बॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय थ्रिलर फ्रैंचाइज में से एक का आखिरी अध्याय आज सिनेमाघरों में पहुंच गया। अभिषेक पाठक निर्देशित दृश्यम द कंक्लूजन (जिसे दृश्यम 3 भी कहा जा रहा है) ने अजय देवगन को एक बार फिर विजय सलगांवकर के रूप में पेश किया है। फिल्म 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर रिलीज हुई है और इसमें जयदीप अहलावत, तब्बू, श्रिया सरन, प्रकाश राज और रजत कपूर जैसे कलाकार शामिल हैं।
कहानी दृश्यम 2 के घटनाक्रम के छह महीने बाद शुरू होती है। विजय सलगांवकर और उनका परिवार सामान्य जीवन जीने की कोशिश कर रहा होता है, लेकिन अतीत फिर से सामने आ जाता है। क्राइम ब्रांच के एसपी राजवीर सिंह तोमर (जयदीप अहलावत) नए सबूतों के साथ केस दोबारा खोलते हैं। तब्बू की मीरा देशमुख और रजत कपूर का किरदार बदला लेने की भावना से भरा दिखता है, जबकि प्रकाश राज पब्लिक प्रॉसिक्यूटर इंद्रजीत शेट्टी के रूप में कोर्ट रूम में दमदार उपस्थिति दर्ज कराते हैं।
फिल्म की खास बात यह है कि यह मलयालम दृश्यम 3 का रीमेक नहीं है। निर्देशक अभिषेक पाठक ने पूरी तरह मूल हिंदी पटकथा लिखी है (सह-लेखक आamil कीयन खान और परवीज शेख)। रनटाइम करीब 150 मिनट है।
आलोचकों की प्रतिक्रिया
ज्यादातर समीक्षाएं मिश्रित से सकारात्मक हैं। इंडिया टुडे की समीक्षा में कहा गया है कि फिल्म चतुराई भरी ट्विस्ट्स से भरी है, दर्शकों को ज्यादातर समय बांधे रखती है और विजय के सिस्टम को मैनिपुलेट करने की क्षमता अभी भी आकर्षक लगती है। लेकिन फ्रैंचाइज के फाइनल चैप्टर के रूप में वह ऊंचाई नहीं छू पाती जिसकी उम्मीद थी। कोर्ट रूम सीक्वेंस, जो सबसे विस्फोटक होना चाहिए था, अपेक्षाकृत निराशाजनक रहा। अंत में दर्शक सोचते रह जाते हैं—‘‘इतना ही?’’
अन्य समीक्षाओं में भी यही स्वर सुनाई दिया। कुछ ने इसे 3 से 3.5 स्टार दिया, तो तारन आदर्श जैसी आवाजों ने 4.5 स्टार देकर इसे फ्रैंचाइज की अब तक की सबसे अच्छी फिल्म बताया। परफॉर्मेंस लगभग सभी जगह सराही गई—अजय देवगन का शांत लेकिन तीव्र अंदाज, जयदीप अहलावत का स्टाइलिश और मेनसिंग प्रेजेंस, प्रकाश राज के डायलॉग्स और तब्बू की भावनात्मक गहराई।
फिल्म में ह्यूमर के पल भी हैं (खासकर इंस्पेक्टर गायतोंडे के सीन्स) और कुछ स्मार्ट नैरेटिव डिवाइस (जैसे धर्म का इस्तेमाल ध्यान भटकाने के लिए) मौजूद हैं। लेकिन कई जगह डायलॉगबाजी ज्यादा हो गई है और कुछ घटनाक्रम सुविधाजनक लगते हैं।
बॉक्स ऑफिस पर मजबूत शुरुआत
रिलीज के दिन ही फिल्म ने एडवांस बुकिंग में जबरदस्त प्रतिक्रिया पाई। रिपोर्ट्स के अनुसार डे-1 के लिए लाखों टिकट बिक चुके थे और ओपनिंग मजबूत रहने का अनुमान है। फ्रैंचाइज के फैनबेस और अजय देवगन की पुल के कारण यह उनके करियर का बड़ा ओपनर साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर दृश्यम द कंक्लूजन एक अच्छा, मनोरंजक और स्मार्ट थ्रिलर है। जो दर्शक फ्रैंचाइज से जुड़े हैं, वे विजय सलगांवकर का आखिरी दांव देखने जरूर जाएं। लेकिन जो लोग ‘‘वॉव, क्या एंडिंग है!’’ वाला पल ढूंढ रहे थे, उन्हें थोड़ी निराशा हो सकती है। यह विदाई अच्छी है—लेकिन शानदार नहीं।

