नई दिल्ली। गांधी जयंती के दिन राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का माहौल गरमाया हुआ है। मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं, बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम कटने और चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाते हुए छात्र संगठन, विपक्षी दल और सामाजिक कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन की तैयारी में हैं। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है और नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है।
प्रदर्शन का आह्वान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए), राज्यसभा सांसद मनोज झा और सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने किया है। इसमें आम आदमी पार्टी (आप), नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई), इंडियन यूथ कांग्रेस (आईवाईसी), एसएफआई और डीवाईएफआई समेत कई छात्र संगठनों और विपक्षी नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। पुलिस सूत्रों के अनुसार करीब 3,000 से 4,000 लोगों के जुटने की संभावना जताई जा रही है।
मेट्रो और परिवहन पर असर
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने सुरक्षा कारणों से 11 प्रमुख स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद कर दिया है। ये स्टेशन हैं—जनपथ, पटेल चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, राजीव चौक, सेवा तीर्थ, मंडी हाउस, लोक कल्याण मार्ग, आईएनए, चावड़ी बाजार, रामकृष्ण आश्रम मार्ग और नई दिल्ली। राजीव चौक, मंडी हाउस, नई दिल्ली और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट पर इंटरचेंज की सुविधा जारी रहेगी। इससे केंद्रीय दिल्ली में आने-जाने वाले यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है। यातायात पुलिस ने कनॉट प्लेस, पटेल चौक, जनपथ, संसद मार्ग और जंतर-मंतर के आसपास डायवर्जन और प्रतिबंध लगाए हैं। सड़कों पर बहुस्तरीय बैरिकेडिंग की गई है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
जंतर-मंतर और आसपास के इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ), रैपिड एक्शन फोर्स (आरएफ) और दंगा नियंत्रण वाहन तैनात किए गए हैं। डीसीपी सचिन शर्मा ने कहा कि जंतर-मंतर पर किसी भी तरह के प्रदर्शन या मार्च की अनुमति नहीं दी गई है। धारा 163 के तहत पांच या उससे अधिक लोगों के बिना अनुमति जमा होने पर रोक है।
सुबह से ही इलाके में पुलिस की मौजूदगी बढ़ गई। कुछ रिपोर्ट्स में आप नेता सौरभ भारद्वाज समेत कुछ लोगों को जंतर-मंतर के पास से हटाए जाने या डिटेन किए जाने की खबर आई है। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए टॉल्स्टॉय मार्ग, जनपथ और संसद मार्ग पर बैरिकेड लगाए गए हैं।
छात्रों से लेकर नेताओं तक
छात्र संगठनों के कार्यकर्ता और युवा बड़ी संख्या में जुटने की कोशिश कर रहे हैं। एआईएसए की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, प्रशांत भूषण और मनोज झा प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। आप के नेता अतिशी, संजय सिंह और मनीष सिसोदिया ने भी लोगों से जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की है। इंडिया गठबंधन ने 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में ‘सेव डेमोक्रेसी’ अभियान शुरू किया है, जिसमें जिलों में मार्च और डीएम कार्यालयों के सामने प्रदर्शन शामिल हैं। 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसद चुनाव आयोग तक मार्च निकालने वाले हैं।
मुंबई में सीजेपी का जेल भरो आंदोलन
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) मुख्य रूप से मुंबई में सक्रिय है। संस्थापक अभिजीत दीपके ने शिवाजी पार्क पर प्रदर्शन की अनुमति न मिलने पर ‘जेल भरो आंदोलन’ का एलान किया है। सीजेपी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा, एसआईआर पर रोक और जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने की मांग कर रही है। गुरुवार को मरीन ड्राइव पर प्लेकार्ड लेकर पहुंचे दीपके को पुलिस ने कुछ देर के लिए थाने ले जाया था, जिसके बाद छोड़ दिया गया। सीजेपी ने देश के अन्य राज्यों में भी विरोध का ऐलान किया है।
पृष्ठभूमि
यह विरोध इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के बाद तेज हुआ है, जिसमें चुनाव आयुक्तों द्वारा एसआईआर संबंधी फैसलों पर आपत्ति दर्ज कराने का जिक्र था। विपक्ष इसे ‘वोट चोरी’ बता रहा है, जबकि चुनाव आयोग ने कहा है कि फैसलें सर्वसम्मति से लिए गए। सीजेपी जुलाई में नीट पेपर लीक के मुद्दे पर जंतर-मंतर पर लंबे धरने के लिए जानी जाती है, जिसने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का रास्ता खोला था।
अभी सुबह के घंटों में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अनुमति न मिलने के बावजूद वे लोकतांत्रिक अधिकार के तहत आवाज उठाएंगे। पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर अड़ी हुई है। आगे की घटनाओं पर नजर बनी हुई है।
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