आईफोन 18 प्रो: टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स पर साइबर हमले में एपल की गोपनीय सप्लायर सूची, पुर्जे़ और तस्वीरें लीक

एपल की भारतीय साझेदार कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स पर हुए एक बड़े रैनसमवेयर हमले के बाद आगामी आईफोन 18 प्रो मॉडल से जुड़ी अत्यंत संवेदनशील जानकारी डार्क वेब पर सार्वजनिक हो गई है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, हमलावर गिरोह ने अमेरिकी कंपनी की भारतीय आपूर्तिकर्ता टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स से चुराए गए दस्तावेज़ों में पुर्जों और सप्लायरों की संवेदनशील सूचियों के साथ-साथ आगामी आईफोन 18 प्रो मॉडलों की तस्वीरें भी डार्क वेब पर पोस्ट कर दी हैं।

यह सेंधमारी ऐसे समय हुई है जब एपल इस साल सितंबर में आईफोन 18 प्रो और प्रो मैक्स लॉन्च करने वाला है, और कंपनी पहले ही मेमोरी व स्टोरेज चिप्स की बढ़ती लागत के चलते आईपैड और मैकबुक की कीमतें बढ़ा चुकी है, जबकि विश्लेषकों को आने वाले महीनों में आईफोन की कीमतों में भी बढ़ोतरी की आशंका है।

छह दस्तावेज़ों में सप्लायर-पुर्जा मैपिंग उजागर

रॉयटर्स द्वारा समीक्षा किए गए नए दस्तावेज़ों से पता चलता है कि कम से कम छह फाइलें हैं जो आईफोन 18 प्रो मॉडलों के कई कलपुर्जों को उनकी आपूर्ति करने वाली विशिष्ट कंपनियों से जोड़ती हैं। इनमें मुख्य सर्किट बोर्ड पर लगने वाली चिप, बैटरी और कैमरा से जुड़े पुर्जों का ब्योरा शामिल है — ऐसी जानकारी जिसे एपल अपने सार्वजनिक सप्लायर डेटाबेस में कभी उजागर नहीं करता, क्योंकि यह उसके सबसे गोपनीय व्यापारिक रहस्यों में गिनी जाती है। लीक हुई फाइलों में आईफोन 18 प्रो के सैकड़ों पुर्जों की सूची होने का दावा किया गया है, साथ ही ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहां एपल किसी पुर्जे के लिए कई सप्लायरों पर निर्भर है, तो कहीं केवल चुनिंदा कंपनियों पर। इसके अलावा फाइलों में टाटा प्लांट में जनवरी 2026 के आसपास हुए ड्रॉप टेस्ट (गिराकर मजबूती जांचने) की तस्वीरें भी मिली हैं, जिनमें एक स्लेट-ग्रे रंग का हैंडसेट तीन रियर कैमरों और एपल लोगो के साथ नजर आता है। कई फाइलों पर एपल का “कॉन्फिडेंशियल” वॉटरमार्क और आईफोन 18 प्रो पीढ़ी से मेल खाते आंतरिक कोडनेम भी मौजूद थे।

200,000 फाइलों की बड़ी चोरी, “वर्ल्ड लीक्स” गिरोह जिम्मेदार

यह नया खुलासा उस व्यापक डेटा लीक का हिस्सा है, जिसमें रैनसमवेयर गिरोह “वर्ल्ड लीक्स” ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स से चुराई गईं 2 लाख से अधिक फाइलें डार्क वेब पर डाल दी थीं — कुल मिलाकर करीब 630 गीगाबाइट डेटा। इन फाइलों में पुराने आईफोन मॉडलों के पुर्जों के डिज़ाइन दस्तावेज़, टेस्ला से जुड़े कुछ कागज़ात, और चिपमेकर TSMC तथा क्वालकॉम के दस्तावेज़ भी शामिल बताए गए हैं, जो टाटा के अन्य ग्राहक हैं। गिरोह इससे पहले स्पोर्ट्सवियर कंपनी नाइकी की सेंधमारी की जिम्मेदारी भी ले चुका है। एपल और टाटा, दोनों में से किसी ने भी रॉयटर्स के सवालों का जवाब नहीं दिया। रॉयटर्स ने भी इस डेटा की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है। हालांकि टेक वेबसाइट ऐपलइनसाइडर ने पिछले हफ्ते सबसे पहले रिपोर्ट किया था कि टाटा लीक में आईफोन 18 प्रो से जुड़े दस्तावेज़ भी शामिल हैं।

टाटा-एपल साझेदारी पर असर की आशंका

यह सेंधमारी एपल-टाटा के बीच भरोसे की नींव को हिला सकती है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, जो कलपुर्जों की आपूर्ति के साथ-साथ कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर के तौर पर आईफोन असेंबल भी करती है, चीन से इतर एपल के उत्पादन विविधीकरण की रणनीति की रीढ़ बन चुकी है। शोध फर्म काउंटरपॉइंट के अनुसार, भारत 2026 में दुनिया के 26% आईफोन बनाने की राह पर है, जो चार साल पहले महज 6% था, यह आंकड़ा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का बड़ा केंद्र बनाने की मुहिम के लिए भी अहम है। रिपोर्टों के मुताबिक, टाटा ने घटना के बाद अपने सबसे संवेदनशील सिस्टम तक कर्मचारियों की पहुंच सीमित कर दी है और फॉरेंसिक जांच के लिए बाहरी सुरक्षा विशेषज्ञों की मदद ली है। एपल भी इस मामले की जांच कर रहा है और दीर्घकालिक सुरक्षा उपायों को लेकर टाटा के साथ मिलकर काम कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना न सिर्फ एपल की सप्लाई चेन रणनीति को प्रतिद्वंद्वियों और नकलची कंपनियों के सामने उजागर कर सकती है, बल्कि भारत में बढ़ते वैश्विक विनिर्माण भरोसे पर भी सवाल खड़े कर सकती है।

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