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Noida Authority in turmoil: वरिष्ठता विवाद में तीन सिविल मैनेजरों ने CEO-ACEO को सौंपा लिखित आवेदन, साथ ही सफाई कर्मचारियों की हड़ताल जारी – जय हिन्द जनाब Noida Authority in turmoil: वरिष्ठता विवाद में तीन सिविल मैनेजरों ने CEO-ACEO को सौंपा लिखित आवेदन, साथ ही सफाई कर्मचारियों की हड़ताल जारी – जय हिन्द जनाब

Noida Authority in turmoil: वरिष्ठता विवाद में तीन सिविल मैनेजरों ने CEO-ACEO को सौंपा लिखित आवेदन, साथ ही सफाई कर्मचारियों की हड़ताल जारी

Noida Authority in turmoil: नोएडा प्राधिकरण में अंदरूनी सांठगांठ और वरिष्ठता नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। हाल ही में किए गए प्रशासनिक फेरबदल के बाद तीन सिविल मैनेजरों को जूनियर अधिकारी प्रभारी वरिष्ठ प्रबंधक (सिविल) रोहित सिंह के अधीन तैनात करने पर नाराजगी जताई गई है। वहीं, स्वच्छ भारत मिशन के तहत सार्वजनिक शौचालयों की रखरखाव करने वाले संविदा कर्मचारी भी 6-7 महीने से ड्यूटी और वेतन न मिलने के खिलाफ हड़ताल पर डटे हुए हैं। दोनों मुद्दों ने प्राधिकरण में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।

प्राधिकरण के सूत्रों और सोशल मीडिया पर वायरल जानकारी के अनुसार, 15 फरवरी 2026 को नोएडा प्राधिकरण में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया। जन स्वास्थ्य विभाग (पब्लिक हेल्थ) और नोएडा ट्रैफिक सेल (NTC) को भंग कर दिया गया। अब सफाई, डोर-टू-डोर कचरा संग्रह और ट्रैफिक प्रबंधन की जिम्मेदारी वर्क सर्कल्स को सौंपी गई। इस बदलाव के तहत वर्क सर्कल-4 के प्रभारी रोहित सिंह को बनाया गया। तीन सिविल मैनेजरों को इन्हीं रोहित सिंह के अधीन तैनात कर दिया गया, जबकि ये मैनेजर रोहित सिंह से वरिष्ठ बताए जा रहे हैं। मैनेजरों ने इस तैनाती को वरिष्ठता नियमों के खिलाफ बताते हुए प्राधिकरण के CEO कृष्णा करुणेश और ACEO को लिखित आवेदन सौंप दिया है। आवेदन में कहा गया है कि जूनियर अधिकारी के अधीन काम करना उनके पद और अनुभव के अनुरूप नहीं है। प्राधिकरण की वरिष्ठता सूची आने के बाद मैनेजरों में भारी नाराजगी फैल गई। मामले की चर्चा तेज हो गई है और अब प्राधिकरण के अगले फैसले पर सबकी नजर टिकी हुई है।

सुमित कुमार ने मीडिया से बातचीत में बताया
इसी बीच प्राधिकरण के संविदा कर्मचारियों में भी गुस्सा फूट पड़ा है। एक समूह ‘अपना हक लेके रहेंगे’ और ‘मजदूर एकता जिंदाबाद’ के नारे लगाते हुए प्रदर्शन कर रहा है। सुमित कुमार नामक व्यक्ति, जो खुद को प्राधिकरण का कर्मचारी बताते हैं, अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ बैठकर अपनी मांगें रख रहे हैं।  “पिछले 6-7 महीनों से हमें ड्यूटी नहीं दी जा रही। नया ठेकेदार और फाइलें तैयार होने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ।” कर्मचारियों का आरोप है कि नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों और ठेकेदारों ने उन्हें शोषण का शिकार बनाया है। ड्यूटी न मिलने से वे भारी कर्ज में डूब गए हैं। किराया, बच्चों की पढ़ाई जैसे बुनियादी खर्चे भी नहीं निकल पा रहे। उन्हें सिर्फ 5,000 रुपये का मामूली भुगतान मिला, जो बिल्कुल अपर्याप्त है।

ये कर्मचारी केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए गए सार्वजनिक शौचालयों की रखरखाव का काम करते थे। सुमित कुमार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि उनकी समस्याओं को जल्द हल किया जाए। उन्होंने साफ कहा, “जब तक रोजगार और वेतन नहीं मिलता, हड़ताल जारी रहेगी।” पृष्ठभूमि और ताजा अपडेट
नोएडा प्राधिकरण में जनवरी 2026 में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद प्रशासनिक फेरबदल तेज हुआ है। नए CEO कृष्णा करुणेश (2011 बैच IAS) ने पद संभालते ही सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। सफाई व्यवस्था को वर्क सर्कल्स के अधीन करने का फैसला लिया गया, लेकिन इससे वरिष्ठता और तैनाती के विवाद खड़े हो गए। साथ ही AVN Enviro Infra जैसी कंपनियों के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से सेक्टरों में कचरा जमा हो रहा है। प्राधिकरण के ACEO से मिले फोनरवा (फेडरेशन ऑफ नोएडा रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन) के प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया गया कि जल्द समाधान निकाला जाएगा।

प्राधिकरण सूत्रों का कहना है कि दोनों मामलों पर उच्च स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है। कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच संवाद बढ़ाने के प्रयास हो रहे हैं, लेकिन फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। नागरिकों की सफाई और विकास कार्यों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अब देखना होगा कि प्राधिकरण का अगला फैसला इन विवादों को शांत करता है या नई बहस को जन्म देता है।

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