ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सबसे व्यस्त चार मूर्ति गोलचक्कर पर रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। चार मूर्ति के पास बन रहा अंडरपास अब लगभग तैयार हो चुका है। अगर निर्माण और जरूरी तकनीकी काम तय समय पर पूरा हुआ तो नवंबर के पहले सप्ताह में अंडरपास को वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया जाएगा। इससे चार मूर्ति चौराहे पर ट्रैफिक दबाव कम होने और आसपास के लाखों वाहन चालकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
दीपावली पर जनता को मिल सकता है बड़ा तोहफा
चार मूर्ति अंडरपास को ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लोगों के लिए दीपावली के आसपास बड़ी सौगात के तौर पर शुरू करने की तैयारी है। निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है और प्राधिकरण के अधिकारी लगातार इसकी प्रगति पर नजर बनाए हुए हैं।
चार मूर्ति चौराहा ग्रेटर नोएडा वेस्ट का प्रमुख ट्रैफिक जंक्शन है। यहां से गौर सिटी, नोएडा एक्सटेंशन, एक मूर्ति, किसान चौक और आसपास की सोसाइटियों की ओर बड़ी संख्या में वाहन आते-जाते हैं। पीक आवर्स में वाहनों का दबाव बढ़ने के कारण यहां जाम की स्थिति बनती रहती है।
कई बार बढ़ चुकी है अंडरपास शुरू होने की समय सीमा
चार मूर्ति अंडरपास परियोजना का काम तय समय के अनुसार पूरा नहीं हो सका। निर्माण में देरी के कारण इसे शुरू करने की समय सीमा तीन से चार बार बढ़ाई जा चुकी है। अब प्राधिकरण की कोशिश है कि किसी भी स्थिति में काम को जल्द पूरा कर नवंबर के पहले सप्ताह तक यातायात शुरू कराया जाए।
अंडरपास शुरू होने के बाद चार मूर्ति चौराहे से गुजरने वाले ट्रैफिक का एक हिस्सा नीचे से निकल सकेगा। इससे मुख्य चौराहे पर वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिलेगी।
प्राधिकरण के अफसर कर रहे लगातार निगरानी
परियोजना में हो रही देरी को देखते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी अब निर्माण कार्य की निगरानी को लेकर ज्यादा सक्रिय हैं। प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि ने परियोजना की प्रगति पर नजर रखने के लिए महाप्रबंधक ए.के. सिंह को मौके पर जाकर निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि निर्माण कार्य में तेजी के साथ-साथ गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाए। अंडरपास शुरू करने से पहले निर्माण से जुड़े जरूरी कार्यों और तकनीकी मानकों की जांच पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
60 करोड़ से शुरू हुआ था प्रोजेक्ट, अब 92 करोड़ पहुंची लागत
चार मूर्ति अंडरपास परियोजना की लागत शुरुआत में करीब 60 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी। लेकिन निर्माण में देरी और परियोजना से जुड़े अतिरिक्त कार्यों के चलते इसकी लागत बढ़कर करीब 92 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
यानी परियोजना की अनुमानित लागत में लगभग 32 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में अब प्राधिकरण के सामने चुनौती सिर्फ अंडरपास को जल्द शुरू करने की नहीं बल्कि इसकी गुणवत्ता और निर्माण मानकों को भी सुनिश्चित करने की है।
जाम से मिलेगी कितनी राहत?
चार मूर्ति पर अंडरपास शुरू होने के बाद उम्मीद है कि मुख्य चौराहे पर वाहनों का दबाव कम होगा। खासतौर पर उन वाहनों को फायदा मिल सकता है जिन्हें चौराहे के सिग्नल पर रुकने की जरूरत नहीं होगी और वे अंडरपास के जरिए आगे निकल सकेंगे।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में लगातार बढ़ती आबादी और नई सोसाइटियों के चलते चार मूर्ति पर ट्रैफिक का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अंडरपास शुरू होने को क्षेत्र की ट्रैफिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अब तारीख पर टिकी लोगों की नजर
अंडरपास के निर्माण में पहले ही कई बार देरी हो चुकी है। ऐसे में अब स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि प्राधिकरण नवंबर के पहले सप्ताह में वास्तव में यातायात शुरू कर पाता है या नहीं। यदि तय समय सीमा में अंडरपास शुरू होता है तो चार मूर्ति और आसपास के क्षेत्रों में रोजाना जाम से जूझने वाले वाहन चालकों को बड़ी राहत मिल सकती है।

