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राम मंदिर के पूरे प्रबंधन में बदलाव जरूरी, दान घोटाले में निर्माण समिति अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र की बड़ी टिप्पणी – जय हिन्द जनाब राम मंदिर के पूरे प्रबंधन में बदलाव जरूरी, दान घोटाले में निर्माण समिति अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र की बड़ी टिप्पणी – जय हिन्द जनाब

राम मंदिर के पूरे प्रबंधन में बदलाव जरूरी, दान घोटाले में निर्माण समिति अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र की बड़ी टिप्पणी

राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर में चढ़े दान की कथित हेराफेरी के विवाद के बीच मंदिर के पूरे प्रबंधन तंत्र में बड़े बदलाव की वकालत की है। उनका कहना है कि इस विवाद ने निगरानी और जवाबदेही में गंभीर खामियों को सामने ला दिया है। मिश्र ने इस मामले को “बहुत पीड़ादायक” करार दिया। उनका कहना था कि अगर श्रद्धालुओं के दान का एक भी पैसा किसी व्यक्ति विशेष के पास गया है, तो यह आस्था और प्रतिष्ठा दोनों की हानि है और इससे हर नागरिक को ठेस पहुंची है।

तिरुपति मॉडल और सीईओ की सिफारिश

मंदिर के बेहतर प्रबंधन के लिए मिश्र ने तिरुपति देवस्थानम की तरह व्यवस्था अपनाने का सुझाव दिया। उनके मुताबिक तिरुपति में एक कमिश्नर रैंक का अधिकारी मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर पांच-सात साल तक पूरा प्रबंधन संभालता है, और राम मंदिर में भी ट्रस्ट के साथ मिलकर काम करने वाला ऐसा अनुभवी सीईओ नियुक्त किया जाना चाहिए, जिसे उत्तर प्रदेश में काम करने का अनुभव हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे ट्रस्ट के नियम-कानून बदलने की बात नहीं कर रहे, बल्कि प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। मिश्र ने यह भी कहा कि मंदिर ट्रस्ट के 70 प्रतिशत से ज्यादा कर्मचारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक हैं, इस वजह से ऐसे संस्थानों में सतर्कता और भी जरूरी हो जाती है।

SIT जांच और दो आयामी रणनीति

विवाद बढ़ने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक विशेष जांच दल (SIT) गठित किया, जिसमें एक मंडलायुक्त, सीबीआई में लंबा अनुभव रखने वाले आईजी रैंक के पुलिस अधिकारी और वित्त विभाग के विशेष सचिव शामिल हैं। मिश्र ने राज्य सरकार की तेजी की सराहना करते हुए कहा कि ट्रस्ट के अनुरोध के 24 घंटे के भीतर ही SIT का गठन कर दिया गया, जो सराहनीय कदम है।जांच की रूपरेखा साफ करते हुए मिश्र ने अयोध्या में पत्रकारों से कहा कि जांच के दो आयाम हैं आपराधिक पहलू और भविष्य में सुधार का पहलू, और दोनों पर ध्यान देने पर ही श्रद्धालुओं का भरोसा फिर से जीता जा सकेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच में किसी तरह की कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। तीन सदस्यीय SIT टीम ने 15 जून को गेट नंबर 11 से मंदिर परिसर में प्रवेश कर जांच शुरू कर दी थी।

राजनीतिक हलचल तेज

इस विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। भाजपा-आरएसएस से जुड़े एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग करते हुए सीबीआई, ईडी या कैग से जांच की मांग की है, जिसका कई लोग समर्थन कर रहे हैं। कांग्रेस की ओर से भी हमला तेज हुआ है — कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार ने ट्रस्ट से श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान को वापस करने की मांग करते हुए कहा कि ट्रस्ट सदस्यों ने आस्था के नाम पर मिले धन का दुरुपयोग कर देश और संस्कृति को शर्मसार किया है। 

आगे क्या

ट्रस्ट को SIT से दो रिपोर्ट मिलनी हैं — एक प्राथमिक जांच रिपोर्ट और 15 दिन में अंतिम रिपोर्ट। मिश्र की दलील है कि अगर प्रारंभिक रिपोर्ट में वित्तीय गड़बड़ी की पुष्टि होती है तो उसके आधार पर ठोस कार्रवाई होनी चाहिए। निर्माण समिति की अगली अहम बैठक की भी तैयारी चल रही है, जिसमें मंदिर प्रबंधन के पुनर्गठन पर औपचारिक चर्चा हो सकती है।

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