गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट पुलिस ने अप्रैल महीने में नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में हुई श्रमिक हिंसा के मामले में बड़ा कदम उठाया है। पुलिस ने मामले में आरोपी बताए गए सत्यम वर्मा और आकृति के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी मेधा रूपम ने दोनों आरोपियों के खिलाफ यूएपीए की धारा 16ए के अंतर्गत कार्रवाई किए जाने की संस्तुति उत्तर प्रदेश सरकार को भेजी है।
Medha Roopam द्वारा भेजी गई संस्तुति पर अब शासन स्तर पर गठित सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की समिति विचार करेगी। समिति की समीक्षा और सिफारिश के बाद ही मामले को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके बाद केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने पर ही पुलिस दोनों आरोपियों के खिलाफ यूएपीए की धाराओं के तहत औपचारिक कार्रवाई कर सकेगी।
पुलिस आरोप पत्र में गंभीर आरोप
कमिश्नरेट पुलिस की ओर से तैयार आरोप पत्र में सत्यम वर्मा और आकृति को कथित रूप से “मजदूर बिगुल दस्ता” का सक्रिय सदस्य बताया गया है। पुलिस का आरोप है कि दोनों ने श्रमिकों को संबोधित करते हुए भड़काऊ भाषण दिए और आंदोलन को हिंसक रूप देने में भूमिका निभाई। आरोप पत्र में हिंसा भड़काने, भीड़ को उकसाने और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने जैसे गंभीर आरोप शामिल किए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा तथा आरोप सिद्ध होने तक दोनों को कानून की नजर में आरोपी माना जाएगा, दोषी नहीं।
अप्रैल में कई औद्योगिक क्षेत्रों में भड़की थी हिंसा
गौरतलब है कि इसी वर्ष 10 अप्रैल से 13 अप्रैल के बीच नोएडा और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में वेतन वृद्धि और अन्य श्रमिक मांगों को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। कई स्थानों पर यह प्रदर्शन हिंसक हो गया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ और आगजनी, फैक्ट्रियों में नुकसान पहुंचाने, सड़कों को जाम करने, पथराव और मारपीट जैसी घटनाएं सामने आई थीं। इन घटनाओं के बाद पुलिस और प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच शुरू की थी।
यूएपीए लगाने की प्रक्रिया क्या है?
Unlawful Activities (Prevention) Act देश की आंतरिक सुरक्षा और गैरकानूनी तथा आतंकी गतिविधियों से जुड़े मामलों में लागू किया जाने वाला कानून है। इसके तहत कार्रवाई के लिए सामान्य आपराधिक मामलों की तुलना में अधिक सख्त प्रक्रिया अपनाई जाती है। किसी व्यक्ति के खिलाफ यूएपीए लगाने से पहले राज्य सरकार की संस्तुति, निर्धारित समिति की समीक्षा और कई मामलों में केंद्र सरकार की मंजूरी आवश्यक होती है। इसी प्रक्रिया के तहत गौतमबुद्ध नगर प्रशासन ने मामले को शासन स्तर पर भेजा है।
समिति और केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी आगे की कार्रवाई
फिलहाल पूरे मामले में अगला कदम शासन स्तर पर गठित सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की समिति की रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। यदि समिति आरोपों को पर्याप्त आधार वाला मानती है और केंद्र सरकार से मंजूरी मिलती है, तो कमिश्नरेट पुलिस सत्यम वर्मा और आकृति के खिलाफ यूएपीए की संबंधित धाराओं में कार्रवाई आगे बढ़ाएगी। इस मामले पर श्रमिक संगठनों, उद्योग जगत और प्रशासनिक हलकों की नजर बनी हुई है, क्योंकि औद्योगिक क्षेत्र में हुई हिंसा और उसके बाद की कानूनी कार्रवाई का असर भविष्य के श्रमिक आंदोलनों और औद्योगिक संबंधों पर भी पड़ सकता है।

