नोएडा। लोक आस्था के महापर्व छठ की तैयारियां शहर में तेज हो गई हैं। सेक्टर-75 के सेंट्रल पार्क में श्री सूर्यदेव पूजा समिति नोएडा की ओर से छठ घाट का निर्माण कार्य जोरों पर है। समिति के अनुसार घाट दीपावली से पहले पूरी तरह तैयार हो जाएगा। अखिल भारतीय प्रवासी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और श्री सूर्यदेव पूजा समिति नोएडा के अध्यक्ष डॉ. मुन्ना कुमार शर्मा ने देशवासियों को छठ की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि छठ भारतीय संस्कृति, आस्था, प्रकृति प्रेम और सामाजिक एकता का अनुपम प्रतीक है। यह भगवान सूर्य और छठी मैया की उपासना का विश्वविख्यात पर्व है, जो प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, पर्यावरण की रक्षा, स्वच्छता और भाईचारे की प्रेरणा देता है।
एएमजी डेवलपर्स के सहयोग से बन रहा घाट
समिति के अनुसार सेक्टर-75 के सेंट्रल पार्क में एएमजी डेवलपर्स के सहयोग से छठ घाट का निर्माण हो रहा है। समिति के अध्यक्ष डॉ. मुन्ना कुमार शर्मा, संयोजक ओपी तिवारी और महासचिव राजीव त्यागी ने सहयोग के लिए एएमजी के निदेशक मनोज राय, अमित कुमार, जीएम बसंत उपाध्याय और सुनील मैनी का आभार जताया।
साल में दो बार मनाया जाता है छठ
डॉ. शर्मा ने बताया कि सूर्य षष्ठी व्रत होने के कारण इसे छठ कहा जाता है। यह पर्व साल में दो बार मनाया जाता है। चैत्र मास में चैती छठ और कार्तिक मास में कार्तिकी छठ। पारिवारिक सुख-समृद्धि, पति और संतान की रक्षा, दीर्घायु और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए महिलाएं और पुरुष समान रूप से यह व्रत करते हैं।
पौराणिक मान्यताएं
छठ को लेकर कई पौराणिक और लोककथाएं प्रचलित हैं। एक मान्यता के अनुसार, जब पांडव जुए में अपना राजपाट हार गए थे, तब द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण के सुझाव पर छठ व्रत किया। इससे उनकी मनोकामनाएं पूरी हुईं और पांडवों को राजपाट वापस मिला। लोक परंपरा में भगवान सूर्य और छठी मैया को भाई-बहन माना जाता है। यह भी मान्यता है कि लोकमातृका षष्ठी की पहली पूजा भगवान सूर्य ने की थी।
प्रकृति पूजन का पर्व
डॉ. शर्मा ने कहा कि इस पर्व में सूर्य, जल, वायु और पृथ्वी सहित प्रकृति के विभिन्न तत्वों की उपासना होती है। व्रती नदी, तालाब और अन्य जलाशयों के किनारे अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इस दौरान स्वच्छता, पवित्रता, अनुशासन और संयम का विशेष ध्यान रखा जाता है। छठ से जुड़ी वैज्ञानिक व्याख्याओं को लेकर अलग-अलग विचार हैं, लेकिन इसका पर्यावरणीय और सामाजिक महत्व साफ दिखाई देता है। लोग सामूहिक रूप से घाटों, जलाशयों और सड़कों की सफाई करते हैं, जिससे स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ती है।
चार दिनों तक चलता है महापर्व
पहला दिन (नहाय-खाय): व्रती स्नान कर पवित्रता के साथ व्रत का संकल्प लेते हैं। वे सेंधा नमक, अरवा चावल, चना दाल और कद्दू की सब्जी ग्रहण करते हैं।
दूसरा दिन (खरना/लोहंडा): व्रती दिनभर उपवास रखते हैं और शाम को गुड़ की खीर व अन्य प्रसाद से पूजा करते हैं। प्रसाद ग्रहण करने के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।
तीसरा दिन: नदी, तालाब या अन्य जलाशय में खड़े होकर अस्ताचलगामी सूर्य को जल और दूध से अर्घ्य दिया जाता है।
चौथा दिन: सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रती पारण करते हैं और पर्व का विधिवत समापन होता है।
पूजा में लहसुन और प्याज वर्जित माने जाते हैं। पारंपरिक छठ गीत माहौल को भक्तिमय बना देते हैं।
सामाजिक समरसता की मिसाल
डॉ. शर्मा ने कहा कि छठ जाति, वर्ग, भाषा और आर्थिक स्थिति के भेदभाव से ऊपर उठकर सबको एक साथ जोड़ता है। घाटों की सफाई, पूजा की तैयारी और प्रसाद वितरण में समाज के सभी वर्ग मिलकर सहयोग करते हैं। अर्घ्य के समय दूध, फल और पूजन सामग्री का वितरण सेवा और परोपकार की भावना को मजबूत करता है।
श्रद्धालुओं से अपील
डॉ. शर्मा ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे जलाशयों और नदियों को स्वच्छ रखें, प्लास्टिक और प्रतिबंधित सामग्री का उपयोग न करें और जल को प्रदूषित न करें। उन्होंने कहा कि छठ की सच्ची भावना तभी सार्थक होगी, जब धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प भी लिया जाए।
देश-विदेश में बढ़ रही लोकप्रियता
डॉ. शर्मा के अनुसार छठ बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रमुख लोकपर्व है। अब इसे देश के लगभग सभी राज्यों और विदेशों में बसे भारतीय समुदाय भी श्रद्धा और उत्साह से मनाते हैं।
नोएडा के इन क्षेत्रों में मनाया जाता है छठ
नोएडा में छठ महापर्व धूमधाम से मनाया जाता है। सेक्टर-4, 5, 8, 9, 10, 11, 12, 15, 16, 19, 20, 31, 34, 37, 45, 49, 52, 61, 62, 66, 70, 71, 73, 75, 76, 77, 78, 82, 93, 99, 100, 105, 110 और 122 में श्रद्धालु पर्व मनाते हैं। इसके अलावा भंगेल, सलारपुर, सदरपुर, छलेरा, बरौला, गिझौर, होशियारपुर, गढ़ी चौखंडी, छिजारसी, मामूरा, सरफाबाद, सोरखा, चौड़ा, नवादा और नोएडा के अधिकांश गांवों व सेक्टरों में भी यह पर्व मनाया जाता है। डॉ. शर्मा ने सभी देशवासियों से छठ को श्रद्धा, पवित्रता, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की भावना से मनाने का आह्वान किया। उन्होंने भगवान सूर्य और छठी मैया से सबके सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।
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