अनिल अंबानी की मानहानि याचिका में भारती समेत दिग्गजों का नाम, दिल्ली हाईकोर्ट ने NDTV और राहुल कंवल को जारी किया नोटिस, अंतरिम रोक से इनकार

उद्योगपति अनिल अंबानी द्वारा दायर मानहानि मुकदमे पर दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को NDTV, उसके पैरेंट कंपनी AMG Media Networks Limited तथा CEO एवं एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल समेत अन्य को नोटिस जारी कर दिया है। अदालत ने फिलहाल NDTV की रिपोर्टिंग पर कोई अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया और मामले को 18 जुलाई 2026 के लिए सूचीबद्ध किया है।

अनिल अंबानी की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि NDTV ने रिलायंस ADA ग्रुप की कंपनियों के खिलाफ CBI और ED की जांच से जुड़े मामलों में लगातार 72 “डिफेमेटरी” (मानहानिकारक) खबरें प्रकाशित कीं। याचिका में दावा किया गया कि इन रिपोर्टों में गलत तथ्यों का इस्तेमाल कर अंबानी और उनकी कंपनियों की छवि को जानबूझकर धूमिल किया गया। अंबानी के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि NDTV के मेजॉरिटी शेयरहोल्डर अडानी ग्रुप उनकी कंपनियों पर कब्जा करने की “शिकारी रणनीति” (predatory strategies) अपना रहा है और मीडिया रिपोर्टिंग इसका हिस्सा है।

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह मामला अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा है, इसलिए मीडिया पक्ष को सुनवाई का मौका दिए बिना कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया जा सकता। अदालत ने NDTV से अंतरिम रोक याचिका पर जवाब मांगा है।

पृष्ठभूमि

अंबानी समूह की कंपनियों, खासकर रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) पर पिछले वर्षों में भारी कर्ज (लगभग 47,000 करोड़ रुपये बताए जाते हैं) के मामले सामने आए थे। CBI और ED ने बैंक धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग आदि आरोपों में जांच की है, जिसमें अंबानी और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़ी संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया। NDTV की रिपोर्ट्स इन्हीं घटनाक्रमों पर आधारित थीं। अंबानी की याचिका में NDTV के अलावा IANS, राहुल कंवल, मनोरंजन भारती, तमन्ना इनामदार, नाजिम खान, आशीष मांचंदा और अन्य रिपोर्टर्स/एडिटर्स को भी प्रतिवादी बनाया गया है। अंबानी पक्ष ने 2 करोड़ रुपये से अधिक मुआवजे की मांग की है, जिसे वे चैरिटी में दान करने की बात कही है।

मीडिया स्वतंत्रता पर जोर

NDTV पक्ष ने अभी औपचारिक जवाब नहीं दिया है, लेकिन मीडिया हलकों में इस मामले को प्रेस की स्वतंत्रता और कॉरपोरेट प्रतिद्वंद्विता के बीच टकराव के रूप में देखा जा रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले भी ऐसे मामलों में सतर्क रुख अपनाते हुए कहा है कि “न्यूज” और “व्यूज” को अलग-अलग देखना चाहिए और बिना पूरी सुनवाई के मीडिया पर पाबंदी नहीं लगाई जा सकती। यह मामला उद्योग जगत की दो प्रमुख ताकतों — अंबानी और अडानी — के बीच चल रही कथित प्रतिस्पर्धा को भी उजागर करता है। अनिल अंबानी ने कोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा कि अडानी ग्रुप उनकी कंपनियों में दिलचस्पी रखता है और NDTV के माध्यम से नकारात्मक प्रचार किया जा रहा है।

अगली सुनवाई 18 जुलाई 2026 को होगी, जब NDTV अपना लिखित जवाब दाखिल करेगा। तब तक दोनों पक्षों को इस विवाद पर संयम बरतने की सलाह दी गई है। यह विकास मीडिया जगत, कारोबार और कानूनी क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि इसमें बड़े कॉरपोरेट हित और पत्रकारिता की जिम्मेदारी दोनों शामिल हैं।

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