Bhiwandi Building Collapse: मुंबई/ठाणे, महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी में गुरुवार रात (30 जुलाई) बड़ा हादसा हो गया। नारपोली के भंडारी कंपाउंड, गंगाराम वाड़ी स्थित कोहिनूर अपार्टमेंट (ग्राउंड प्लस चार मंजिला) के बी-विंग का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर ढह गया। इलाके में हड़कंप मच गया। मलबे के नीचे 5 से 10 मजदूरों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कुछ रिपोर्टों में मौतों का आंकड़ा तीन तक बताया गया है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), फायर ब्रिगेड, पुलिस और भिवंडी महानगरपालिका की टीमें युद्धस्तर पर बचाव अभियान चला रही हैं।
हादसा देर रात या तड़के हुआ। स्थानीय लोगों के अनुसार शाम करीब 6 बजे से इमारत में दरारें दिखने लगी थीं। रात 8 बजे के आसपास इमारत झुकने लगी। प्रभाग समिति क्रमांक-4 के सहायक आयुक्त अरविंद घोगरे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की जा रही थी। कुछ लोग सामान निकालने के लिए अंदर थे और ग्राउंड फ्लोर पर पिलरों की मरम्मत का काम चल रहा था। तभी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई।
इमारत पहले से जर्जर घोषित
भिवंडी पश्चिम के विधायक महेश चौगुले ने बताया कि नगर निगम ने इस इमारत को पहले ही ‘सी-श्रेणी’ (अत्यंत खतरनाक और जर्जर) घोषित कर नोटिस जारी किए थे। अधिकांश रहवासी पहले ही खाली करा दिए गए थे। इमारत का असेसमेंट 2007 में हुआ था और निर्माण 2012 के आसपास। कमजोर निर्माण गुणवत्ता के कारण यह शुरू से ही जोखिम भरी मानी जा रही थी। मरम्मत के दौरान तीन पिलर तोड़ दिए जाने से नींव कमजोर हो गई, जिससे हादसा हुआ। भारी बारिश भी एक वजह मानी जा रही है।
बचाव अभियान और प्रतिक्रियाएं
सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड, पुलिस और महानगरपालिका की टीम पहुंचीं। संकरी गलियों के कारण शुरुआती मुश्किलें आईं। पुरानी चॉल को जेसीबी से हटाने के बाद मलबे तक पहुंच संभव हो सकी। NDRF और TDRF की टीमें भी मौके पर हैं। पोकलेन और आधुनिक उपकरणों से मलबा हटाया जा रहा है। NDRF ने एक महिला को सुरक्षित बाहर निकाला। उसे अस्पताल ले जाया गया। स्थानीय युवकों ने भी दो लोगों को बचाया। एक महिला कोमल (जिसके माता-पिता अरविंद गुप्ता और उनकी पत्नी सुरक्षित बाहर निकल आए) खुद मलबे से बाहर निकलने में सफल रही। उसने बताया कि पिलरों की मरम्मत चल रही थी तभी अचानक इमारत ढह गई। महापौर नारायण चौधरी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि इमारत पहले से खतरनाक घोषित होने के कारण अधिकांश लोग बाहर निकल चुके थे, जिससे बड़ा जनहानि टल गई। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि खतरनाक घोषित इमारतों में न रहें। प्रभावित परिवारों के लिए स्कूलों और सामुदायिक भवनों में अस्थायी व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने घटनास्थल के चारों ओर सुरक्षा घेरा बना दिया है और अफवाहों से बचने की सलाह दी है।
ताजा स्थिति
शुरुआती रिपोर्टों में 8-10 लोगों के फंसे होने की बात कही गई थी। बाद में आंकड़ा 5-6 या 6-7 मजदूरों तक बताया गया। आधिकारिक तौर पर मृतकों और फंसे लोगों की सटीक संख्या की पुष्टि का इंतजार है। बचाव अभियान जारी है। नई जानकारी मिलने पर अपडेट किया जाएगा। यह हादसा एक बार फिर जर्जर इमारतों और मानसून में मरम्मत कार्यों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि ऐसी इमारतों में जोखिम न उठाया जाए।
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