंजीकरण अधूरा है, उसे तुरंत पूरा कराकर संबंधित दस्तावेज तय समय-सीमा में सौंपे जाएं। नोटिस में साफ चेतावनी दी गई है कि अगर अस्पताल समय रहते नियमों का पालन नहीं करता, तो क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

मरीजों के लिए विभाग की अपील

स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि इलाज के दौरान मरीजों को पूरी पारदर्शिता मिलनी चाहिए, और भर्ती के समय अस्पतालों को संभावित खर्च का साफ अंदाजा देना चाहिए। यदि इलाज के बीच में अतिरिक्त खर्च आ रहा हो तो मरीज या परिजनों को समय रहते सूचित करना जरूरी है। सीएमओ कार्यालय ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी निजी अस्पताल में भर्ती होने से पहले इलाज का लिखित अनुमान (एस्टिमेटेड बिल) जरूर लें। अगर बिना उचित कारण अतिरिक्त शुल्क वसूला जाए या कोई अनियमितता नजर आए, तो इसकी शिकायत संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों या मुख्यमंत्री के आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज कराई जा सकती है। विभाग ने भरोसा दिलाया है कि हर शिकायत पर नियमानुसार जांच कर जरूरी कार्रवाई की जाएगी।

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