यूपी स्कूल बंद ठेके खुले: दिल्ली-एनसीआर में पिछले दिनों और आज आई तेज अंधी और भारी बारिश ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। मौसम विभाग (IMD) ने 60 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार वाली हवाओं, आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की थी, जिसके चलते कई इलाकों में पानी भर गया और जनजीवन प्रभावित हुआ। इस मौसम के बीच एक अनोखा नजारा देखने को मिला। कई लोग बारिश-आंधी की परवाह न करते हुए शराब के ठेकों की तरफ दौड़ पड़े। ठेकेदारों के चेहरे खिल उठे और उन्होंने इसे “दारू पियेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया” वाले मूड में सेलिब्रेट किया। मौसम का ‘सुनहरा’ मौका शराब कारोबार के लिए वरदान साबित हुआ, जबकि आम जनता पानी-कीचड़ से जूझ रही थी।
यूपी में शिक्षा vs शराब: सरकार की प्राथमिकताएं?
इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी उछला है। विपक्षी दलों के आरोपों के मुताबिक, राज्य सरकार ने हजारों सरकारी स्कूल बंद कर दिए हैं या मर्ज कर दिए हैं, जबकि शराब ठेकों की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई नेताओं ने दावा किया है कि 26,000 से ज्यादा प्राथमिक स्कूल बंद हुए, जबकि 27,000 से अधिक शराब दुकानें खोल दिए गए है। सरकार की तरफ से इसे छुट्टियों या अन्य प्रशासनिक कारणों से जोड़ा जा रहा है, लेकिन विपक्ष इसे शिक्षा की उपेक्षा और शराब राजस्व पर फोकस बताते हुए हमला बोल रहा है। बारिश के मौसम में स्कूल बंद होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं ठेके सामान्य रूप से खुले रहे।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा में तबाही: दीवारें गिरीं, जान-माल को खतरा
बारिश और अंधी का सबसे बुरा असर नोएडा और ग्रेटर नोएडा पर पड़ा। हाल ही में नोएडा के सेक्टर-12 में नोएडा प्राधिकरण के प्लॉट की 10 फीट ऊंची दीवार अचानक गिर गई, जिससे कई पार्क की गई कारें मलबे में दब गईं। इलाके में अफरा-तफरी मच गई, हालांकि इस घटना में किसी की जान नहीं गई। सेक्टर-73 सर्फाबाद में भी भारी बारिश के बाद सड़क धंस गई, दीवारें गिरीं और अंडर-कंस्ट्रक्शन साइट से सटे बारात घर झुक गए। ग्रेटर नोएडा में भी पिछले दिनों ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जहां निर्माणाधीन दीवारों या छतों के गिरने से बच्चे और मजदूर घायल या हताहत हुए। स्थानीय लोग नोएडा प्राधिकरण पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि कमजोर निर्माण, भ्रष्टाचार और रखरखाव की अनदेखी के कारण हर बारिश में दीवारें गिरती हैं। प्राधिकरण विकास के नाम पर पैसा कमाने में लगा है, जबकि जन सुरक्षा की अनदेखी हो रही है। कई पुरानी घटनाओं में भी यही पैटर्न दिखा है, जहां ठेकेदारों और प्राधिकरण की मिलीभगत से घटनाएं होती हैं।
प्रशासन की भूमिका और सवाल
मौसम विभाग की चेतावनियों के बावजूद तैयारी नाकाफी रही। नोएडा अथॉरिटी ने कुछ जगहों पर अलर्ट जारी किए, लेकिन दीवारों और निर्माणों की मजबूती सुनिश्चित करने में असफल रहा। विपक्ष और नागरिक संगठन अब जांच की मांग कर रहे हैं।
निष्कर्ष:
दिल्ली-NCR और यूपी का यह मौसम न केवल प्राकृतिक आपदा का, बल्कि प्रशासनिक और नीतिगत प्राथमिकताओं का आईना भी बन गया है। जहां एक तरफ मौसम ने लोगों को घरों में कैद किया, वहीं शराब ठेकों पर भीड़ उमड़ी। स्कूलों की बंदी और ठेकों की खुली छूट, साथ ही गिरती दीवारों ने विकास मॉडल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन को अब तत्काल कदम उठाने होंगे – स्कूलों को मजबूत करना, निर्माण गुणवत्ता सुनिश्चित करना और जन सुरक्षा को राजस्व से ऊपर रखना। अन्यथा, ऐसी घटनाएं आम होती जाएंगी।

