रोम/पेरिस/बर्लिन, यूरोप के कई देशों में महंगाई, कम वेतन, शिक्षा व्यवस्था की खराब स्थिति और बढ़ते सैन्य खर्च के खिलाफ युवाओं तथा मजदूरों का आक्रोश चरम पर है। शुक्रवार को इटली में राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल के दौरान बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जबकि शनिवार (हैलोवीन) को फ्रांस और जर्मनी में भी बड़े रैलियों की तैयारी है।
इटली: लाखों सड़कों पर, ज्यादातर शांतिपूर्ण
इटली में यूनियन सिंडिकेल डि बेस (USB) के आह्वान पर 24 घंटे की आम हड़ताल हुई। रोम, मिलान, नेपल्स, ट्यूरिन सहित 40 से अधिक शहरों में छात्रों और मजदूरों ने प्रदर्शन किया। आयोजकों के अनुसार 10 लाख से 15 लाख लोग शामिल हुए, जबकि कुछ अनुमान 1 लाख से अधिक बताते हैं। प्रदर्शनकारियों ने महंगाई (अक्टूबर में मुद्रास्फीति 5.4 प्रतिशत), कम वेतन, स्कूल-यूनिवर्सिटी में बेहतर निवेश और सैन्य खर्च में कटौती की मांग की। रोम में कोलोसियम के पास बड़े मार्च हुए, मिलान में रिंग रोड पर प्रदर्शन हुआ और जेनोआ बंदरगाह पर भी बड़ी संख्या में लोग जुटे। कुछ जगहों पर (जैसे ट्यूरिन में) पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया, लेकिन कुल मिलाकर प्रदर्शन पिछले हफ्तों की हिंसा की तुलना में शांतिपूर्ण रहे।
फ्रांस: सरकार का सख्त रुख, 70,000 सुरक्षा बल
फ्रांस में यह तीसरा सप्ताह है जब महंगाई, सार्वजनिक सेवाओं और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार के खिलाफ बड़े प्रदर्शन हो रहे हैं। शनिवार को हैलोवीन के दिन नए प्रदर्शनों की आशंका के बीच आंतरिक मंत्री लॉरां नुनेज ने कहा कि “बहुत अधिक जोखिम” है। सरकार ने 70,000 पुलिस और जेंडरमरी तैनात की है। दो हफ्ते पहले हुए दंगों और लूटपाट के बाद सरकार सख्त रुख अपना रही है। दंगाइयों पर नुकसान की भरपाई के लिए 10,000 यूरो तक का जुर्माना लगाने वाला विवादित कानून भी आगे बढ़ाया जा रहा है। पिछले सप्ताहों में पेरिस, मार्सेय और अन्य शहरों में हिंसा हुई थी।
जर्मनी: Gen Z आंदोलन, 1.6 लाख से अधिक की उम्मीद
जर्मनी में युवा संगठन “Gen Z regelt” (Gen Z नियंत्रण लेता है) के आह्वान पर 34 शहरों में प्रदर्शन होने वाले हैं। आयोजकों के अनुसार 1.6 लाख से अधिक लोग पंजीकृत हो चुके हैं। बर्लिन, फ्रैंकफर्ट, म्यूनिख, कोलोन सहित बड़े शहरों में रैलियां होंगी। युवा शिक्षा में ज्यादा निवेश, रहने की लागत में कमी, जलवायु संरक्षण और अनिवार्य सैन्य सेवा के विरोध में सड़कों पर उतर रहे हैं। आयोजकों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर जोर दिया है, लेकिन अधिकारियों ने चरमपंथी तत्वों के शामिल होने की चेतावनी दी है। कई दुकानों ने पहले से ही खिड़कियां बोर्ड से बंद कर ली हैं। यह आंदोलन फ्रांस, स्पेन और इटली में पिछले कुछ हफ्तों से चल रहे युवा और मजदूर प्रदर्शनों से प्रेरित है। यूरोप में महंगाई और सरकारी नीतियों के खिलाफ आक्रोश फैल रहा है।
यह भी पढ़ें: उमर अब्दुल्ला ने पत्रकार निधि राजदान से रचाई शादी

