ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी (जीबीयू) के छात्र अक्षत त्रिपाठी को पांच लाख रुपये के मुचलके का नोटिस जारी करने के मामले में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। यह नोटिस कार्यपालक मजिस्ट्रेट की ओर से जारी किया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि अक्षत विश्वविद्यालय के अन्य छात्रों को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसा रहे थे।
एडीसीपी को सौंपी गई जांच
अपर आयुक्त कानून-व्यवस्था राजीव नारायण मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस पूरे मामले की जांच एडीसीपी संतोष कुमार को सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
थाना स्तर से हुई थी शुरुआत
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, थाना ईकोटेक-1 में तैनात उपनिरीक्षक शिवा पांडेय ने छात्र के संबंध में अपनी आख्या तैयार की थी, जिसे थाना प्रभारी की ओर से आगे बढ़ाया गया। इसी आधार पर गौतमबुद्ध नगर के मजिस्ट्रेट तृतीय ने अक्षत को नोटिस जारी किया था।
विवाद बढ़ने पर प्रशासन की सफाई
जैसे ही यह नोटिस सार्वजनिक हुआ, सोशल मीडिया पर पुलिस और जिला प्रशासन की भूमिका को लेकर तीखे सवाल उठने लगे। विवाद बढ़ने पर पुलिस कमिश्नरेट की ओर से स्पष्ट किया गया कि इस पूरी कार्रवाई में जिलाधिकारी की कोई भागीदारी नहीं थी और डीएम ने छात्र के खिलाफ धारा-130 के तहत कोई आदेश जारी नहीं किया था।
नोटिस वापस, अब जांच जारी
विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन ने छात्र को जारी पांच लाख रुपये के मुचलके का नोटिस वापस ले लिया। अब यह जांच की जा रही है कि पुलिस की आख्या में किन तथ्यों के आधार पर छात्र के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई और पूरी प्रक्रिया में कहां-कहां चूक हुई।
सुप्रीम कोर्ट में भी उठे सवाल
अक्षत त्रिपाठी ने ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट के इस नोटिस को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। बुधवार को हुई सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस पर तीखे सवाल उठाए। सीजेआई ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी एफआईआर रद्द कर चुका है और भविष्य में ऐसे मामलों में छात्रों के खिलाफ जबरन कार्रवाई पर रोक लगा चुका है, तो ऐसी स्थिति में कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने यह नोटिस कैसे जारी किया। पीठ ने संबंधित अधिवक्ता से मामले के सभी तथ्य रिकॉर्ड पर रखने और उचित अर्जी दाखिल करने को कहा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस मामले में संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगेगा कि आखिर छात्र को यह नोटिस क्यों जारी किया गया।

