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सुप्रीम कोर्ट से वेदांता को झटका: अदाणी समूह को जेपी एसोसिएट्स (JAL) अधिग्रहण पर मिली हरी झंडी, वेदांता की याचिका पर अंतरिम राहत से इनकार, NCLAT में 10 अप्रैल को सुनवाई – जय हिन्द जनाब सुप्रीम कोर्ट से वेदांता को झटका: अदाणी समूह को जेपी एसोसिएट्स (JAL) अधिग्रहण पर मिली हरी झंडी, वेदांता की याचिका पर अंतरिम राहत से इनकार, NCLAT में 10 अप्रैल को सुनवाई – जय हिन्द जनाब

सुप्रीम कोर्ट से वेदांता को झटका: अदाणी समूह को जेपी एसोसिएट्स (JAL) अधिग्रहण पर मिली हरी झंडी, वेदांता की याचिका पर अंतरिम राहत से इनकार, NCLAT में 10 अप्रैल को सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट से वेदांता को झटका: सुप्रीम कोर्ट ने आज जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (Jaiprakash Associates Ltd – JAL) के दिवालिया समाधान में अदाणी एंटरप्राइजेज की ₹14,535 करोड़ की रेजोल्यूशन प्लान को आगे बढ़ने की अनुमति दे दी। अदाणी समूह को हरी झंडी मिलने के साथ ही वेदांता लिमिटेड की याचिका पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया गया।

चीफ जस्टिस एस. नित्यानंदा और जस्टिस जोयमल्या बागची की पीठ ने कहा कि NCLAT (नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल) पहले से ही मामले की सुनवाई कर रहा है और 10 अप्रैल को विस्तृत सुनवाई निर्धारित है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल NCLAT के अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया। हालांकि, कोर्ट ने JAL के मॉनिटरिंग कमिटी को कोई बड़ा नीतिगत फैसला लेने से पहले NCLAT की अनुमति लेने का निर्देश दिया है।

मामला क्या है?

जयप्रकाश एसोसिएट्स (जेपी ग्रुप की मुख्य कंपनी) लंबे समय से दिवालिया प्रक्रिया में है। लेनदारों की समिति (CoC) ने अदाणी एंटरप्राइजेज की बोली को 93.81% वोट से मंजूरी दी थी। NCLT (इलाहबाद बेंच) ने मार्च 2026 में अदाणी की योजना को मंजूरी दे दी।

वेदांता ने दावा किया कि उसकी संशोधित बोली अदाणी से ₹3,400 करोड़ अधिक (कुल मूल्य में) और नेट प्रेजेंट वैल्यू में लगभग ₹500 करोड़ बेहतर थी। अनिल अग्रवाल (वेदांता चेयरमैन) ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि उन्हें लिखित रूप में सबसे ऊंची बोली का confirmation मिला था, लेकिन बाद में फैसला बदल दिया गया। NCLAT ने 24 मार्च को वेदांता को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया और अदाणी प्लान को आगे बढ़ने दिया।

वेदांता का मुख्य तर्क: IBC (इंसॉल्वेंसी एंड बैंकRUPTCY कोड) का मूल उद्देश्य लेनदारों को अधिकतम मूल्य दिलाना है। इसलिए कम बोली वाली योजना को चुनना गलत और मनमाना है।

अदाणी समूह की स्थिति

अदाणी एंटरप्राइजेज ने सुप्रीम कोर्ट में कैवेट दाखिल कर रखा था, ताकि कोई भी आदेश उसके बिना न गुजरे। अदाणी की बोली को लेनदारों ने इसलिए चुना क्योंकि इसमें अधिक अग्रिम नकद भुगतान (लगभग ₹6,000 करोड़) और तेजी से भुगतान का प्रावधान था, जो दिवालिया प्रक्रिया में महत्वपूर्ण माना जाता है।

आगे क्या?

अब पूरा फोकस 10 अप्रैल 2026 को NCLAT में होने वाली सुनवाई पर है, जहां वेदांता अपनी अपील पर विस्तार से बहस करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल प्रक्रिया को रोका नहीं है, जिससे अदाणी समूह को अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में राहत मिली है। जेपी एसोसिएट्स के पास रियल एस्टेट, होटल, सीमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर की बड़ी संपत्तियां हैं, जिनका कुल मूल्य हजारों करोड़ में आंका जाता है।

यह मामला कॉरपोरेट दिवालिया प्रक्रिया में सबसे ऊंची बोली बनाम व्यावहारिक और तेज भुगतान वाले विकल्प के बीच के विवाद को उजागर करता है। दोनों बड़े औद्योगिक समूहों (अदाणी और वेदांता) के बीच यह कानूनी जंग अब NCLAT और संभवतः फिर सुप्रीम कोर्ट में जारी रहेगी।

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