भारतीय सरकार ने मेसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप के नए ‘यूजरनेम’ फीचर पर गंभीर चिंता जताते हुए मेटा को तीन दिनों के अंदर विस्तृत स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। साथ ही, फीचर की आगे की रोलआउट को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, यह कदम ऑनलाइन फ्रॉड, इम्पर्सनेशन (छद्मवेश) और साइबर सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए उठाया गया है। व्हाट्सएप, जो मेटा का हिस्सा है, ने हाल ही में घोषणा की थी कि यूजर्स अब फोन नंबर शेयर किए बिना यूजरनेम के जरिए एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। यह प्राइवेसी को बढ़ावा देने वाला बड़ा बदलाव माना जा रहा है, लेकिन भारत में बढ़ते साइबर फ्रॉड के मद्देनजर सरकार ने इसे जांच के दायरे में ले लिया है।
फीचर क्या है और कैसे काम करेगा?
व्हाट्सएप के मुताबिक, यूजर्स 3 से 35 कैरेक्टर्स का यूजरनेम चुन सकेंगे। यह फीचर चरणबद्ध तरीके से रोलआउट होने वाला था – इस हफ्ते से यूजरनेम रिजर्व करने की सुविधा शुरू हो गई थी, और पूर्ण लॉन्च इस साल बाद में होना था। यूजर्स सेटिंग्स > अकाउंट > यूजरनेम में जाकर अपना पसंदीदा हैंडल रिजर्व कर सकते थे। प्लेटफॉर्म ने इंस्टाग्राम या फेसबुक से मैचिंग यूजरनेम को प्राथमिकता देने की बात कही थी। कंपनी का दावा है कि इससे प्राइवेसी बढ़ेगी, खासकर नए संपर्कों से बात करते समय फोन नंबर छिपाने में मदद मिलेगी। हालांकि, विशेषज्ञों और सरकार का मानना है कि इससे स्कैमर्स सरकारी एजेंसियों, बैंकों या पब्लिक फिगर्स के नाम से छद्मवेश धारण कर आसानी से लोगों को ठग सकते हैं।
सरकार की चिंताएं
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) फीचर के प्राइवेसी, सुरक्षा और संभावित दुरुपयोग के पहलुओं की समीक्षा कर रहा है। अगर कोई अनियमितता पाई गई तो मेटा को नोटिस जारी किया जा सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को नए फीचर्स में फ्रॉड के लिए कोई लूपहोल नहीं छोड़ना चाहिए, वरना वे कानूनी रूप से जिम्मेदार होंगे। यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत में साइबर फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हाल के वर्षों में सरकारी एजेंसियों के नाम पर ठगी की घटनाएं आम हो गई हैं। सरकार SIM बाइंडिंग जैसे उपायों पर भी जोर दे रही है, ताकि बिना एक्टिव SIM वाले यूजर्स ऐप्स का इस्तेमाल न कर सकें।
विशेषज्ञों की राय
फिनइन्फ्लुएंसर अंकुर वरिकoo सहित कई विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भारत जैसे देश में जहां स्कैम्स पहले से ही बड़ी समस्या हैं, बिना मजबूत एंटी-अब्यूज सिस्टम के यह फीचर ‘आपदा’ साबित हो सकता है। कुछ यूजर्स ने टेलीग्राम की तुलना करते हुए स्कैमर्स के लिए आसान माहौल बनने की आशंका जताई है।
व्हाट्सएप ने सुरक्षा उपायों का उल्लेख किया है, जैसे कुछ नामों (सेलिब्रिटी, सरकारी इकाइयों) को रोकना और अनचाहे मैसेज के लिए ऑप्शनल सिक्योरिटी की, लेकिन सरकार इन्हें पर्याप्त नहीं मान रही।
आगे क्या?
सरकार के निर्देश के बाद मेटा को जल्द ही जवाब देना होगा। अगर फीचर में संशोधन की जरूरत पड़ी तो रोलआउट में और देरी हो सकती है। इस बीच, यूजर्स को सलाह दी जा रही है कि संदिग्ध संपर्कों से सावधानी बरतें और वेरिफाइड अकाउंट्स पर भरोसा करें। यह घटनाक्रम डिजिटल प्राइवेसी और सुरक्षा के बीच संतुलन की चुनौती को रेखांकित करता है। व्हाट्सएप के 30 करोड़ से ज्यादा भारतीय यूजर्स को प्रभावित करने वाले इस फीचर पर नजरें टिकी हुई हैं।
यह भी पढ़ें: नोएडा पुलिस को बड़ी सफलता, राहगीरों से मोबाइल छीनकर बैंक खाते से रकम उड़ाने वाला गिरोह गिरफ्तार, iPhone-16 सहित कई सामान बरामद

