अखिलेश यादव और बाबा बागेश्वर के बीच बढ़ा विवाद, पुराने वीडियो के जरिए धीरेंद्र शास्त्री पर साधा निशाना

UP News:

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर बयानबाजी तेज होती नजर आ रही है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का करीब तीन साल पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर उन्हें घेरा है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि वीडियो में भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है। उन्होंने इस मामले में कार्रवाई की मांग भी उठाई है।

अखिलेश यादव के इस कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर उन्होंने बाबा बागेश्वर के खिलाफ अचानक मोर्चा क्यों खोला? क्या यह केवल धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला है या इसके पीछे उत्तर प्रदेश की आगामी चुनावी राजनीति भी एक बड़ी वजह है?

यूपी में बाबा बागेश्वर के कथा कार्यक्रम से बढ़ी राजनीतिक हलचल?

आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथाओं और धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। उनकी लोकप्रियता उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में देखी जा रही है। उत्तर प्रदेश में भी उनके प्रस्तावित कथा कार्यक्रमों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं।

राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से देखें तो धार्मिक आयोजनों में उमड़ने वाली भीड़ और उनका सामाजिक प्रभाव राजनीतिक दलों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है। यही वजह है कि अखिलेश यादव द्वारा पुराने वीडियो को लेकर उठाए गए सवालों को 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

धीरेंद्र शास्त्री को BJP से जोड़कर क्यों देख रहे हैं अखिलेश?

अखिलेश यादव की ओर से धीरेंद्र शास्त्री को लेकर की गई टिप्पणी के पीछे राजनीतिक संदेश भी तलाशा जा रहा है। सपा प्रमुख लगातार भाजपा की राजनीति और धार्मिक मुद्दों को लेकर अपनी बात रखते रहे हैं। ऐसे में बाबा बागेश्वर पर निशाना साधने को भाजपा के राजनीतिक प्रभाव और धार्मिक आयोजनों के जरिए बनने वाले जनसमर्थन के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

हालांकि, धीरेंद्र शास्त्री के भाजपा से आधिकारिक रूप से जुड़े होने का दावा करने के लिए अलग से प्रमाण जरूरी है। किसी धार्मिक कार्यक्रम में उमड़ने वाली भीड़ को किसी राजनीतिक दल का समर्थक मान लेना भी उचित नहीं होगा।

बिहार से यूपी तक धार्मिक आयोजनों की राजनीति

बिहार में भी धीरेंद्र शास्त्री की कथाओं को लेकर पहले राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली थी। उनके धार्मिक कार्यक्रमों और उनमें जुटने वाली भीड़ ने राजनीतिक बहस को जन्म दिया था। अब उत्तर प्रदेश में भी उनके कार्यक्रमों और लोकप्रियता को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो रही हैं।

उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही भाजपा और विपक्षी दलों के बीच हर उस मुद्दे पर राजनीतिक मुकाबला दिखाई दे सकता है, जिसका जनमानस पर प्रभाव पड़ता है। ऐसे में अखिलेश यादव द्वारा तीन साल पुराने वीडियो को सामने लाना महज एक बयान नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति के नजरिए से भी चर्चा का विषय बन गया है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या पुराने वीडियो को लेकर उठे विवाद का असर धीरेंद्र शास्त्री के प्रस्तावित धार्मिक कार्यक्रमों पर पड़ेगा या यह मुद्दा 2027 के विधानसभा चुनाव तक राजनीतिक बहस का हिस्सा बना रहेगा?

 

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