आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका: अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) को आज भारी झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऐलान किया कि वे AAP छोड़ रहे हैं और भाजपा में शामिल हो रहे हैं। उनके साथ सांसद संदीप पाठक और अशोक मित्तल भी मौजूद थे। चड्ढा ने दावा किया कि AAP की कुल 10 राज्यसभा सीटों में से सात (दो-तिहाई से अधिक) सांसद संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए भाजपा के साथ मर्ज हो रहे हैं।
इस मर्जर में शामिल सात सांसदों के नाम इस प्रकार हैं: राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह (पूर्व क्रिकेटर), राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी। तीनों नेताओं (चड्ढा, पाठक और मित्तल) ने आज दिल्ली में भाजपा प्रमुख नितिन गडकरी की उपस्थिति में भाजपा में औपचारिक रूप से शामिल होने की घोषणा की। चड्ढा ने कहा, “हमने फैसला किया है कि हम, AAP के राज्यसभा में दो-तिहाई सदस्य, भारतीय संविधान के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए खुद को भाजपा के साथ मर्ज कर रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने आज सुबह राज्यसभा चेयरमैन को हस्ताक्षरित पत्र और दस्तावेज सौंप दिए हैं।
पृष्ठभूमि: अशोक मित्तल ने ही बदला था चड्ढा का पद
विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि अशोक मित्तल ने मात्र 22 दिन पहले राघव चड्ढा को राज्यसभा में AAP के डिप्टी लीडर के पद से हटाकर खुद यह जिम्मेदारी संभाली थी। चड्ढा को हाल ही में पार्टी की आंतरिक रिशफलिंग में यह पद गंवाना पड़ा था, जिसके बाद से उनकी नाराजगी की खबरें आ रही थीं। मित्तल लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के संस्थापक हैं और हाल ही में उन पर ED की छापेमारी भी हुई थी।
राघव चड्ढा ने AAP पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों, मूल्यों और नैतिकता से भटक गई है। उन्होंने कहा, “यह पार्टी अब देश के हित में नहीं, बल्कि व्यक्तिगत फायदे के लिए काम कर रही है। पिछले कई सालों से मुझे लग रहा था कि मैं सही जगह पर गलत पार्टी में हूं।” चड्ढा ने 15 साल AAP को समर्पित करने का जिक्र करते हुए भावुक भी हुए।
AAP का तीखा पलटवार: ‘ऑपरेशन लोटस’ और ED-CBI का आरोप
AAP ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसे भाजपा का “ऑपरेशन लोटस” बताया और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ED और CBI का दुरुपयोग कर AAP सांसदों को तोड़ रही है। सिंह ने कहा, “राघव चड्ढा को हमने सब कुछ दिया—MLA, MP बनाया—लेकिन वे भाजपा की गोद में जा बैठे। पंजाब की जनता इन सातों को कभी माफ नहीं करेगी। यह पंजाब में भगवंत मान सरकार के अच्छे कामों को रोकने की साजिश है।” AAP ने मित्तल पर हालिया ED छापे को भी इस घटना से जोड़ा।
राजनीतिक प्रभाव
यह घटनाक्रम AAP के लिए बड़ा झटका है, खासकर पंजाब में जहां पार्टी सत्ता में है। AAP के पास राज्यसभा में अब मात्र तीन सांसद बचेंगे (सात में से अगर मर्जर लागू होता है तो)। एंटी-डिफेक्शन कानून के तहत दो-तिहाई बहुमत के साथ मर्जर होने पर अयोग्यता से बचाव संभव है। भाजपा की ओर से अभी औपचारिक प्रतिक्रिया आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह कदम पंजाब की 2027 विधानसभा चुनावों से पहले AAP को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। यह विकास AAP में लंबे समय से चल रही आंतरिक कलह को सार्वजनिक रूप देता है और विपक्षी एकता पर सवाल खड़े करता है। आगे की स्थिति पर नजर बनी हुई है—क्या अन्य AAP नेता भी इस लहर में शामिल होंगे?

