बिल्डर्स की लापरवाही और सुविधाओं में घोर लापरवाही: देशभर में बिल्डर्स द्वारा सुविधाओं में लापरवाही और निर्माण संबंधी अनियमितताओं की शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, कई महत्वपूर्ण और सार्वजनिक हित की शिकायतें दर्ज की गई हैं, जिनमें बिल्डर्स द्वारा वादा की गई सुविधाओं जैसे पार्किंग, सीवरेज सिस्टम, लिफ्ट, अग्निशमन व्यवस्था और सीसीटीवी की कमी प्रमुख है। इन शिकायतों ने आम आदमी को परेशान कर दिया है, जिससे घर खरीदारों में आक्रोश फैल गया है।
सीबीआई की देशव्यापी कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने हाल ही में आठ राज्यों में 77 स्थानों पर बिल्डर्स और वित्तीय संस्थानों के खिलाफ छापेमारी की। इन छापों में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त हुए, जो घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी और जालसाजी को उजागर करते हैं। दिल्ली, चेन्नई, बेंगलुरु समेत अन्य शहरों में यह कार्रवाई सुपरटेक लिमिटेड जैसे मामलों से जुड़ी है, जहां एनसीआर क्षेत्र में 22 नए केस दर्ज किए गए।
हालिया हादसे और बिल्डर्स की जिम्मेदारी
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में बिल्डर की लापरवाही से गड्ढे में गिरी कार से एक युवक की मौत हो गई, जो प्रशासनिक उदासीनता का चरम उदाहरण है। झारखंड में निर्माणाधीन दीवार गिरने से दो बच्चों की जान गई, जबकि बिहार में आरएसआर मैनशा प्रोजेक्ट्स जैसे मामलों में पार्किंग, ड्रेनेज और बाउंड्री वर्क की कमी को अदालतों ने रेखांकित किया। ये घटनाएं बिल्डर्स की लापरवाही को बेनकाब करती हैं, जहां कोस्ट कटिंग और नियमों का उल्लंघन आम हो गया है।
शिकायत निवारण के लिए सरकारी तंत्र
प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के पीआईडीपीआई पोर्टल पर लोक शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं, जो संबंधित विभागों को भेजी जाती हैं। सेंट्रल इंफॉर्मेशन कमीशन ने आरटीआई शिकायतों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं, जबकि लोक शिकायत पोर्टल पर पंजीकरण संख्या से स्थिति ट्रैक की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि रेरा (रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) को और सशक्त बनाने से इन समस्याओं पर अंकुश लगेगा।
जनता की मांग: तत्काल न्याय और सख्त कानून
घर खरीदार संगठनों ने बिल्डर्स पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, जिसमें जुर्माना, जेल और संपत्ति जब्ती शामिल हो। वर्तमान में अप्रैल 2026 तक ये मामले सुर्खियां बटोर रहे हैं, और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही जांच से उम्मीद है कि दोषियों को सजा मिलेगी। आम नागरिकों को सलाह दी जाती है कि शिकायतें ऑनलाइन पोर्टलों पर तुरंत दर्ज करें ताकि सार्वजनिक हित सुरक्षित रहे।

