भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते में किसानों के हित सुरक्षित रखें, BKU का कड़ा विरोध, संभावित आयात और MSP पर चिंता तेज

भारत और अमेरिका के बीच फरवरी 2025 से चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के बीच किसान संगठनों ने केंद्र सरकार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। भारतीय किसान यूनियन (BKU) ने कहा है कि अमेरिका के साथ निकट भविष्य में संभावित अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Agreement) भारतीय किसानों की आजीविका और देश की खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। BKU के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत और राष्ट्रीय महासचिव चौधरी युद्धवीर सिंह ने संयुक्त रूप से यह चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री को पत्र भेजा है और सार्वजनिक रूप से आवाज उठाई है।

वार्ता के अंतिम चरण में पहुँचने का संकेत

सरकारी सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जैमीसन ग्रीयर की 23-24 जून की नई दिल्ली यात्रा के दौरान भारत-अमेरिका समझौते पर अंतिम चर्चा होने की संभावना थी। पिछले कई महीनों में अमेरिकी प्रतिनिधियों द्वारा भारत के कृषि बाजार खोलने और आयात बाधाएँ दूर करने संबंधी कई बयानों ने किसानों में आशंकाएँ बढ़ा दी हैं। BKU का कहना है कि समझौते के कुछ प्रावधान सीधे तौर पर भारतीय किसानों के हितों को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए किसी भी अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर से पहले किसानों की चिंता का हल जरूरी है।

किसानों की मुख्य चिंताएँ

टैरिफ कटौती का खतरा: सार्वजनिक जानकारी के आधार पर ऐसा प्रतीत होता है कि कई कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क घटाने की तैयारी चल रही है। BKU का कहना है कि यदि पर्याप्त शुल्क संरक्षण नहीं मिलेगा, तो भारतीय कृषक अमेरिकी सब्सिडी प्राप्त उत्पादों के साथ टिककर प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे।

सब्सिडी-आधारित आयात: विशेष रूप से डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों पर अमेरिका की भारी सब्सिडी के कारण सस्ती आपूर्ति आने की आशंका है, जिससे घरेलू उत्पादकों की कीमतें और बाजार हिस्सेदारी गिर सकती है।

जीएम मक्का और खाद्य मानक: समझौते के तहत कुछ तकनीकी और मानक-संबंधी समायोजन होने के चलते आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) मक्का सहित कुछ उत्पादों के अप्रत्यक्ष आयात का रास्ता खुल सकता है, जो उपभोक्ता व किसान दोनों के लिए नए जोखिम खड़े कर सकता है।

MSP और WTO दबाव: BKU का आरोप है कि अमेरिका वैश्विक मंचों पर भारत पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) जैसी कृषक-हितसंबंधी नीतियों में बदलाव के लिए दबाव बना रहा है। यदि MSP पर समझौते के माध्यम से किसी प्रकार का समझौता या दबाव शामिल हुआ तो यह सीधे धान-गेहूं और अन्य अनाज उत्पादकों की आय पर प्रभाव डालेगा।

सरकार के आश्वासनों पर प्रश्नचिह्न

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई मौकों पर आश्वस्त किया था कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं में किसानों, मछुआरों तथा डेयरी एवं पोल्ट्री क्षेत्र से जुड़े लोगों के हितों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी। हालांकि BKU का कहना है कि 6 फरवरी को जारी भारत-अमेरिका संयुक्त बयान ने किसानों को पर्याप्त भरोसा नहीं दिया। किसान संगठनों की नज़र में संयुक्त बयान में गारंटी या स्पष्ट संरक्षण की कमी और गोपनीय वार्ता की संभावना ही चिंताएँ बढ़ा रही है।

BKU की मांग और आगाह

चौधरी राकेश टिकैत और चौधरी युद्धवीर सिंह ने पत्र में प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि वे अपने वादे पर कायम रहें और अमेरिका के दबाव में आकर ऐसा कोई अंतरिम समझौता न करें जो भारत की कृषि और किसानों के हितों से समझौता करता हो। BKU ने कहा है कि किसानों की सुरक्षा के बिना किसी भी द्विपक्षीय समझौते को अंतिम रूप देना देशहित के विरुद्ध होगा। संगठन ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने किसानों की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया तो व्यापक आंदोलन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

विशेषज्ञों का अनुमान और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि अंतरिम समझौते में आंशिक टैरिफ कटौती से उपभोक्ताओं को अल्पकालिक लाभ हो सकता है, पर दीर्घकालिक रूप से घरेलू उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। विपक्षी दलों और किसान समूहों ने सरकार से पारदर्शिता और विस्तृत प्रभाव मूल्यांकन की मांग की है। राजनीतिक रूप से भी यह संवेदनशील मामला बन सकता है क्योंकि कृषि-सम्बंधी नीतियाँ ग्रामीण मतदाता-आधार पर सीधे असर डालती हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया और आगे का रास्ता

सरकारी अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी द्विपक्षीय समझौते के निर्णय में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होंगे और किसानों की सुरक्षा को ध्यान में रखा जाएगा, पर विस्तृत वार्ताओं और संभावित टेक्स्ट सार्वजनिक करने के समय पर अधिकारियों ने सीमित टिप्पणी की। दिल्ली में 23-24 जून बैठकों के बाद ही स्पष्ट संकेत मिलने की संभावना थी; पर BKU और अन्य किसान संगठनों ने सरकार से अधिक पारदर्शिता, प्रभावित वस्तुओं की सूची और किसानों व कृषि प्रतिनिधियों की भागीदारी की मांग दोहराई है।

यह भी पढ़ें: एआई निगरानी से जैमर्स तक: NTA ने NEET री-टेस्ट में छोड़ा कोई कमजोर कड़ी नहीं, आज 22 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी दोबारा मैदान में

यहां से शेयर करें