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बड़ी उपलब्धिः भारत ने दुनिया का पहला डॉक्टर-नेतृत्व वाला एआई हेल्थकेयर इकोसिस्टम किया लॉन्च, जानिए क्या है खुबियां – जय हिन्द जनाब बड़ी उपलब्धिः भारत ने दुनिया का पहला डॉक्टर-नेतृत्व वाला एआई हेल्थकेयर इकोसिस्टम किया लॉन्च, जानिए क्या है खुबियां – जय हिन्द जनाब

बड़ी उपलब्धिः भारत ने दुनिया का पहला डॉक्टर-नेतृत्व वाला एआई हेल्थकेयर इकोसिस्टम किया लॉन्च, जानिए क्या है खुबियां

Health News: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बीमारी के इलाज से ध्यान हटाकर इसकी भविष्यवाणी करने और इसे रोकने पर ध्यान केंद्रित करके हाईटेक हेल्थकेयर को फिर से परिभाषित कर रहा है। मरीजों सुरक्षा और निरंतर देखभाल के लिए एक बड़ी उन्नति में, भारत ने  iLive Connect के शुभारंभ का गवाह बना है, जो कि अपनी तरह का पहला वैश्विक, डॉक्टर-नेतृत्व वाला एआई हेल्थकेयर इकोसिस्टम है, जिसे अस्पताल की दीवारों से परे वास्तविक समय की चिकित्सा पर्यवेक्षण प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है।

iLive Connect के मूल में एक छोटा वायरलेस बायोसेंसर पैच है जो पहनने योग्य रिस्टबैंड के साथ जोड़ा गया है, जो लगातार महत्वपूर्ण शारीरिक मापदंडों को कैप्चर करता है। कमांड सेंटर में चैबीसों घंटे बहुत स्पेशलाइज्ड डॉक्टर काम करते हैं जो रियल टाइम में मरीजों पर एक्टिव रूप से नजर रखते हैं। पुराने मॉनिटरिंग सिस्टम के उलट, जो सिर्फ लक्षण दिखने के बाद ही काम करते हैं,  iLive Connect  में एआई से चलने वाला प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स है, जिससे शरीर में होने वाले छोटे-मोटे बदलावों का पता चल जाता है, जो क्लिनिकल लक्षण दिखने से बहुत पहले बीमारी की शुरुआत का संकेत दे सकते हैं। इस शुरुआती पहचान से डॉक्टर बचाव के स्टेज पर ही दखल दे पाते हैं, जिससे कॉम्प्लीकेशंस काफी कम हो जाती हैं, मेडिकल इमरजेंसी से बचा जा सकता है, और बार-बार हॉस्पिटल में भर्ती होने की जरूरत कम हो जाती है।  iLive Connect के फाउंडर और कार्डियोवैस्कुलर और थोरेसिक सर्जन डॉ. राहुल चंदोला के अनुसार, ये सिस्टम हेल्थकेयर की सबसे बड़ी कमी को दूर करने के लिए बनाया गया था।

हॉस्पिटल से निकलने के बाद करेगा सुपरविजन
मरीज के हॉस्पिटल से निकलने के बाद लगातार मेडिकल सुपरविजन की कमी। “ज्यादातर गंभीर मेडिकल घटनाएँ हॉस्पिटल के अंदर नहीं होतीं, बल्कि उस समय होती हैं जब मरीज बिना मेडिकल देखरेख के घर पर होते हैं। लगातार बायोसेंसर मॉनिटरिंग को प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और प्रोएक्टिव डॉक्टर सुपरविजन के साथ मिलाकर, iLive Connect लक्षणों के दिखने से बहुत पहले ही शारीरिक गिरावट का पता लगाने में मदद करता है। इससे समय पर मेडिकल गाइडेंस मिलता है और बीमारी को गंभीर होने से रोकता है,” डॉ. चंदोला ने 10 हफ्ते की ऑब्जर्वेशनल स्टडी के दौरान 410 से ज्यादा मरीजों के डेटा की स्टडी की। इसमें पाया गया कि बार-बार हॉस्पिटल में भर्ती होने में 76ः की कमी आई, साथ ही दिल की बीमारियों, ब्लड प्रेशर की अस्थिरता, मेटाबोलिक डिसऑर्डर और डिस्चार्ज के बाद की दिक्कतों से जुड़े जोखिमों की जल्दी पहचान हुई। इस टेक्नोलॉजी ने अकेले रहने वाले सीनियर सिटिजन्स, पुरानी बीमारियों वाले मरीजों और हाल ही में हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हुए लोगों के लिए खास फायदा दिखाया है, जहाँ हॉस्पिटल से घर की देखभाल में बदलाव एक कमजोर समय रहता है।

डॉ. विवेका कुमार ने बताया
iLive Connect के को-फाउंडर और सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विवेका कुमार ने बताया कि लगातार क्लिनिकल देखरेख के साथ एआई को जोड़ने से कई संभावित गंभीर स्थितियों में तेजी से रिस्पॉन्स टाइम और समय पर मेडिकल इंटरवेंशन मुमकिन हुआ है। आम वियरेबल डिवाइस से अलग, जो यूजर्स को सिर्फ हेल्थ डेटा दिखाते हैं, iLive Connect एक डॉक्टर के नेतृत्व वाला कंटीन्यूअस केयर इकोसिस्टम है, जहाँ टेक्नोलॉजी क्लिनिकल फैसले लेने में मदद करती है, न कि उसकी जगह लेती है। यह प्लेटफॉर्म किसी भी जगह पर स्पेशलिस्ट सुपरविजन तक पहुँच देता है, जिससे देश के दूर-दराज के इलाकों में मरीजों को बार-बार हॉस्पिटल जाए बिना एडवांस्ड मेडिकल मॉनिटरिंग मिल सकती है। कार्डियोवैस्कुलर और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते दौर में, iLive Connect एपिसोडिक हेल्थकेयर से कंटीन्यूअस, प्रिवेंटिव मेडिसिन की ओर एक बदलाव दिखाता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए डॉक्टरों को मरीजों के करीब लाता है और मॉडर्न हेल्थकेयर माहौल में मरीजों की सुरक्षा को फिर से तय करता है।

 

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