‘जय भवानी, जय शिवाजी’, शुरू हुआ विश्व के सबसे बड़े महानाट्य ‘जाणता राजा’ का भव्य मंचन

गाजियाबाद, दिल्ली-एनसीआर की धरती छत्रपति शिवाजी महाराज के जयघोष से सराबोर हो गई। गाजियाबाद के सनसिटी (एनएच-24) में गुरुवार को विश्व के सबसे बड़े ऐतिहासिक महानाट्य ‘जाणता राजा’ का भव्य मंचन धूमधाम से शुरू हो हुआ। महाराष्ट्र से आए कलाकारों ने जैसे ही ‘जय जय जय भवानी, जय शिवाजी’ का उद्घोष किया, विशाल प्रांगण असीमित ऊर्जा और उत्साह से सराबोर हो उठा।

कार्यक्रम की शुरुआत मराठी में गणपति आराधना ‘जयदेव, जयदेव जय मंगूर्ति’ से हुई। महानाट्य में हाथी, घोड़े और कलाकारों के जोरदार अभिनय ने दर्शकों के बीच 17वीं सदी का माहौल जीवंत कर दिया। मां तुलजा भवानी की आराधना में जब शिवाजी महाराज की माता जीजाबाई ने मुगल साम्राज्य से मुक्ति की प्रार्थना की तो पूरा परिसर भावुक हो गया। समर्थ गुरु रामदास, मां तुलजाभवानी, जीजाबाई और छत्रपति शिवाजी महाराज के जयकारे पूरे स्थल पर गूंज रहे थे। उद्घाटन समारोह में अग्नि अखाड़े के सचिव आचार्य सुमेश्वरानंद जी महाराज, पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्रा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल जी मौजूद रहे।

उद्घाटन सत्र में रामलाल जी ने कहा कि भारत सदैव विश्व की आध्यात्मिक-सांस्कृतिक परंपरा का ध्वजवाहक रहा है। सनातन संस्कृति समावेशी और सेवाभावी है। दिव्य प्रेम सेवा मिशन इसी संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने मिशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गौतम की सराहना करते हुए कहा कि सेवा भावना को हृदय में जगाकर युवा पीढ़ी को सही रास्ता दिखाने का काम किया जा रहा है। पूर्व राज्यपाल डॉ. कलराज मिश्रा ने कहा कि मातृभूमि की भावना जगाने के उद्देश्य से दिल्ली-एनसीआर में हो रहे इस कार्यक्रम के लिए दिव्य प्रेम सेवा मिशन और डॉ. आशीष गौतम बधाई के पात्र हैं।

दिव्य प्रेम सेवा मिशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गौतम ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्शों को जन-जन, खासकर युवा पीढ़ी तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है। आज दुनिया में विषाक्त वातावरण में शिवाजी महाराज का जीवन और उनके संस्कार युवाओं को सही दिशा दे सकते हैं। उन्होंने सभी से अपील की कि अपने बच्चों को शिवाजी महाराज, मां जीजाबाई और समर्थ गुरु रामदास के बताए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करें।

सात दिन चलेगा भव्य आयोजन

यह महानाट्य 22 से 28 अक्टूबर तक रोज शाम 4:30 बजे से करीब चार घंटे चलेगा। इसमें लगभग 250 कलाकार भाग ले रहे हैं। मंच पर वास्तविक हाथी, घोड़े, ऊंट, तोपें, तलवारें और पारंपरिक शस्त्रों के साथ सिंहगढ़, प्रतापगढ़ और रायगढ़ किलों की प्रतिकृतियां भी तैयार की गई हैं। आयोजकों के अनुसार प्रतिदिन दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड से करीब 15 हजार दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है।

कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत कई राज्यों के राज्यपाल, सांसद और विधायक भी पहुंचने वाले हैं। उद्घाटन दिन हजारों युवक-युवतियां, स्कूली बच्चे और प्रबुद्ध नागरिक मौजूद रहे। वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया सपरिवार कार्यक्रम देखने पहुंचे। स्थानीय स्तर पर भाजपा महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल, भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर, दिव्य प्रेम सेवा मिशन के राष्ट्रीय संयोजक संजय चतुर्वेदी समेत समाज के कई प्रतिष्ठित लोग उपस्थित रहे।

दिव्य प्रेम सेवा मिशन, हरिद्वार इस आयोजन के माध्यम से राष्ट्रचेतना और सांस्कृतिक गौरव जगाने का प्रयास कर रहा है। इससे पहले मिशन लखनऊ और आगरा में भी इस महानाट्य का सफल आयोजन कर चुका है। गाजियाबाद को चुनने के पीछे ऐतिहासिक वजह भी बताई गई है—छत्रपति शिवाजी महाराज औरंगजेब की कैद से मुक्त होने के बाद यहां स्थित दूधेश्वर नाथ महादेव मठ पहुंचे थे। ‘जाणता राजा’ सिर्फ एक नाटक नहीं, बल्कि स्वराज्य, साहस और पराक्रम की अमर गाथा है, जो नई पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति और आदर्शों से जोड़ने का माध्यम बन रहा है।

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